September 19, 2020
समसामयिक

जय हो ग्रुप की अनूठी पहल

बेसहारा और बेजुबान जानवरों का सहारा बना जय हो ग्रुप, 111 दिनों तक खिलाई रोटियां

  • हिमांतर ब्‍यूरो, उत्‍तरकाशी

नगर पालिका परिषद, बड़कोट क्षेत्र में लॉक डाउन प्रथम से लेकर 111 दिनों तक सामाजिक चेतना की बुलन्द आवाज ‘‘जय हो” ग्रुप के कर्तव्यनिष्ठ स्वयंसेवियों ने बेजुबान जानवरों को रोटी दान मांगकर खिलाने का काम किया. ग्रुप ने नगर के सभी रोटी दानदाताओं का आभार जताते हुए मौहल्लों में स्वंय आवारा बेजुबान जानवरों को रोटी या घर में बचा हुआ भोजन देने का आह्वान किया है.

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) के चलते देश में हुए लॉक डाउन के दौरान बाजार सहित आम लोग अपने घरों में कैद हो गयें थे. सड़को और गलियों में घुमने वाले इन बेजुबान जानवरों की कोई सुध लेने वाला नहीं था, ऐसे में जय हो ग्रुप के युवा बेसहारा जानवरों के सहारा बन एक नई मिसाल पेश की

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) के चलते देश में हुए लॉक डाउन के दौरान बाजार सहित आम लोग अपने घरों में कैद हो गयें थे. सड़को और गलियों में घुमने वाले इन बेजुबान जानवरों की कोई सुध लेने वाला नहीं था, ऐसे में जय हो ग्रुप के युवा बेसहारा जानवरों के सहारा बन एक नई मिसाल पेश की. जानवरों के लिए घर—घर से रोटी दान मांगकर खिलाना और उनकी देखभाल करना ग्रुप की दिनचर्या में शामिल था.

नगर के आवारा बेजुवान जानवर भूखें होने के चलते जय हो ग्रुप ने घर—घर जाकर रोटी दान मांगना शुरू कर दिया था और 27 मार्च से 15 जुलाई तक, 111 दिनों तक नगर के 35 से अधिक कुत्तों और 25 से अधिक गाय, बैल व खच्चर को दर्जनों घरों से मिलने वाली रोटी या बचा हुआ भोजन मांगकर खिलाने का कार्य किया गया. जय हो ग्रुप का उद्देश्य ‘‘कोई भूखा न रहे” को लेकर नगर में आम लोगों के बीच जन जागरूकता फैलाना भी था.

नगर के वार्ड न 6, वार्ड न 5, वार्ड न 4 और वार्ड न 3 के नगरवासियों ने बढ़चढ़ कर महामारी के दौर में बेजुबान जानवरों के लिए रोटी या अन्य भोज्य पदार्थ दान करने का काम किया. जय ग्रुप के संयोजक सुनील थपलियाल और संरक्षक रणवीर सिंह रावत ने बताया कि जय हो ग्रुप ने नगर पालिका ही नहीं बल्कि पूरी यमुनाघाटी में अन्न दान मांगकर भूखे व जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुंचाने का कार्य किया.

ग्रुप ने लॉक डाउन में बीमार लोगों के लिए जीवन रक्षक दवाइयों को उनके घरों तक पहुचाया, जिनको इस लॉक डाउन के दौरान कहीं से दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही थी. जिन लोगों के घरों में भोजन बनाने की व्यवस्था नही थी, उनके घरों तक भोजन बनाकर टिफीन में भोजन पहुचानें का कार्य किया भी ग्रुप ने बखूबी किया. ग्रुप ने यमुना घाटी में महामारी से भयभीत मजदूरों को उनके गृह जनपद व प्रदेश भेजने के लिए प्रशासन की मद्द से अनुमति पत्र बनवाकर, वाहन मालिकों से कम से कम किरायें पर यूपी, बिहार, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल सहित उत्तराखण्ड के अन्य जनपदों में भेजने का भी कार्य किया. ग्रुप द्वारा बाजार में गाय और कुत्तों को दीवारों पर पोस्टर व जमीन पर पड़े गत्तों को खाते देख रोटी दान मांगने सहित चारा मंगवाने का निर्णय लिया गया और 27 मार्च से 15 जुलाई तक 111 दिनों तक ग्रुप के कर्तव्यनिष्ठ स्वयंसेवियों ने उम्दा तरीके से सभी बेजुबान जानवरों के लिए घर—घर घुमकर रोटी एकत्र कर खिलाने का कार्य किया.

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस लाॅक डाउन व अनलाक डाउन में कार्य करने वालों स्वंयेसवियों में सुशील पीटर, प्रदीप सिंह उर्फ मस्तराम, सुनील थपलियाल, मोहित अग्रवाल, महिताब धनाई, विनोद नौटियाल, आशीष पंवार, रणवीर सिंह रावत, उत्तम रावत, रविन्द्र रावत, अमर शाह, जय सिंह, अजय सिंह रावत, मदन पैन्यूली, भगवती रतुड़ी, आशीष काला, प्रवेश रावत, प्रदीप बिष्ट, जय प्रकाश बहुगुणा, शान्ति रतूड़ी, राम प्रसाद विजल्वाण, रोशन राणा, नितिन चौहान, मनमोहन सिंह चौहान, सुमन रावत, मनवीर रावत, नवीन जगुड़ी, गिरीश चौहान, अमित रावत, दीपक राणा, रजत अग्रवाल, अंकित असवाल, दिनेश रावत, प्रदीप जैन, मुकेश राणा, त्रिलोक राणा, संजय पंवार, अनिल रावत आदि दर्जनों स्वंयसेवी ने बढ़चढ़ कर कार्य किया.

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