Tag: रोजगार

खुलेंगे रोजगार के द्वार: 9th से 12th तक के स्टूडेंट्स को दिया जाएगा खास प्रशिक्षण

खुलेंगे रोजगार के द्वार: 9th से 12th तक के स्टूडेंट्स को दिया जाएगा खास प्रशिक्षण

देहरादून
विद्यार्थियों को पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में दिया जाएगा प्रशिक्षण। समग्र शिक्षा उत्तराखण्ड और स्विस एजुकेशन ग्रुप के मध्य किया गया एम.ओ.यू। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में किया गया समझौता ज्ञापन। राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा बंशीधर तिवारी एवं स्विस एजुकेशन ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हिराज आर्टिनियन ने किये समझौते पर हस्ताक्षर। पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी में बेहतर प्रशिक्षण से राज्य में बढ़ेगें रोजगार के अवसर -मुख्यमंत्री। मानसखण्ड मन्दिर माला मिशन पर तेजी से किये जा रहे हैं कार्य। देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में गुरूवार को सचिवालय में समग्र शिक्षा उत्तराखण्ड और स्विस एजुकेशन ग्रुप, स्विटजरलैंण्ड के मध्य समझौता ज्ञापन किया गया। उत्तराखण्ड में 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए पर्यटन और हॉ...
पहाड़ की खूबसूरती को बबार्द करते ये कूड़े के ढेर!  

पहाड़ की खूबसूरती को बबार्द करते ये कूड़े के ढेर!  

पर्यावरण
पहाड़ में कूड़ा निस्तारण एक गंभीर समस्‍या! भावना मासीवाल पहाड़ की समस्याओं पर जब भी चर्चा होती है तो उसमें रोजगार और पलायन मुख्य मुद्दा बनकर आता है. यह मुद्दा तो पहाड़ की केंद्रीय समस्याओं की धूरी तो है ही. इसके साथ ही अन्य समस्याएं भी so पहाड़ के जीवन को प्रभावित कर रही है. इनमें एक समस्या है कूड़े का निस्तारण. आप भी सोचेंगे भला रोजगार और पलायन जैसे प्रमुख मुद्दों को छोड़कर कहा एक कूड़े के निस्तारण के मुद्दे पर चर्चा हो रही है. यह विषय देखने में जितना छोटा व गैर जरूरी लगता है. दरअसल उतना है नहीं. कूड़ा निस्तारण की समस्या पूरे विश्व की समस्या है. पलायन हमारा देश भारत स्वयं भी प्रति दिन उत्सर्जित लाखों टन कूड़े के निस्तारण की समस्या से जूझ रहा है. हमारे देश में 1.50 लाख मेट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है. इसमें से भी कुछ so प्रतिशत कूड़े का ही निस्तारण हो पाता है. शेष कूड़ा महानगरों में शहर ...
धार, खाळ, खेत से सैंण तक

धार, खाळ, खेत से सैंण तक

साहित्‍य-संस्कृति
विजय कुमार डोभाल पहाड़ी क्षेत्र में जन्मे, पले-बढ़े, शिक्षित-दीक्षित होने के बाद यहीं रोजगार (अध्यापन- कार्य) मिलने के कारण कभी भी यहां से दूर जाने का मन ही नहीं हुआ. वैसे भी हम पहाड़ी-लोगों की अपनी कर्मठता, आध्यात्मिकता तथा संघर्षशीलता अपनी अलग ही पहचान रखती है. हमारा अपना संसार पहाड़ के विभिन्न स्वरूपों धार खाळ, खेत, सैंण से शुरू होकर तराई-भाबर तक ही सीमित हैं. हमारी पढ़ाई-लिखाई, खरीददारी, व्यापार, रिश्ते-नातेदारी आदि भी यहीं तक सीमित होती है. हमारा पहाड़ पावन गंगा-यमुना के उद्गम, पवित्र चार धाम, अन्य तीर्थस्थानों, विश्व प्रसिद्ध पर्यटक-स्थलों, सांस्कृतिक धरोहरों, ब्रह्मकमल, मोनाल, कस्तूरी मृग, बुरांश आदि के कारण देशवासियों ही नहीं वरन् विदेशियों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है. हमारा पहाड़ पावन गंगा-यमुना के उद्गम, पवित्र चार धाम, अन्य तीर्थस्थानों, विश्व प्रसिद्ध पर्यटक-स्थलों, स...
मोटा बांस भालू बांस

मोटा बांस भालू बांस

साहित्यिक-हलचल
जे. पी. मैठाणी सड़क किनारे उस मोटे बांस की पत्तियों को तेज धूप में मैंने, नीली छतरी के नीचे मुस्कुराते, हिलते-डुलते, नाचते-गाते देखा। ये बांस बहुत उपयोगी है- वैज्ञानिक नाम इसका डेंड्राकैलामस जाइगेंटिस हुआ ये पोएसी परिवार से ताल्लुक रखता है। आम बोलचाल में इसे मोटा बांस कहते हैं, सिक्किम की तरफ भालू बांस, असम में वोर्रा, अरूणाचल में माइपो, मणिपुर में मारिबोल, नागालैण्ड में वारोक और मिजोरम में राॅनल कहाजाता है। बांस का जड़ तंत्र, मिट्टी को बांधे रखता है जब बहुत पहले प्लास्टिक और पाॅलिथीन नहीं था इसके तनों में रखा जाता था अनाज पानी लाने ले जाने के लिए किया जाता था उपयोग। इसके नये कंद से बनाई जाती है सब्जी और एक पारंपरिक उम्दा किस्म का अचार। आज नवीन के युग में शौकिया लोग इसमें- फूल-पौधे उगाने लगे हैं। बनाये जाने लगे हैं बांस से- बोर्ड, फर्नीचर, कागज, कपड़े, मोटे...