उत्तराखंड हलचल

बौल्याधार में गूंजा लोक संस्कृति का रंग, देव डोलियों के सानिध्य में थिरके कदम

बौल्याधार में गूंजा लोक संस्कृति का रंग, देव डोलियों के सानिध्य में थिरके कदम

उत्तरकाशी, लोक पर्व-त्योहार
  हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मेले में उमड़ा आस्था और परंपरा का सैलाबनीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीगाजणा क्षेत्र के ठांडी गांव स्थित बौल्याधार में आयोजित तीन दिवसीय ऐतिहासिक एवं पौराणिक मेला रविवार को पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और लोक संस्कृति के रंगों के बीच संपन्न हुआ। 4 से 6 सितंबर तक चले इस मेले में क्षेत्र की लोक आस्था, देव परंपरा, पशुपालन और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाला यह मेला गाजणा क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी माना जाता है। मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचे तथा देवडोलियों के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।देवडोलियों के सानिध्य में हुए धार्मिक अनुष्ठान मेले में...
संविधान क्लब, नई दिल्ली में डॉ. चंद्र लाल भारती को मिला ‘राष्ट्र रत्न सम्मान 2026’

संविधान क्लब, नई दिल्ली में डॉ. चंद्र लाल भारती को मिला ‘राष्ट्र रत्न सम्मान 2026’

उत्तरकाशी
  सामाजिक सरोकार, मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के उत्थान में योगदान के लिए हुए सम्मानितनीरज उत्तराखंडी, पुरोलाजनपद उत्तरकाशी के नौगांव विकासखंड के ग्राम ब्यांली, पट्टी बनाल के मूल निवासी एवं वर्तमान में कुआंवाला निवासी डॉ. चंद्र लाल भारती को सामाजिक सरोकार, मानवाधिकार, सामाजिक न्याय तथा वंचित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए किए जा रहे कार्यों के लिए नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब में आयोजित कार्यक्रम में ‘राष्ट्र रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया।डॉ. चंद्र लाल भारती वर्तमान में लोक निर्माण विभाग, हरिद्वार में सिविल इंजीनियर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकारी दायित्वों के निर्वहन के साथ-साथ वे सामाजिक विषयों पर भी सक्रिय रहते हैं और समाज में समानता, न्याय, मानव गरिमा तथा नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।उत...
हिमालय का ‘योद्धा’ 84 की उम्र में भी मैदान में: एसपी चमोली के छह दशक के साहस को सलाम!

हिमालय का ‘योद्धा’ 84 की उम्र में भी मैदान में: एसपी चमोली के छह दशक के साहस को सलाम!

टिहरी गढ़वाल
  5,000 KM का हिमालयी सफर, 106 दर्रे, नीलकंठ-सासेर कांगड़ी की चोटियां और ब्रह्मपुत्र की प्रचंड धाराएं—एसपी चमोली को टेंज़िंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार की ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ श्रेणी के लिए चुना गया  विजेन्द्र रावत, वरिष्ठ पत्रकारमसूरी। 265 दिन। 5,000 किलोमीटर से अधिक का सफर। हिमालय के 106 दुर्गम दर्रे। एक तरफ कंचनजंगा, दूसरी तरफ काराकोरम। रास्ते में बर्फ, खतरनाक ढलानें और प्रकृति की ऐसी चुनौतियां, जहां एक गलत कदम जिंदगी पर भारी पड़ सकता था। यह किसी फिल्म की पटकथा नहीं थी। वर्ष 1981 में शिव प्रसाद चमोली (एसपी चमोली) के नेतृत्व में निकले संयुक्त भारत–न्यूजीलैंड हिमालयन ट्रैवर्स अभियान की यह वास्तविक कहानी थी। महान पर्वतारोही सर एडमंड हिलेरी के संरक्षण में हुए इस अभियान ने चमोली का नाम भारतीय साहसिक इतिहास में दर्ज कर दिया। लेकिन यह उनकी कहानी का केवल एक अध्याय था। ...
कंधे पर यात्रियों का सामान, जेब में ₹35… हरकी दून की पगडंडी से ‘हिमालयन हाइकर्स’ तक भगत सिंह रावत का सफर

कंधे पर यात्रियों का सामान, जेब में ₹35… हरकी दून की पगडंडी से ‘हिमालयन हाइकर्स’ तक भगत सिंह रावत का सफर

