उत्तराखंड हलचल

न्याय विभाग से साहित्य तक: अनोज सिंह बनाली को मिलेगा ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’

न्याय विभाग से साहित्य तक: अनोज सिंह बनाली को मिलेगा ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’

उत्तरकाशी
इला चंद्र जोशी पुरस्कार के तहत ₹50,000 नगद, सम्मान-पत्र, स्मृति-चिन्ह और अंगवस्त्र से होगा सम्मानितहिमांतर ब्यूरो, नौगांव-बड़कोटसीमांत जनपद उत्तरकाशी ग्राम बिरगाड़ी से निकली एक सशक्त आवाज़ आज पूरे उत्तराखंड में गूंज रही है। अनोज सिंह ‘बनाली’, जो वर्तमान में उत्तराखंड के न्याय विभाग में कार्यरत हैं, को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान (इला चंद्र जोशी पुरस्कार) के लिए चयनित किया गया है। यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान के साथ-साथ उनके सामाजिक सरोकारों की भी बड़ी पहचान है।कविताओं में जीवंत होता गांव और समाज अनोज सिंह ‘बनाली’ की कविताएं केवल साहित्यिक रचनाएं नहीं, बल्कि गांव और समाज का जीवंत दस्तावेज़ हैं। उनके शब्दों में सास-बहू के रिश्तों की जटिलता, बेटी-बेटे की भावनाएं, माता-पिता की उम्मीदें, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और सरकारी सेवकों की जिम्मेदारियां- सभी ...
विलुप्त होती परंपरा: जांदरा-घराट अब बन रहे यादों का हिस्सा

विलुप्त होती परंपरा: जांदरा-घराट अब बन रहे यादों का हिस्सा

उत्तरकाशी
  ग्रामीण जीवन की पहचान रही हस्तचालित चक्की और पनचक्की पर संकटनीरज उत्तराखंडीपहाड़ के गांवों में कभी हर घर की धड़कन रही हस्तचालित चक्की (जांदरा/जांजो) और जलधारा से संचालित पनचक्की (घराट) आज विलुप्ति की कगार पर हैं। आधुनिक तकनीक, बदलती जीवनशैली और तेजी से हो रहे पलायन के बीच ये पारंपरिक साधन अब बुजुर्गों की यादों और पुराने घरों के कोनों तक सीमित होकर रह गए हैं।संस्कृति और सामूहिक जीवन का केंद्रग्रामीण क्षेत्रों में जांदरा केवल अनाज पीसने का साधन नहीं था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करता था। महिलाएं सुबह-शाम जांदरे पर काम करते हुए लोकगीत गाती थीं, जिससे न केवल श्रम सहज होता था बल्कि आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता था।वहीं घराट, पहाड़ों की नदियों और गाड़-गदेरों के पानी से चलने वाली पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण था। बिना बिजली के आटा पीसन...
मोरी उत्तरकाशी में आकाशीय बिजली का कहर: एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत

मोरी उत्तरकाशी में आकाशीय बिजली का कहर: एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, मोरी (उत्तरकाशी)विकासखण्ड मोरी के सला गांव के जंगलों में शनिवार को आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस प्राकृतिक आपदा में एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो गई, जिससे स्थानीय पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को क्षेत्र में अचानक मौसम ने करवट ली और तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने लगी। उसी दौरान ग्राम कासला के पशुपालक—चैन सिंह (पुत्र जोत सिंह), संदीप (पुत्र चैन सिंह), नारायण सिंह (पुत्र चैन सिंह) और विक्रम सिंह (पुत्र जोत सिंह)—की भेड़-बकरियां सला गांव के जंगलों में चर रही थीं। अचानक गिरी बिजली की चपेट में आने से मौके पर ही एक दर्जन से अधिक पशुओं की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इन दिनों कासला गांव के पशुपालक अपने मवेशियों को चरान-चुगान के लिए मोरी क्षेत्र के सला गांव के जंगलों में ले जाते हैं...
मोरी के फिताड़ी गांव में भीषण अग्निकांड: 8 परिवार बेघर, 4 मकान जलकर राख, जनहानि टली

