जुलाई की शुरुआत में ही सेब के बागों पर तोतों का हमला, बागवानों की बढ़ी चिंता

parrots attack apple orchards

 

त्यूणी क्षेत्र में लो-हाईट और हाई-डेंसिटी सेब की फसल पर मंडरा रहा संकट, उद्यान विभाग से सहायता की मांग

  • नीरज उत्तराखंडी  त्यूणी, देहरादून

 जुलाई के पहले सप्ताह में ही त्यूणी तहसील क्षेत्र के सेब उत्पादक किसानों के सामने अपनी तैयार होती फसल को बचाना बड़ी चुनौती बन गई है। इस बार क्षेत्र में तोतों के बढ़ते आतंक ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। सुबह से शाम तक झुंड के झुंड तोते बगीचों में धावा बोल रहे हैं और सेबों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो इस सीजन में उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है।

त्यूणी तहसील क्षेत्र के अधिकांश किसान लो-हाईट और हाई-डेंसिटी किस्म के सेब का उत्पादन करते हैं। इन किस्मों की तुड़ाई सामान्यतः जुलाई के अंतिम सप्ताह से शुरू होती है, लेकिन इस बार फसल पूरी तरह तैयार होने से पहले ही तोतों ने बगीचों को अपना निशाना बना लिया है।

बागवानों के अनुसार सुबह लगभग पांच बजे से ही तोतों के झुंड बगीचों में पहुंच जाते हैं और शाम साढ़े सात बजे तक लगातार फलों को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। किसानों द्वारा चौकीदार और मजदूर लगाकर पक्षियों को भगाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन जैसे ही उन्हें एक ओर से भगाया जाता है, वे दूसरी ओर जाकर फलों को चोंच मारकर नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इससे पूरे दिन निगरानी के बावजूद फसल सुरक्षित नहीं रह पा रही है।

पहली बार इतने बड़े झुंड में दिख रहे तोते

बागवान मुकेश जोशी, भोपाल जोशी, मायाराम जोशी, प्रताप जोशी, लायक राम शर्मा, बृजेश कुमार,  प्रदीप जिनाटा  ने बताया कि उन्होंने पहले कभी क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में तोते नहीं देखे। उनका कहना है कि लगातार बढ़ रहे पक्षियों के हमलों से अच्छी गुणवत्ता वाले सेब भी बाजार योग्य नहीं रह जाते, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बागवानों ने बताया कि सेब की खेती में पहले ही मजदूरी, खाद, दवाइयों और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि पक्षियों से फसल का बड़ा हिस्सा खराब हो गया तो किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।

उद्यान विभाग ने नेट लगाने की दी सलाह

उद्यान विभाग के प्रभारी एडीओ बुद्धि सिंह राठौर ने बताया कि पक्षियों से फसल की सुरक्षा के लिए किसान बगीचों में नेट (जाली) का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां पक्षियों को दूर रखने के अन्य सुरक्षित उपाय भी अपनाए जा सकते हैं ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

किसानों की मांग

बागवानों ने उद्यान विभाग से मांग की है कि पक्षियों से फसल बचाने के लिए विशेष योजना के तहत नेट उपलब्ध कराए जाएं या उन पर अनुदान दिया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी सहायता नहीं मिली तो इस वर्ष सेब उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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