Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
गांधी जी का राष्ट्रवाद जो आज भी सपना बनकर रह गया

गांधी जी का राष्ट्रवाद जो आज भी सपना बनकर रह गया

साहित्‍य-संस्कृति
गांधी जी का राष्ट्रवाद-2डॉ. मोहन चंद तिवारी (दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में so 'इंडिया ऑफ माय ड्रीम्स' पर आयोजित ग्यारह दिन (9जुलाई -19 जुलाई, 2018 ) के समर स्कूल के अंतर्गत गांधी जी के राष्ट्रवाद और समाजवाद पर दिए गए मेरे व्याख्यान का द्वितीय भाग, जिसमें वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी जी के 'राष्ट्रवाद' की अवधारणा पर विचार किया गया है.)शिव     टीवी चैनलों में 'राष्ट्रवाद' पर आजकल जिस तरह बेमतलब की गैर जिम्मेदार बहस से लोगों को भरमाया जाता है, so उससे जाहिर है कि आजादी मिलने के 73 साल के बाद आज भी हमारा देश 'राष्ट्रवाद' के बारे में कितना अनभिज्ञ बना हुआ है.शिव हमारे देश का दुर्भाग्य रहा है कि ब्रिटिश काल की साम्राज्यवादी इतिहास चेतना के अनुरूप आज भी स्कूलों और विश्व विद्यालयों की पाठ्यपुस्तकों में छात्रों को 'नेशनलिज्म' के जो पाठ so पढ़ाए जाते हैं उनमें यही बताया जात...
उत्‍तराखं में पर्यटन एवं होटल व्‍यवसाय के लिए 200 करोड़ का राहत पैकेज!

उत्‍तराखं में पर्यटन एवं होटल व्‍यवसाय के लिए 200 करोड़ का राहत पैकेज!

उत्तरकाशी
सांस्कृतिक दलों को 2000 रूपये प्रतिमाह 05 माह तक की प्रोत्साहन धनराशि दी जायेगीनीरज उत्‍तराखंडी, उत्तरकाशीमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी के आपदाग्रस्त क्षेत्रों के भ्रमण के पश्चात् मीडिया से वार्ता करते हुए कहा कि राज्य सरकार आपदा पीड़ितों के साथ हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक परेशान न होना पड़े. यह सुनिश्चित करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिये गये हैं. जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि जन समस्याओं का समाधान जिलों में ही करना सुनिश्चित किया जाय. उन्होंने कहा कि जिलों की समस्यायें यदि शासन स्तर पर प्राप्त होगी तो इसके लिए सम्बंधित अधिकारी उतरदायी माना जायेगा. उन्होंने कहा कि आपदा के समय त्वरित समाधान करन...
हिमालय को जानने-समझने की कोशिश

हिमालय को जानने-समझने की कोशिश

पुस्तक-समीक्षा
डॉ. अरुण कुकसाल ‘हिमालय बहुत नया पहाड़ होते हुए भी मनुष्यों और उनके देवताओं के मुक़ाबले बहुत बूढ़ा है. यह मनुष्यों की भूमि पहले है, देवभूमि बाद में, क्योंकि मनुष्यों ने ही अपने विश्वासों तथा देवी-देवताओं को यहां की प्रकृति में स्थापित किया. हिमालय के सम्मोहक आकर्षण के कारण अक्सर यह बात अनदेखी रहती आयी है. यह आशा करनी so ही होगी कि हिमालय की सन्तानों और समस्त मनुष्यों को समय पर समझ आयेगी, पर यह याद रहे कि यह समझ न अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में उपलब्ध है और न कोई बैंक या बहुराष्ट्रीय कम्पनी इसे विकसित कर सकती है. यह समझ यहां के समाजों और समुदायों में है, वहीं से उसे लेना होगा. बस, हमें और हमारे नियन्ताओं को इस समझ को समझने की समझ आये.’शिव शेखर पाठक की ‘दास्तान-ए-हिमालय’ किताब में लिखी उक्त पक्तियां आम जन से लेकर अध्येताओं के हिमालय के प्रति विचार और व्यवहार को सचेत करती है. हिमालय पृथ्वी का मा...
भगवान शिव को क्यों प्रिय है सावन का महीना?

भगवान शिव को क्यों प्रिय है सावन का महीना?

