खुशखबरी: साइबर ठगी के पीड़ितों को राहत, फ्रीज रकम वापस पाने के लिए गृह मंत्रालय ने शुरू किया MRM पोर्टल

Special Task Force Uttarakhand

 

  • हिमांतर ब्यूरो, देहरादून/नई दिल्ली

साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के अंतर्गत नया मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल के माध्यम से साइबर अपराध के पीड़ित अब घर बैठे अपनी फ्रीज (होल्ड) की गई धनराशि वापस पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

एसटीएफ उत्तराखंड के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अब पीड़ितों को अपनी धनराशि वापस पाने के लिए विभिन्न कार्यालयों और बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन, सरल और पारदर्शी बनाया गया है।

कौन कर सकता है आवेदन

एमआरएम पोर्टल पर केवल वही व्यक्ति आवेदन करने के पात्र होंगे जिन्होंने साइबर धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज कराई हो तथा उन्हें 14 अंकों का रजिस्टर्ड एक्नॉलेजमेंट नंबर प्राप्त हुआ हो।

यह सुविधा केवल उन मामलों में उपलब्ध होगी, जिनमें अपराधियों के बैंक खातों में धनराशि को समय रहते फ्रीज (होल्ड) कर दिया गया हो। जिन मामलों में ठगी की गई राशि अपराधी बैंक खातों से निकाल चुके हैं, उन पर यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।

तीन श्रेणियों में होगी धनवापसी

पहली श्रेणी: यदि किसी एक बैंक खाते में 50 हजार रुपये तक की राशि होल्ड हुई है, तो धनवापसी के लिए एफआईआर या न्यायालय के आदेश की आवश्यकता नहीं होगी। पुलिस रिपोर्ट और इंडेम्निटी बॉन्ड के आधार पर राशि सीधे पीड़ित के खाते में भेजी जाएगी।

दूसरी श्रेणी: यदि कुल होल्ड राशि 50 हजार रुपये से अधिक है, लेकिन अलग-अलग खातों में विभाजित है और किसी भी एक खाते में 50 हजार रुपये से अधिक राशि नहीं है, तब भी बिना एफआईआर और न्यायालय आदेश के रिफंड किया जाएगा।

तीसरी श्रेणी: यदि किसी एक बैंक खाते में 50 हजार रुपये से अधिक की राशि होल्ड है, तो एफआईआर दर्ज होना अनिवार्य होगा। इसके बाद की समस्त कानूनी प्रक्रिया एमआरएम पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी।

ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

पीड़ित सबसे पहले एमआरएम पोर्टल पर जाकर ‘सिटिजन लॉगिन’ विकल्प के माध्यम से अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर से ओटीपी के जरिए लॉगिन करेंगे। इसके बाद ‘रेज रिफंड रिक्वेस्ट’ विकल्प में अपनी 14 अंकों की शिकायत आईडी दर्ज कर सत्यापन पूरा करेंगे।

संबंधित होल्ड राशि पोर्टल पर स्वतः दिखाई देगी। इसके बाद आवेदक को अपना पैन कार्ड अपलोड करना होगा तथा रिफंड प्राप्त करने के लिए बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड दर्ज करना होगा। आवेदन सबमिट होने के बाद एक यूनिक रिक्वेस्ट आईडी जारी की जाएगी, जिसके माध्यम से आवेदन की स्थिति ट्रैक की जा सकेगी।

पुलिस और बैंक की भूमिका

आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित पुलिस इकाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 106(3) के तहत आवश्यक इंडेम्निटी बॉन्ड और नोटिस पोर्टल पर अपलोड करेगी। इसके बाद संबंधित बैंक सीधे पीड़ित के खाते में धनराशि वापस करेगा।

बिचौलियों से सावधान रहने की अपील

एसटीएफ ने नागरिकों से अपील की है कि यह पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है। रिफंड दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति को धनराशि न दें। यदि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है, तो नजदीकी थाना या साइबर सेल से सहायता प्राप्त की जा सकती है।

पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करने अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है, ताकि समय रहते धनराशि को होल्ड कर नुकसान को कम किया जा सके।

स्रोत: Cyber Crime Police Station, Uttarakhand Police (Social Media-Facebook Page)

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