उत्तराखंड हलचल

जब खेतों से लौटती है गौरा : सातूं-आठूं में अन्न, बेटी और पहाड़ की स्मृति

जब खेतों से लौटती है गौरा : सातूं-आठूं में अन्न, बेटी और पहाड़ की स्मृति

पिथौरागढ़, लोक पर्व-त्योहार
 प्रकाश चन्द्र पुनेठा सिलपाटा, पिथौरागढ़ भादो की पंचमी से अष्टमी तक चलने वाला कुमाऊं का यह लोकपर्व केवल गौरा-महेश्वर की आराधना नहीं, बल्कि अन्न, कृषि-चक्र, स्त्री-स्मृति और सामुदायिक जीवन का उत्सव भी है। पहाड़ में त्योहार केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं होते। वे मौसम के साथ आते हैं, खेतों के साथ बदलते हैं और घर-परिवार के रिश्तों में अपना अर्थ खोजते हैं। कुछ पर्व ऐसे भी हैं, जिनमें देवता और मनुष्य के बीच की दूरी बहुत कम रह जाती है। गौरा-महेश्वर का सातूं-आठूं ऐसा ही एक लोकपर्व है। कुमाऊं के सीमांत अंचल, विशेषकर पिथौरागढ़ में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी से शुरू होकर सप्तमी और अष्टमी तक चलने वाला यह पर्व अपने भीतर पहाड़ के जीवन की कई परतें समेटे हुए है। इसे शिव-पार्वती अर्थात गौरा-महेश्वर से जोड़ा जाता है, लेकिन इसके अनुष्ठानों में जितनी जगह देवताओं की है, उतनी ही खेत की मिट्टी, अन...
किम्मी गांव की बदलेगी तस्वीर, ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना में गोद, 70 किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

किम्मी गांव की बदलेगी तस्वीर, ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना में गोद, 70 किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

उत्तरकाशी
  बीज से बाजार तक किसानों को मिलेगी मदद, प्रशिक्षण, मृदा परीक्षण, खरीद कैंप और भंडारण की सुविधाओं से बढ़ेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्थाहिमांतर ब्यूरो, नौगांव /उत्तरकाशी उत्तराखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में कृषि उत्पादन मंडी समिति नौगांव ने महत्वपूर्ण पहल की है। ‘एक मंडी, एक गांव योजना’ के तहत मंडी समिति ने रवांई घाटी के शून्य प्रतिशत पलायन वाले किम्मी गांव को गोद लिया है। अब मंडी के सहयोग से गांव को आदर्श मंडी गांव के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इस पहल का उद्देश्य गांव में कृषि एवं बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। योजना के तहत प्रगतिशील किसानों को मॉडल फार्म के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि उनकी सफलता से अन्य किसान...
उत्तरकाशी: रूपनौल सौड़ बुग्याल में पहली बार मनेगा बटर फेस्टिवल

उत्तरकाशी: रूपनौल सौड़ बुग्याल में पहली बार मनेगा बटर फेस्टिवल

उत्तरकाशी
  कृष्ण जन्माष्टमी पर 4 सितंबर को होगा आयोजन, चार पट्टियों के ग्रामीणों ने शुरू की तैयारियां; पर्यटन मानचित्र पर पहचान बनाने की उम्मीदनीरज उत्तराखंडी, नौगांव (उत्तरकाशी)उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल बटर फेस्टिवल की तर्ज पर अब बौख टिब्बा डांडा स्थित रूपनौल सौड़ बुग्याल को भी पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की पहल शुरू हो गई है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर को पहली बार रूपनौल सौड़ बुग्याल में बटर फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर दशगी, भंडारस्यु, बड़कोट और पल्ली मुंगरसन्ति पट्टियों के ग्रामीणों में खासा उत्साह है और तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। वन देवियों की पूजा-अर्चना और स्थानीय लोक परंपराओं के साथ होने वाले इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ रूपनौल सौड़ की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया के पर्यटकों ...
देवीधुरा में फलों-फूलों से बरसी बग्वाल