उत्तरकाशी
  15–16 साल की उम्र में पोर्टर बने, NIM से सीखा पर्वतारोहण; फिर ठाना- पहाड़ का युवा सिर्फ बोझ नहीं ढोएगा, गाइड और पर्यटन उद्यमी भी बनेगानीरज उत्तराखंडी | उत्तरकाशीहरकी दून की दुर्गम पगडंडियां... कंधे पर यात्रियों का भारी सामान और दिनभर की कठिन चढ़ाई। उम्र महज 15–16 साल। दिनभर की मेहनत के बाद हाथ में आए ₹35। उत्तरकाशी जिले के संकरी गांव के भगत सिंह रावत को आज भी अपनी पहली मजदूरी याद है। तब शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि यही ₹35 उनके जीवन की उस लंबी यात्रा की शुरुआत बनेंगे, जो एक दिन उन्हें पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने तक ले जाएगी। एक किशोर पोर्टर के रूप में शुरू हुआ उनका सफर पर्वतारोहण के प्रशिक्षण से गुजरते हुए उद्यमिता तक पहुंचा और आगे चलकर इसी अनुभव और सोच ने ‘हिमालयन हाइकर्स’ की नींव रखने की प्रेरणा दी। भगत सिंह रावत की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के संघर्...
रवांई के लाल धान पर रोग का साया, किसान चिंतित

रवांई के लाल धान पर रोग का साया, किसान चिंतित

उत्तरकाशी
  स्वई-भाटी गांव में कॉलर शीथ रॉट (Collar Sheath Rot) और ब्लास्ट के लक्षण, बालियों और दाना बनने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर; कृषि विभाग की टीम ने खेतों का किया निरीक्षणहिमांतर ब्यूरो, पुरोला (उत्तरकाशी)रवांई की पहचान और किसानों की आर्थिकी से जुड़ी पारंपरिक लाल धान की फसल पर रोग का खतरा मंडराने लगा है। पुरोला क्षेत्र के स्वई-भाटी गांव में धान के पौधों पर कॉलर शीथ रॉट और ब्लास्ट रोग के लक्षण मिलने से किसान चिंतित हैं। बीमारी के फैलाव से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका के बीच कृषि विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर खेतों का निरीक्षण किया और किसानों को रोग की रोकथाम के लिए जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी। कृषि विभाग की टीम ने प्रभावित खेतों में पौधों और बालियों का बारीकी से निरीक्षण कर रोग के लक्षणों की जानकारी जुटाई। किसानों से बीमारी के फैलाव और फसल को अब तक हुए नुकसान के बारे में...
जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान की पहल पर सरकार सक्रिय

जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान की पहल पर सरकार सक्रिय

उत्तरकाशी
  जिला पंचायतों की 15% हिस्सेदारी बरकरार रखने की मांग को मिला बल, मदन कौशिक ने सचिव पंचायतीराज को दिए कार्रवाई के निर्देशहिमांतर ब्यूरो, उत्तरकाशी/देहरादूनजिला पंचायतों के वित्तीय हितों को लेकर उत्तरकाशी जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश सिंह चौहान की पहल अब शासन स्तर तक पहुंच गई है। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग के तहत जिला पंचायतों को मिलने वाली 15 प्रतिशत वित्तीय हिस्सेदारी यथावत रखने की उनकी मांग पर पंचायतीराज मंत्री मदन कौशिक ने संज्ञान लिया है। मंत्री ने सचिव पंचायतीराज, उत्तराखंड शासन को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश सिंह चौहान ने जिला पंचायतों की वित्तीय मजबूती और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की निरंतरता को देखते हुए 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रखने का मुद्दा सरकार के समक्ष उठाया था। उन्होंने इस संबंध में पंचायतीराज मंत्री को ...
युवा शक्ति के संकल्प से साकार होगा नशामुक्त उत्तराखंड : डॉ. धन सिंह रावत

युवा शक्ति के संकल्प से साकार होगा नशामुक्त उत्तराखंड : डॉ. धन सिंह रावत

देहरादून
  पित्थूवाला पॉलिटेक्निक में छात्र-छात्राओं ने ली नशामुक्ति की शपथ | प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों में 100 दिन चलेगा महाभियानहिमांतर वेब डेस्कदेहरादून। विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि युवाओं के दृढ़ संकल्प और जनभागीदारी से नशामुक्त उत्तराखंड का लक्ष्य साकार होगा। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।डॉ. रावत राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पित्थूवाला में 100 दिवसीय नशामुक्ति महाभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को नशामुक्ति की शपथ दिलाते हुए स्वयं नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बन...
कचरे और सीवर में दम तोड़ती रिस्पना, ‘टेम्स’ बनाने का सपना आठ साल बाद भी अधूरा!

