Tag: बड़कोट

स्‍थानीय विधायकों के साथ राज्य मंत्री यतीश्वरानंद ने कोविड-19 से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यस्थाओं का लिया जायजा   

स्‍थानीय विधायकों के साथ राज्य मंत्री यतीश्वरानंद ने कोविड-19 से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यस्थाओं का लिया जायजा   

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी, पुरोलाकोविड-19 व्यवस्थाओं के जनपद प्रभारी एवं गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, भाषा तथा पुनर्गठन राज्य मंत्री यतीश्वरानंद ने आज दूसरे दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ब्रह्मखाल, बड़कोट, नौगाँव व पुरोला में  कोविड-19 से निपटने के लिए की गई व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण कर जायजा लिया.  निरीक्षण के दौरान because पूर्व जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मण भंडारी ने विधायक  केदार सिंह रावत के माध्यम से अतरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य  केंद्र ब्रह्मखाल के उच्चीकरण को लेकर  पत्र सौंपा. जिस पर मंत्री द्वारा सीएमओ को तत्काल प्रस्ताव शासन में भेजने के निर्देश दिए.कोविड उन्होंने सीएमओ को निर्देशित because करते हुए कहा कि जनपद उत्तरकाशी के जिला अस्पताल के अतिरिक्त सभी सीएचसी में 50-50 ऑक्सीजन बैड व पीएचसी में 10-10 ऑक्सीजन बैड तैयार कर लिए जाय.  ताकि सुदूरवर्ती गांव स्तर के लोगों को जिला अस्पताल न...
जय हो ग्रुप की अनूठी पहल

जय हो ग्रुप की अनूठी पहल

समसामयिक
बेसहारा और बेजुबान जानवरों का सहारा बना जय हो ग्रुप, 111 दिनों तक खिलाई रोटियांहिमांतर ब्‍यूरो, उत्‍तरकाशीनगर पालिका परिषद, बड़कोट क्षेत्र में लॉक डाउन प्रथम से लेकर 111 दिनों तक सामाजिक चेतना की बुलन्द आवाज ‘‘जय हो” ग्रुप के कर्तव्यनिष्ठ स्वयंसेवियों ने बेजुबान जानवरों को रोटी दान मांगकर खिलाने का काम किया. ग्रुप ने नगर के सभी रोटी दानदाताओं का आभार जताते हुए मौहल्लों में स्वंय आवारा बेजुबान जानवरों को रोटी या घर में बचा हुआ भोजन देने का आह्वान किया है.वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) के चलते देश में हुए लॉक डाउन के दौरान बाजार सहित आम लोग अपने घरों में कैद हो गयें थे. सड़को और गलियों में घुमने वाले इन बेजुबान जानवरों की कोई सुध लेने वाला नहीं था, ऐसे में जय हो ग्रुप के युवा बेसहारा जानवरों के सहारा बन एक नई मिसाल पेश कीवैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) के ...
पाप और पुण्य

पाप और पुण्य

संस्मरण
रवांई के एक कृषक की ईमानदारी का फलध्यान सिंह रावत ‘ध्यानी’मुझे आरम्भ से ही बुजुर्गों के पास उठना-बैठना बहुत भाता रहा है. अपने दादा जी के पास बैठकर मैं अनेकों किस्से-कहानियाँ बड़े ही चाव से सुना करता था. एक दिन घर पर हमारे निकट के करीबी रिश्‍तेदार का आना हुआ जो तब करीब बयासी (82) वर्ष के थे अब इस दुनिया में नहीं हैं. स्व. सब्बल सिंह रावत. रात्रि को भोजन के उपरांत जब मैंने उनके लिए बिस्तर लगाया तो सोने से पूर्व उन्होंने तेल मांगा और अपनी कमीज उतार कर दाहिने हाथ की बाजू में मालिश करने लगे. मेरी नज़र उनके उस हाथ पर पड़ी तो मुझे लगा सम्भवतः इन्हें कभी इस हाथ में बहुत गहरी चोट लगी होगी. मुझ से रहा नहीं गया और मैं ने पूछ ही लिया-‘‘नाना जी आपके इस हाथ में क्या कभी कोई चोट लगी थी?’’ मेरी जिज्ञासा और उत्सुकता को भांपते हुए उन्होंने मुझे अपने पास बैठने को कहा. उसी रजाई का एक छोर निकाल कर मैं ...