देवीधुरा में फलों-फूलों से बरसी बग्वाल

चम्‍पावत
  ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु, मुख्यमंत्री धामी ने की कई विकास घोषणाएंहिमांतर ब्यूरो, चम्पावतविश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम, देवीधुरा में शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस अनूठे मेले में आस्था, लोक परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। फलों और फूलों की बरसात के बीच चार खाम-सात थोक के बग्वालियों ने सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मेले में पहुंचकर माँ वाराही के दर्शन किए और बग्वाल का अवलोकन किया।मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे, जहां जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। पारंपरिक छोलिया नृत्य के साथ उनका अभिनंदन किया गया। इसके बाद उन्होंने माँ वाराही देवी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। ...
ऊन कटाई पर्व: देवक्यारा बुग्याल से लौटीं भेड़-बकरियां, ढोल-दमाऊं और तांदी नृत्य से जीवंत हुई लोक संस्कृति

ऊन कटाई पर्व: देवक्यारा बुग्याल से लौटीं भेड़-बकरियां, ढोल-दमाऊं और तांदी नृत्य से जीवंत हुई लोक संस्कृति

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोला/मोरीउत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के दूरस्थ पर्वतीय गांव इन दिनों सदियों पुरानी लोक परंपरा ऊन कटाई पर्व के उल्लास में डूबे हुए हैं। देवक्यारा बुग्याल सहित ऊंचाई वाले चरागाहों में करीब तीन माह तक भेड़-बकरियों और मवेशियों को चराने के बाद अगस्त-सितंबर में भेड़पालकों यानी स्थानीय बोली में ‘भेड़ाल’ की गांवों में वापसी शुरू हो गई है। पशुधन के साथ गांव लौटते भेड़ालों के स्वागत को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।तीन माह बाद घर लौटता है पशुधन, शुरू होती है पर्व की रौनकगर्मियों की शुरुआत के साथ मोरी क्षेत्र के कई गांवों से भेड़पालक अपने पशुधन को लेकर ऊंचे बुग्यालों और पारंपरिक चरागाहों की ओर निकल जाते हैं। देवक्यारा कुयाल और आसपास के बुग्यालों में करीब तीन माह तक भेड़-बकरियों एवं अन्य मवेशियों को चराने के बाद अब उनकी वापसी शुरू ह...
हिलजात्रा: मुखौटों में जीवित सोर घाटी की 500 साल पुरानी लोक-स्मृति

हिलजात्रा: मुखौटों में जीवित सोर घाटी की 500 साल पुरानी लोक-स्मृति

पिथौरागढ़, लोक पर्व-त्योहार
 प्रकाश चन्द्र पुनेठा सिलपाटा, पिथौरागढ़ पिथौरागढ़ की सोर घाटी में हिलजात्रा केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि पहाड़ के उस सामूहिक जीवन की स्मृति है, जिसमें खेती, पशु, जंगल, देवता और मनुष्य एक-दूसरे से अलग नहीं थे। कुमौड़ में मनाया जाने वाला यह पर्व लगभग पाँच सौ वर्षों की परंपरा को अपने भीतर समेटे हुए है। समय बदला, खेतों की मेड़ें सूनी होने लगीं, गांवों से पलायन बढ़ा और खेती का स्वरूप भी बदलता गया, लेकिन हिलजात्रा आज भी उस लोक-संसार की बची हुई आवाज की तरह हमारे सामने आती है। हिलजात्रा के केंद्र में उसके मुखौटे और पात्र हैं—लखिया भूत, वीरभद्र तथा खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन से जुड़े अनेक रूप। ये मुखौटे केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं। इनके पीछे पहाड़ के लोकजीवन की गहरी स्मृतियां छिपी हैं। जब कलाकार इन्हें धारण करते हैं, तो उनके चेहरे भले ही ओझल हो जाते हैं, लेकिन उन्हीं मुखौटों के भीतर...
हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक : मुख्यमंत्री धामी

हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून
  मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री आवास से पिथौरागढ़ की ऐतिहासिक हिलजात्रा महोत्सव को किया संबोधितहिमांतर ब्यूरो, देहरादून/पिथौरागढ़मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास से पिथौरागढ़ में आयोजित ऐतिहासिक हिलजात्रा महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर पिथौरागढ़ की जनता को हिलजात्रा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम जाखनी, पिथौरागढ़ स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिलजात्रा उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण पर्व है। घर-घर में मां गौरा और भगवान महेश्वर की पारंपरिक पूजा के साथ सातू-आठू पर्व से हिलजात्रा की भक्ति धारा प्रवाहित होती है। उन्होंने कामना की कि इसी प्रकार सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और ...
‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार

‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार

पौड़ी गढ़वाल
  कोटद्वार। कण्वाश्रम की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत को देश के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने वाली पुस्तक ‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिला है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स एवं मेंबर्स ऑफ इंटरनेशनल पब्लिशर्स एसोसिएशन, जिनेवा की ओर से आयोजित 46वें पुरस्कार समारोह में पुस्तक को आर्ट एवं कॉफी टेबल बुक (C.B.T.) श्रेणी में देशभर में प्रथम स्थान मिला। सोमवार को माल गोदाम रोड स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूड़ी भूषण और पुस्तक के लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार मनोज ईष्टवाल ने यह जानकारी दी। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि गत 19 जुलाई को कण्व नगरी कोटद्वार में पुस्तक का लोकार्पण किया गया था। लोकार्पण के महज एक माह के भीतर ही पुस्तक ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्ल...
पहाड़ के युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने की पहल, दून पुस्तकालय में कार्यशाला

पहाड़ के युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने की पहल, दून पुस्तकालय में कार्यशाला

देहरादून
दून पुस्तकालय ने आयोजित की पहाड़ में पलायन व उद्यमिता पर युवाओं के साथ संवाद कार्यशालाहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनपहाड़ के गाँवों से युवाओं का पलायन आज एक गंभीर चुनौती है, लेकिन पहाड़ की तस्वीर केवल पलायन और बेरोजगारी की नहीं है। अनेक युवा ऐसे भी हैं, जो नई सोच, तकनीक और उद्यमिता के सहारे अपने गाँवों में लौटकर न केवल स्वयं के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं, बल्कि दूसरे लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। यदि पहाड़ के युवाओं को स्थानीय संसाधनों, आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ दिया जाए तो रोजगार के लिए होने वाले पलायन की दिशा को काफी हद तक बदला जा सकता है। यह बात वरिष्ठ सामाजिक चिंतक और लेखक विजेन्द्र रावत ने सोमवार को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में युवा पाठकों के साथ आयोजित ‘युवा संवाद कार्यशाला : पहाड़ होगा, आने वाला कल’ में कही। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से आयोज...
एक मुट्ठी चावल से बताते हैं भूत, भविष्य और वर्तमान! जानिए शक्ति प्रसाद सेमवाल की अनोखी गणत विद्या

एक मुट्ठी चावल से बताते हैं भूत, भविष्य और वर्तमान! जानिए शक्ति प्रसाद सेमवाल की अनोखी गणत विद्या

देहरादून
  ‘भक्ति की शक्ति’ कहें या ‘शक्ति की भक्ति’?दिनेश रावत “आप अपने घर से चावल की केवल एक मुट्ठी लेकर उनके पास जाइए। वे अपना स्यांरू-पासू निकालेंगे और उसी एक मुट्ठी चावल को देखकर आपके भूत, वर्तमान और भविष्य की कुछ तस्वीरें आपके सामने रख देंगे; यूँ कहें कि आपके बारे में बहुत कुछ बताने लगेंगे।”लोकपूजित एवं प्रतिष्ठित इष्टदेवी माँ रेणुका की दिव्य उपासना, प्रचलित देवपरंपरा और पीढ़ियों से चली आ रही गणत विद्या की साधना—इन तीनों को यदि एक साथ देखें, तो सहज ही एक नाम सामने आता है—श्रद्धेय श्री शक्ति प्रसाद सेमवाल जी।उन्हें देखते-समझते हुए मन में सहज ही एक प्रश्न उठता है कि इसे ‘भक्ति की शक्ति’ कहें या ‘शक्ति की भक्ति’? शायद दोनों ही अभिव्यक्तियाँ उनके व्यक्तित्व और साधना पर समान रूप से सार्थक बैठती हैं। क्योंकि जहाँ उनकी भक्ति में शक्ति का अनुभव होता है, वहीं उनकी शक्ति का मूल भी भक...