Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
फेसबुक पर विधायक से रोड मांग रहे उत्तराखंड के इस गांव के लोग

फेसबुक पर विधायक से रोड मांग रहे उत्तराखंड के इस गांव के लोग

अल्‍मोड़ा
हिमांतर ब्यूरो, द्वाराहाटअल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट तहसील के पटास गांव के लोग इनदिनों सोशल मीडिया पर अपने विधायक से रोड मांग रहे हैं. तल्ला और मल्ला पटास के लोग भाजपा विधायक महेश नेगी से उनकी फेसबुक प्रोफाइल की पोस्टों पर टिप्पणी कर रोड के लिए विनती कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि रोड के बिना गांव में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. दु:ख तकलीफ के वक्त नौ-दस किलोमीटर तक मरीज को डोली में ले जाना पड़ता है. अगर गांव तक रोड होगी, तो इससे गांव का विकास होगा और आवाजाही में भी आसानी होगी. समाजसेवी और उत्तराखंड के मुद्दों पर सजग रहने वाले विजय फुलारा का कहना है कि गांव में रोड की बेहद जरूरत है. इसके लिए कई प्रयास भी किए गए. दो साल पहले पीडब्ल्यूडी ने सर्वे भी किया. पहले सर्वे को लेकर पल्ला पटास के कुछ लोगों को आपत्ति थी जिसके बाद दूसरा सर्वे हुआ. जिसमें रोड के रास्ते पर आने वाले कुछ पेड़...
जानें- मई का आखिरी सप्ताह आपका कैसा रहेगा?

जानें- मई का आखिरी सप्ताह आपका कैसा रहेगा?

साप्ताहिक राशिफल
अपनी जन्मतिथि से जानें साप्ताहिक राशिफल (24- 30 मई, 2021) अंक ज्योतिष का हमारे जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि सभी अंकों का हमारे जन्म की तारीख से संबंध होता है. नीचे दिए गए लेख में हमने बताया है, कि हर व्यक्ति because की जन्म तिथि के हिसाब से उसका एक मूलांक निर्धारित होता है और ये सभी अंक अलग-अलग ग्रहों द्वारा शासित होते हैं. यूसर्क मूलांक 1 पर सूर्य देव का आधिपत्य है. चंद्रमा का स्वामी मूलांक 2 है. अंक 3 को देव गुरु बृहस्पति का स्वामित्व प्राप्त है, राहु अंक 4 का राजा है. 5 अंक बुध ग्रह के अधीन है. 6 because अंक के राजा शुक्र देव हैं और 7 का अंक केतु ग्रह का है. शनिदेव को अंक 8 का स्वामी माना गया है. अंक 9 मंगल देव का अंक है और इन्हीं ग्रहों के परिवर्तन से जातक के जीवन में अनेक तरह के परिवर्तन होते हैं . यूसर्क मूलांक 1 (अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19, 28 तारीख को ...
राज्य की जैवविविधता, बुग्यालों, राष्ट्रीय पार्कों एवं नदियों का सरंक्षण जरूरी

राज्य की जैवविविधता, बुग्यालों, राष्ट्रीय पार्कों एवं नदियों का सरंक्षण जरूरी

देहरादून
अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, 2021 पर यूसर्क द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजनहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनअंतराष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) (Uttarakhand Science Education & Research Centre) द्वारा because एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की समन्वयक यूसर्क की वैज्ञानिक डा. मंजू सुन्दरियाल के द्वारा जैव विविधता दिवस को मनाने के महत्व पर प्रकाश डाला एवं समस्त प्रतिभागियों कास्वागत किया गया.यूसर्क यूसर्क की निदेशक प्रो (डा.) अनीता रावत ने अपने संबोधन द्वारा जैवविविधता के सरंक्षण हेतु शिक्षा, शोध एवं तकनिकी के उपयोग को आवश्यक बताया एवं विद्यार्थियों का योगदान एक सतत because विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकता है. उन्होंने कहा की यूसर्क संस्था पूरे प्रदेश में पर्यावरण सरंक्षण के साथ विज्ञान शिक्ष...
हिमालय पर्यावरण एवं तपोवन संस्कृति के संरक्षक थे सुन्दरलाल बहुगुणा

