
जगमोहन बंगाणी: टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं के बीच जीवन का संघर्ष
एक चित्रकार के संघर्ष की कहानीशशि मोहन रवांल्टासीमांत जनपद उत्तरकाशी के अंतिम छोर पर बसे मौंडा गांव में जन्में और गांव की ही पाठशाला में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद महानगरों का रूख किया. प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही मेरा झुकाव कला की ओर हो गया था. दैनिक जीवन की जरूरी वस्तुओं के लिए गांव से कई मील पैदल चलने के बाद हम स्थानीय बाजार में खरीददारी करने जाते थे. मैं जब अपनी किताबें लेने के लिए जाता तो अपनी कक्षा की किताबों के साथ—साथ कला की एक कॉपी के बजाए दो कॉपियां खरीद लाता था.
because घर पहुंचने पर जब मां—बाप स्कूल से मिली किताबों की सूची से मिलान करते तो उन्हें कला की एक कॉपी बजाय दो कॉपियां मिलती थीं. इसके लिए माताजी से हमेशा सुनना पड़ता था कि because बिना सोचे—समझे दो कॉपियां उठा लाते हो. जबकि सारे बच्चे तो एक ही लाते हैं. चूंकि मैं बचपन से कुछ न कुछ चित्रका...