मोरी के फिताड़ी गांव में भीषण अग्निकांड: 8 परिवार बेघर, 4 मकान जलकर राख, जनहानि टली

उत्तराखंड हलचल
 ग्राउंड रिपोर्ट | मोरी (उत्तरकाशी) से नीरज उत्तराखंडीउत्तरकाशी जिले की मोरी तहसील के दूरस्थ गांव फिताड़ी में सोमवार देर रात एक भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। रात करीब 11 बजे ग्राम प्रधान द्वारा आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और फायर सर्विस मोरी व पुरोला, एसडीआरएफ, पुलिस, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें तुरंत मौके के लिए रवाना हुईं।फिताड़ी गांव, मोरी बाजार से करीब 35 किलोमीटर दूर दुर्गम क्षेत्र में स्थित है, जहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शुरुआती राहत और बचाव का जिम्मा स्थानीय ग्रामीणों ने ही संभाला। ग्रामीणों की तत्परता और एकजुट प्रयासों से आग पर काबू पाया जा सका, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।हालांकि, आग की लपटों ने कई परिवारों की वर्षों की मेहनत को राख में बदल दिया। राजस्व उप निरीक्षक के अनुसार, आग लगने क...
विलुप्त होती परंपरा: खत्म होने की कगार पर ‘घुत्तू’ से कपड़े धोने की संस्कृति

विलुप्त होती परंपरा: खत्म होने की कगार पर ‘घुत्तू’ से कपड़े धोने की संस्कृति

उत्तरकाशी
  रीठा और क्वार पात थे कभी पहाड़ का प्राकृतिक सर्फ, आधुनिकता की दौड़ में गुम होती विरासतनीरज उत्तराखंडीपहाड़ों की पारंपरिक जीवनशैली आत्मनिर्भरता और प्रकृति के साथ संतुलन की अनूठी मिसाल रही है. इसी जीवन पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था ‘घुत्तू’—कपड़े धोने का एक देसी और पर्यावरण अनुकूल तरीका, जो आज आधुनिक वाशिंग मशीनों और रासायनिक डिटर्जेंट के बीच धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया है.क्या होता था ‘घुत्तू’?‘घुत्तू’ लकड़ी या पत्थर से बना एक पारंपरिक उपकरण होता था, जिसमें कपड़ों को पानी में भिगोकर डंडों या हाथों से पीट-पीटकर साफ किया जाता था. यह तरीका न केवल प्रभावी था, बल्कि पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता था.रीठा और क्वार पात: प्राकृतिक सर्फआज जहां बाजार में केमिकल डिटर्जेंट का बोलबाला है, वहीं पहले कपड़े धोने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेम...
ओलावृष्टि से उत्तरकाशी की यमुना घाटी में फसलों को भारी नुकसान, गंगोत्री-हर्षिल में बर्फबारी

ओलावृष्टि से उत्तरकाशी की यमुना घाटी में फसलों को भारी नुकसान, गंगोत्री-हर्षिल में बर्फबारी

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, नौगांव, उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी में सोमवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली. तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने यमुना घाटी के कई क्षेत्रों में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया. आराकोट, मोरी, नौगांव, पुरोला और बड़कोट क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक हुई तेज ओलावृष्टि से नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ गई है और गंगोत्री व हर्षिल घाटी में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई. यमुना घाटी के नौगांव क्षेत्र की स्योंरी फल पट्टी, पुरोला के भंकोली और बड़कोट के धारी-कलोगी, मोरी के आराकोट बंगाण क्षेत्र सहित कई गांवों में अचानक ओले गिरने से खेतों में खड़ी मटर, गेहूं और सब्जियों की फसलें प्रभावित हुई हैं. ओलों की मार से खासकर मटर की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है. कई जगहों पर मटर की बेलें टूट गईं और तैयार फसल खेतों में बिछ गई. किसानों के अनुसार टम...
उत्तरकाशी नौगांव में जर्जर स्कूल में पढ़ाई: अनफिट भवन में बैठने को मजबूर बच्चे, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