हिमालय पर्यावरण एवं तपोवन संस्कृति के संरक्षक थे सुन्दरलाल बहुगुणा

स्मृति-शेष
डॉ. मोहन चंद तिवारीचिपको आंदोलन के प्रणेता और हिमालय पर्यावरण के पुरोधा पद्मविभूषण श्री सुन्दर लाल बहुगुणा आज हमारे बीच नहीं रहे. 94 वर्षीय विश्व विख्यात पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा का शुक्रवार 21 मई, 2021 को कोरोना संक्रमण के कारण निधन हो गया.उन्हें 8 मई को कोरोना संक्रमित होने के because बाद एम्स में भर्ती कराया गया था,जहां शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली.  राजकीय सम्मान के साथ ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट पर श्रीसुन्दरलाल बहुगुणा जी का अंतिम संस्कार किया गया.उनके बेटे राजीव नयन बहुगुणा ने नम आंखों से पिता को मुखाग्नि दी.सिद्धांतों पर चलते हिमालय पर्यावरण और वन संरक्षण के प्रति अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित करने वाले इस महामनीषी के निधन की खबर सुनते ही समूचे देश में शोक की लहर उमड़ पड़ी. चिपको because आंदोलन का नेतृत्व करने वाले वृक्षमित्र सुंदरलाल बहुगुणा जल,जंगल, जमीन और वायु को म...
धरती के सच्चे पुत्र सुंदरलाल बहुगुणा पंचतत्व में हुए विलीन

धरती के सच्चे पुत्र सुंदरलाल बहुगुणा पंचतत्व में हुए विलीन

स्मृति-शेष
प्रकाश उप्रेती  उत्तराखंड के इतिहास और भूगोल की समझ के साथ जो चेतना विकसित हुई उसमें महत्वपूर्ण भूमिका सुंदरलाल बहुगुणा जी की रही. पहाड़ की चेतना में सुंदरलाल बहुगुणा पर्यावरणविद् से पहले एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी विद्यमान थे. टिहरी में जहाँ उनका जन्म हुआ उस रियासत से लड़ते हुए उन्होंने जनता को संगठित कर उसके because हक़-हकूक के लिए लड़ना और बोलना सिखाया. जिस राजशाही और रियासत के खिलाफ कोई बोल नहीं सकता था उसके दमन और अत्याचार को उजागर करने वाले शख्सियत सुंदरलाल बहुगुणा थे. उन्होंने टिहरी रियासत के शोषण से लेकर अंग्रजों के जोर- जुल्म के खिलाफ भी पहाड़ की आवाज को मुखर किया. सूर्य देव सत्तर के दशक में जब पहाड़ के जंगलों को नीलाम कर बड़ी- बड़ी कंपनियों को दिया जा रहा था तो उन जंगलों की पुकार वह शख्स था जो आज हमारे बीच नहीं रहा. मिट्टी, बयार, because जंगल, जल और जीवन के लिए लड़ते हुए, उस...
सुन्दरलाल बहुगुणा: एक युग का अवसान

सुन्दरलाल बहुगुणा: एक युग का अवसान

स्मृति-शेष
चारु तिवारी उनका नाम हम बचपन से ही सुनते रहे थे. मैं समझता हूं कि हमारी पीढ़ी ने उन्हें एक आइकन के रूप में देखा. कई संदर्भो में. कई पड़ावों में. उन्हें भले ही एक पर्यावरणविद के रूप में लोगों ने पहचाना हो, लेकिन उनका सामाजिक, राजनीतिक चेतना में भी बड़ा योगदान रहा है. पर्यावरण को बचाने की अलख या हिमालय के because हिफाजत के सवाल तो ज्यादा मुखर सत्तर-अस्सी के दशक में हुये. ये सवाल हालांकि अंग्रेजों के दमनकारी जंगलात कानूनों और लगान को लेकर आजादी के दौर में भी उठते रहे है, लेकिन उन्हें बहुत संगठित और व्यावहारिक रूप से जनता को समझाने और अपने हकों को पाने के लिये उसमें शामिल होने का रास्ता उन्होंने दिखाया. मूलांक आजादी के आंदोलन में पहाड़ से बाहर उनकी भूमिका लाहौर-दिल्ली तक रही. टिहरी रियासत की दमनकारी नीति के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई. एक दौर में उत्तराखंड की कोई हलचल ऐसी नहीं थी, जिसमें उनकी केन्...
नौकरी छोड़ होमस्टे चला रहा इंजीनियर