लोक पर्व-त्योहार
डॉ. मोहन चंद तिवारी 16 जुलाई को हरेला पर्व के साथ ही उत्तराखंड so में श्रावण का पवित्र महीना भी शुरु हो गया है.इस सावन के महीने में शिवाराधना बहुत ही पुण्यदायी और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली होती है.भगवान को सावन का महीना बहुत प्रिय है क्योंकि वे इसी महीने अपनी शक्ति के साथ सायुज्य प्राप्त करते हुए समस्त सृष्टि का सर्जन करते हैं.'शिव'- सर्वहारा वर्ग के संरक्षक देव शिव भारतीय परम्परा में शिव परब्रह्म,परमात्मा, रुद्र, महादेव आदि विभिन्न नामों से जाने जाते हैं. 'शिव’ शब्द की एक व्याख्या के अनुसार अनन्त तापों से संतप्त होकर प्राणी जहां विश्राम हेतु शयन करते हैं अथवा प्रलय की अवस्था में जगत् जिसमें शयन करता है उसे 'शिव’ कहते हैं -'शेरते प्राणिनो यत्र स शिवः’ अथवा 'शेते जगदस्मिन्निति शिवः.’ so भगवान् राम तथा कृष्ण का आविर्भाव क्रमशः त्रेता तथा द्वापर युग में होता है किन्तु शिव सृष्टि के...
क्या कहते हैं आपके सितारे, किसको मिलेगा भाग्य का साथ!

क्या कहते हैं आपके सितारे, किसको मिलेगा भाग्य का साथ!

साप्ताहिक राशिफल
साप्ताहिक राशिफल (19 से 25 जुलाई) मेष : मेष राशि के जातक इस सप्ताह अपने कामकाज की शुरुआत जोश-खरोश के साथ करेंगे लेकिन सप्ताह के मध्य तक पहुंचते-पहुंचते इन पर काम के बोझ और टारगेट को पूरा करने का तनाव झलकने लगेगा। ऐसे में आप जितने शांत मन से कार्य करेंगे, उतनी ही जल्दी आप अपनी because चुनौतियों से पार पा सकेंगे। सप्ताह के मध्य में नये स्थान एवं नये लोगों से संपर्क का योग बनेगा। हालांकि इस दौरान आपके खर्चे आसमान छूते हुए नजर आयेंगे। पैसे सोच-समझकर ही खर्च करें, अन्यथा उधार मांगने की भी नौबत आ सकती है। प्रेम संबंधों में लव पार्टनर के साथ नजदीकी बढ़ेगी और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। ज्योतिष उपाय: पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करें। ‘ॐ हं हनुमते नमः’ मंत्र का जप करें। वृष : सप्ताह की शुरुआत में आप नई उर्जा के साथ अपने कार्यों की शुरुआत करेंगे। घर एवं परिवार दोनों जगह आपको लोगों से सहयोग मि...
पहाड़ की खूबसूरती को बबार्द करते ये कूड़े के ढेर!  

पहाड़ की खूबसूरती को बबार्द करते ये कूड़े के ढेर!  

पर्यावरण
पहाड़ में कूड़ा निस्तारण एक गंभीर समस्‍या!भावना मासीवाल पहाड़ की समस्याओं पर जब भी चर्चा होती है तो उसमें रोजगार और पलायन मुख्य मुद्दा बनकर आता है. यह मुद्दा तो पहाड़ की केंद्रीय समस्याओं की धूरी तो है ही. इसके साथ ही अन्य समस्याएं भी so पहाड़ के जीवन को प्रभावित कर रही है. इनमें एक समस्या है कूड़े का निस्तारण. आप भी सोचेंगे भला रोजगार और पलायन जैसे प्रमुख मुद्दों को छोड़कर कहा एक कूड़े के निस्तारण के मुद्दे पर चर्चा हो रही है. यह विषय देखने में जितना छोटा व गैर जरूरी लगता है. दरअसल उतना है नहीं. कूड़ा निस्तारण की समस्या पूरे विश्व की समस्या है.पलायनहमारा देश भारत स्वयं भी प्रति दिन उत्सर्जित लाखों टन कूड़े के निस्तारण की समस्या से जूझ रहा है. हमारे देश में 1.50 लाख मेट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है. इसमें से भी कुछ so प्रतिशत कूड़े का ही निस्तारण हो पाता है. शेष कूड़ा महानगरों में शहर ...
हिन्दू धर्म विश्व का सर्वोत्कृष्ट राष्ट्रवादी धर्म है

हिन्दू धर्म विश्व का सर्वोत्कृष्ट राष्ट्रवादी धर्म है

साहित्‍य-संस्कृति
गांधी जी का राष्ट्रवाद-1डॉ. मोहन चंद तिवारी(दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में 'इंडिया ऑफ माय ड्रीम्स' पर आयोजित ग्यारह दिन (9जुलाई -19 जुलाई, 2018 ) के समर स्कूल के अंतर्गत गांधी जी के राष्ट्रवाद because और समाजवाद पर दिए गए मेरे व्याख्यान का सारपूर्ण लेख,जो आज भी प्रासंगिक है) गांधी जी के अनुसार दुनिया के जितने भी धर्म हैं उनमें हिन्दूधर्म ही एकमात्र ऐसा राष्ट्रवादी धर्म है,जिसमें कट्टरता का अभाव है और जो सब से अधिक सहिष्णु है. because गांधी जी के अनुसार "हिन्दूधर्म न केवल मनुष्यमात्र की बल्कि प्राणिमात्र की एकता में विश्वास रखता है." - (यंग इंडिया,20-10-1927)ज्योतिष गौरतलब है कि 13 जुलाई, 1947 में because 'हरिजन सेवक' पत्रिका में समाजवादी कौन है? इस विषय पर लिखते हुए गांधी जी ने कहा था- “सारी दुनिया के समाज पर नज़र डालें तो हम देखेंगे कि हर जगह द्वैत ही द्वैत है. ए...
अरे! ये तो कॉन्ट्रास्ट का ज़माना है…