कचरे और सीवर में दम तोड़ती रिस्पना, ‘टेम्स’ बनाने का सपना आठ साल बाद भी अधूरा!

देहरादून
  कभी देहरादून की जीवनरेखा थी रिस्पना, अब कई हिस्सों में नाले जैसी हालत; सीवर, कचरा और अतिक्रमण बड़ी चुनौती, पुनर्जीवन के लिए फिर बनी टास्क फोर्सप्रेम पंचोली, वरिष्ठ पत्रकारदेहरादून। कभी देहरादून की जीवनरेखा कही जाने वाली रिस्पना आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। मसूरी की पहाड़ियों के जलागम क्षेत्र से निकलने वाली इस नदी का साफ पानी शहर में प्रवेश करते-करते कई स्थानों पर सीवर और गंदे नालों के प्रवाह में बदलता दिखाई देता है। नदी में कूड़ा, अनुपचारित गंदा पानी और लगातार बढ़ता मानवीय दबाव इसके प्राकृतिक स्वरूप को खत्म कर रहा है। करीब आठ वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रिस्पना को पुनर्जीवित कर ‘ऋषिपर्णा’ बनाने का महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया था। लंदन की टेम्स नदी के पुनर्जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने जनभागीदारी के जरिए रिस्पना को फिर से जीवित करन...
बड़कोट की यमुना पंपिंग पेयजल योजना 15 साल से अधर में, चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी इंतजार

बड़कोट की यमुना पंपिंग पेयजल योजना 15 साल से अधर में, चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी इंतजार

उत्तरकाशी
  डेढ़ दशक से बड़कोट को इंतजार, कभी सर्वे तो कभी डीपीआर में उलझी योजना; अब फिर नई डीपीआर अंतिम चरण मेंहिमांतर ब्यूरो, बड़कोट (उत्तरकाशी)चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा और करीब डेढ़ दशक का इंतजार। इसके बावजूद बड़कोट नगर की बहुप्रतीक्षित यमुना पंपिंग पेयजल योजना सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। कभी सर्वे, कभी डीपीआर तो कभी शासन की मंजूरी के फेर में योजना अटकती रही। अब जल निगम से गढ़वाल जल संस्थान पुरोला को योजना हस्तांतरित होने के बाद एक बार फिर नई डीपीआर तैयार की जा रही है। विभाग का दावा है कि डीपीआर अंतिम चरण में है और जल्द शासन को भेज दी जाएगी। बड़कोट में आबादी बढ़ने के साथ पानी की जरूरत भी बढ़ी है, लेकिन मौजूदा पेयजल स्रोत नाकाफी साबित हो रहे हैं। पुरानी पेयजल योजना के साथ नलकूप से भी आपूर्ति की जा रही है, फिर भी गर्मियों में नलों का हलक सूख जाता है। कई क्षेत्रों में ...
जब खेतों से लौटती है गौरा : सातूं-आठूं में अन्न, बेटी और पहाड़ की स्मृति

जब खेतों से लौटती है गौरा : सातूं-आठूं में अन्न, बेटी और पहाड़ की स्मृति

पिथौरागढ़, लोक पर्व-त्योहार
 प्रकाश चन्द्र पुनेठा सिलपाटा, पिथौरागढ़ भादो की पंचमी से अष्टमी तक चलने वाला कुमाऊं का यह लोकपर्व केवल गौरा-महेश्वर की आराधना नहीं, बल्कि अन्न, कृषि-चक्र, स्त्री-स्मृति और सामुदायिक जीवन का उत्सव भी है। पहाड़ में त्योहार केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं होते। वे मौसम के साथ आते हैं, खेतों के साथ बदलते हैं और घर-परिवार के रिश्तों में अपना अर्थ खोजते हैं। कुछ पर्व ऐसे भी हैं, जिनमें देवता और मनुष्य के बीच की दूरी बहुत कम रह जाती है। गौरा-महेश्वर का सातूं-आठूं ऐसा ही एक लोकपर्व है। कुमाऊं के सीमांत अंचल, विशेषकर पिथौरागढ़ में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी से शुरू होकर सप्तमी और अष्टमी तक चलने वाला यह पर्व अपने भीतर पहाड़ के जीवन की कई परतें समेटे हुए है। इसे शिव-पार्वती अर्थात गौरा-महेश्वर से जोड़ा जाता है, लेकिन इसके अनुष्ठानों में जितनी जगह देवताओं की है, उतनी ही खेत की मिट्टी, अन...