नौकरी छोड़ होमस्टे चला रहा इंजीनियर

अभिनव पहल
प्रियंका, शोधार्थीअभिषेक सिंह पेशे से इंजीनियर है. पौड़ी-देहरादून रूट पर होमस्टे चलाते हैं. उनका कहना है कि मेरा उद्देश्य एग्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देना है. जिसके जरिए मैं आस-पास के ग्रामीणों के लिए भी रोजगार सृजन कर सकूं. अभी मेरे पास चार स्थाई कर्मचारी हैं. because गर्मियों के सीजन में जैसे ही होमस्टे का कारोबार बढ़ता है, मैं आस-पास के गांवों के लोगों को भी इससे जोड़ लेता हूं, ताकि उनकी भी कमाई हो सकें. होमस्टे में आने वाले ज्यादातर टूरिस्ट कैंपिंग का मजा लेना चाहते हैं. उनके लिए पहाड़ पर बना होमस्टे किसी आश्चर्य से कम नहीं होता है. पढ़ें— प्रकृति और जैविक उत्पादों से दिखाई स्वरोजगार की राह… मैं 2016 से ही स्वरोजगार कर रहा हूं. सबसे पहले डेयरी खोली. लेकिन लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला, क्योंकि पैकेट बंद दूध खरीदने की आदत के चलते लोग इसे गोशाला कहते थे. because धीरे-धीरे मैंने इसका वि...
तीरथ सिंह रावत के नए मीडिया सलाहकार मानसेरा संघी या वामपंथी? दो धड़ों में बंटा ट्विटर

तीरथ सिंह रावत के नए मीडिया सलाहकार मानसेरा संघी या वामपंथी? दो धड़ों में बंटा ट्विटर

देश—विदेश
हिमांतर ब्यूरो, दिल्लीउत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के नए मीडिया सलाहकार दिनेश मानसेरा को लेकर सोशल मीडिया बहस गर्मा गई है. कई दक्षिणपंथी दिनेश मानसेरा को वामपंथी विचारधारा का because बताकर भाजपा सरकार में उनकी मीडिया सलाहकार के तौर पर नियुक्ति को लेकर संघ और पार्टी का घेराव कर रहे हैं. ट्विटर पर मानसेरा को निशाने में लेते हुए यूजर्स कह रहे हैं 'वाह..वाह.. जो बीजेपी को गाली दे. जो मोदी जी को गाली दे, उनको मीडिया सलाहकार बना दो!!!'मूलांक कई यूजर्स यहां तक पूछ रहे हैं कि इस because नियुक्ति के पीछे आखिर किसका हाथ है, जो सूबे में भारतीय जनता पार्टी की कब्र खोदने में जुटा है.दिनेश मानसेरा के कई ऐसे ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिनमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्थानीय भाजपा नेताओं को निशाने पर रखकर चुटकी ले रहे हैं. because यहां तक की उनके बेटे के ट्...
वेदान्त-प्रवक्ता आचार्य शंकर का अवदान  

वेदान्त-प्रवक्ता आचार्य शंकर का अवदान  

साहित्‍य-संस्कृति
शंकराचार्य जयन्ती के पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र‘वेदान्त’ यानी वेदों का सार भारतीय चिंतन की एक वैश्विक देन है और उसके अद्वितीय पुरस्कर्ता आचार्य शंकर हैं जो  ब्रह्म  को’ एकमेवाद्वितीयम्’  मानते है. अर्थात ब्रह्म एक ही है. ब्रह्म से अलग कोई भी चीज  वास्तविक नहीं है. और ब्रह्म के भाग या हिस्से नहीं हो सकते. अक्सर इस संसार  के दो कारण माने जाते हैं जड़ because और चेतन परन्तु  वेदान्त एक ही तत्व मानता है  जैसे मकड़ी अपना जाला बुनने के लिए किसी अन्य बाहरी  वस्तु पर निर्भर नहीं करती  वरन अपने ही पेट से तंतु निकाल निकाल कर जाला तैयार करती है. अपने दृष्टिकोण को दृढ़ता से रख आचार्य शंकर ने बौद्ध और मीमांसक मतों के सम्मुख बड़ी चुनौती रखी. उन्होंने वेद  को भी महत्त्व दिया और युक्ति का भी उपयोग किया.मूलांक प्रचलित अनुश्रुतियों, मिथकों और कथाओं के नायक आचार्य शंकर की जीवन गाथा वैचारिक नवोन...