उत्तरकाशी नौगांव में जर्जर स्कूल में पढ़ाई: अनफिट भवन में बैठने को मजबूर बच्चे, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, नौगांव, उत्तरकाशीउत्तरकाशी जनपद के विकासखंड नौगांव के अंतर्गत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिंगसी में शिक्षा व्यवस्था भय और असुरक्षा के साए में संचालित हो रही है. करीब पांच दशक पहले बने इस विद्यालय भवन को वर्ष 2023 में ही तकनीकी संस्था लोनिवि बड़कोट द्वारा निष्प्रयोज्य (अनफिट) घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद यहां नन्हे बच्चों को उसी जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है. विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक है. छत से टपकते पानी से बचाव के लिए ऊपर काली तिरपाल बिछाई गई है. टिन की चादरों को सहारा देने के लिए लगाए गए तख्ते और लकड़ी की बल्लियां भी सड़ चुकी हैं. भवन की एक दीवार में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और वह तिरछी हो गई है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है. कमरों में फैली नमी (सीलन) के कारण बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा भी लगातार बना ...
सीएम धामी ने पंतनगर में 119वें अखिल भारतीय किसान मेले का किया शुभारम्भ, 9 लाख किसानों को मिल रहा किसान सम्मान निधि का लाभ

सीएम धामी ने पंतनगर में 119वें अखिल भारतीय किसान मेले का किया शुभारम्भ, 9 लाख किसानों को मिल रहा किसान सम्मान निधि का लाभ

देहरादून
  कृषि को जंगली जानवरों से बचाने के लिए केंद्र से 25 करोड़ की पहली किस्त जारी पॉलीहाउस, एरोमा वैली और ड्रैगन फ्रूट को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर जोरहिमांतर ब्यूरो, पंतनगरमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने शनिवार को कृषि एवम् प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर (Govind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology), पंतनगर में 119वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया तथा विश्वविद्यालय साहित्य का विमोचन भी किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय में 119वें कृषि मेले का आयोजन होना हमारे लिए हर्ष का विषय है. इस प्रकार के मेले किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि यहां उन्हें कृषि के नवीन नवाचारों की जानकारी मिलती है तथा वैज्...
उत्तरकाशी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लौटी परिजनों की मुस्कान, रोहड़ू से सकुशल बरामद हुए चार मासूम

उत्तरकाशी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लौटी परिजनों की मुस्कान, रोहड़ू से सकुशल बरामद हुए चार मासूम

उत्तराखंड हलचल
 हिमांतर ब्यूरो,  मोरी/उत्तरकाशीघर से बिना बताए लापता हुए चार मासूम बच्चों को उत्तरकाशी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू क्षेत्र से सकुशल बरामद कर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बच्चों की सुरक्षित वापसी से परिजनों ने राहत की सांस ली और पुलिस का आभार जताया। जानकारी के अनुसार, बीते 11 मार्च को चौकी आराकोट, थाना मोरी में एक व्यक्ति ने सूचना दी कि उसके चार बच्चे, जिनकी उम्र लगभग 12 से 15 वर्ष के बीच है, 10 मार्च को घर से बिना बताए कहीं चले गए हैं और वापस नहीं लौटे। बच्चों के अचानक लापता होने से परिवार में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी श्रीमती कमलेश उपाध्याय के निर्देशन तथा पुलिस उपाधीक्षक जनक सिंह पंवार के निकट पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष मोरी दीपक रावत के नेतृत्व में तत्काल एक पुलिस टीम का गठन कर बच्चों की तल...
उत्तराखंड: घरेलू गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं- आनंद बर्द्धन, अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

उत्तराखंड: घरेलू गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं- आनंद बर्द्धन, अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

देहरादून
 हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमध्यपूर्व के देशों में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र प्रदेश में एलपीजी एवं ईंधन आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भराड़ीसैंण में उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में सभी जिलों के जिलाधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे. मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अफवाहों पर कड़ी नजर रखी जाए और किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था को प्रभावित न होने दिया जाए. जिलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-...