अरे! ये तो कॉन्ट्रास्ट का ज़माना है…

किस्से-कहानियां
कहानी- कॉन्ट्रास्टपार्वती जोशी पूनम ने अपनी साड़ियों की अल्मारी खोली और थोड़ी देर तक सोचती रही कि कौन-सी साड़ी निकालूँ. आज उसकी भाँजी रितु की शादी है. सोचा ससुराल पक्ष के सब लोग वहाँ उपस्थित होंगे. so उसे भी खूब सज धज कर वहाँ जाना होगा. उनमें से कोई भी साड़ी उसे पसंद नहीं आई. फिर भारी साड़ियों का बॉक्स खोला, हाल ही में उसने उन साड़ियों की तह खोलकर, उलट-पलट कर उन्हें बाहर हवा में रखा था.ग़रीब भाईवे उसके पास आकर बोले “बैनी! तेरा ये ग़रीब भाई तुझे क्या दे सकता है, ये तेरे सुहाग की चूड़ियाँ हैं, अल्ला ताला से दुआ माँगता हूँ कि तेरा सुहाग सदा बना रहे.” डबडबाई because आँखों से पूनम ने उनका हाथ पकड़ा. रुँधे गले से वह केवल इतना ही कह पाई,” नज़र भइया! ये मेरी शादी का सबसे खूबसूरत और क़ीमती तोहफ़ा है, इसे मैं हमेशा सँभाल कर अपने पास रखूँगी.”साड़ियों साल में एक बार वह उन साड़ियों को...
हरेला : कोरोना काल में एक दूसरे की मदद को प्रेरित करता त्योहार

हरेला : कोरोना काल में एक दूसरे की मदद को प्रेरित करता त्योहार

लोक पर्व-त्योहार
सुख समृद्धि की कामना का पर्व हरेलाऋतु खंडूरी विधायक, यमकेश्वर हरेला. यानी हर्याव. सुख समृद्धि की कामना का पर्व. दूसरों को आशीवर्चन देने का पर्व. खिलखिलाने का पर्व. दूसरों को खुश देखकर खुद खुश होने का पर्व. ऐसे ही तो कई संदेश छिपे हैं because उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला में. इसे स्थानीय बोली में हर्याव भी कहते हैं. मूलत: कुमाऊं क्षेत्र में मनाये जाने वाला यह पर्व आज विश्वव्यापी है. यूं तो साल में तीन बार हरेला पर्व मनाया जाता है, लेकिन सावन मास की शुरुआत में मनाये जाने वाले इस पर्व का विशेष महत्व है. नेता जी सावन यानी हरियाली की शुरुआत. हरियाली यानी सुख-समृद्धि. इस शुरुआत पर हरेला का त्योहार मनाकर हम जहां अपने because परिवेश में खुशहाली की कामना करते हैं, वहीं दूर देश में जा बसे अपने अपनों की भी समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं. बहनें चहकती हैं कि भाई को आशीर्वचन स्वरूप हरेला लगाए...
बेटा! हरेला बोना कभी नहीं छोड़ना!

बेटा! हरेला बोना कभी नहीं छोड़ना!

लोक पर्व-त्योहार
आज हरेला है, ईजा की बहुत याद आती है…डॉ. मोहन चंद तिवारी आज श्रावण संक्रांति के दिन हरेले का  त्योहार है. सुबह से ही ईजा (मां) की और कॉलेज की बहुत याद आ रही है.आज मुझे हरेला लगाने के लिए न तो मेरी मां जीवित है because और न ही कॉलेज जाने की कोई जल्दी!कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए लगभग आठ साल हो गए हैं.ईजा के बिना हरेले का त्योहार कुछ सूना सूना सा लग रहा है.त्योहार की खुशी बहुत है किंतु आत्मतुष्टि बिल्कुल भी नहीं.पर मुझे संतोष है कि मातृत्वभाव का आशीर्वाद दिलाने वाला यह हरेला का त्यौहार आज भी मेरे और मेरे परिवारजनों के पास धरोहर के रूप में संरक्षित है.नेता जी मुझे याद है कि गर्मियों की छुट्टी के बाद हर साल 16 जुलाई को दिल्ली विश्वविद्यालय में कालेज खुलते थे तो संयोग से उसी दिन हरेले का त्यौहार भी होता था.मेरी मां मुझे because रात से ही सचेत करते हुए कहती- "च्यला यौ त्यौर कौलीज लै कौस छू ...