Tag: बागेश्वर

पहाड़ से राजभवन तक : पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी की सार्वजनिक सेवा की प्रेरक यात्रा

पहाड़ से राजभवन तक : पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी की सार्वजनिक सेवा की प्रेरक यात्रा

देहरादून, समसामयिक, साहित्‍य-संस्कृति
 डॉ देवी लाल असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय देवभूमि उत्तराखंड की मनोरम वादियां, जहाँ हवाएं परिवर्तन और आकांक्षाओं की सुधबुधाहाट लिए बहती है, वहां एक नाम देवभूमि की राजनीती में बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है - भगत सिंह कोश्यारी एक अनुभवी राजनीतिज्ञ, शिक्षक, पत्रकार, और संघ विचारक, कोशियारी जी का बागेश्वर जिले के एक छोटे से गांव से लेकर राजभवन तक का सफर सेवा के प्रति समर्पित जीवन का प्रतिक है। 17 जून 1942 में बागेश्वर जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे कोश्यारी जी के प्रारंभिक वर्ष पहाड़ी क्षेत्र की सादगी, ढृढ़ता, और समृद्ध सांस्कृतिक परिवेश से प्रभावित थे। उन्होंने अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नाकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और छात्र संघ के महासचिव भी रहे, जिससे राजनीतिक चेतना की नींव पड़ी। सक्रिय राजनीती में पूर्णकालिक रूप से पहले उन्होंने एक शिक्षक के रू...
बागेश्वर में रिवर्स माइग्रेशन की मिसाल: आधुनिक कृषि और कीवी खेती से पलायन पर लगाम, बढ़ी किसानों की आय

बागेश्वर में रिवर्स माइग्रेशन की मिसाल: आधुनिक कृषि और कीवी खेती से पलायन पर लगाम, बढ़ी किसानों की आय

बागेश्‍वर
  पहाड़ में लौटती उम्मीद: आधुनिक कृषि से बदल रहा बागेश्वर का भविष्यहिमांतर ब्यूरो, बागेश्वरउत्तराखंड के पहाड़ों में वर्षों से पलायन एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती रहा है। बेहतर शिक्षा, रोजगार और सुविधाओं की तलाश में गांवों से शहरों की ओर बढ़ता कदम अक्सर सूने घरों और वीरान खेतों की कहानी कहता था। लेकिन अब इसी पहाड़ में एक नई कहानी जन्म ले रही है- “रिवर्स माइग्रेशन” की कहानी, जहां लोग लौट रहे हैं… और सिर्फ लौट ही नहीं रहे, बल्कि अपने गांवों की तस्वीर बदल रहे हैं। बागेश्वर इस बदलाव की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। यहां आधुनिक कृषि, सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों ने उम्मीद की नई किरण जगाई है।बदलती सोच, बदलती ज़मीन जिलाधिकारी आकांक्षा कोंड़े के नेतृत्व में जनपद में कृषि को केवल आजीविका नहीं, बल्कि उद्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस प्रयास क...
बागेश्वर मॉडल: गुलाबी गोभी की खेती से बढ़ रही किसानों की आय, जानें कैसे करें शुरुआत

बागेश्वर मॉडल: गुलाबी गोभी की खेती से बढ़ रही किसानों की आय, जानें कैसे करें शुरुआत

बागेश्‍वर
 नीरज उत्तराखंडीउत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरागत खेती के साथ अब किसान नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जनपद बागेश्वर में कुछ किसानों द्वारा शुरू की गई गुलाबी गोभी (पिंक कॉलीफ्लावर pink cauliflower) की खेती अब अन्य क्षेत्रों के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। यह नई फसल न केवल बाजार में अलग पहचान बना रही है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम साबित हो रही है।बागेश्वर मॉडल से मिली नई राह बागेश्वर जिले के किसानों ने पारंपरिक सफेद गोभी के स्थान पर गुलाबी गोभी की खेती शुरू कर बेहतर दाम हासिल किए हैं। आकर्षक रंगत के कारण बाजार में इसकी मांग अधिक है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ होटल और बड़े शहरों में भी इसकी अच्छी खपत हो रही है, जिससे किसानों को सामान्य गोभी की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है।क्यों खास है गुलाबी गोभी गुलाबी गोभी पोषण के लि...
चुनाव आयोग की पहल पर उत्तराखण्ड के 70 बीएलओ का दिल्ली में प्रशिक्षण जारी

चुनाव आयोग की पहल पर उत्तराखण्ड के 70 बीएलओ का दिल्ली में प्रशिक्षण जारी

दिल्ली-एनसीआर
उत्तराखंड सहित चार राज्यों के चुनाव अधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण | तीन जिला निर्वाचन अधिकारियों, सहित 12 ईआरओ को भी दिया जा रहा प्रशिक्षण भारत निर्वाचन आयोग की पहल पर बूथ स्तर के चुनाव अधिकारियों के प्रशिक्षण के क्रम में उत्तराखंड के तीन जिला निर्वाचन अधिकारी, 12 ईआरओ और 70 बीएओ/बीएलओ सुपरवाइजर का दिल्ली स्थित भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एव निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ हो गया है. देश के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी 353 प्रतिभागियों को संबोधित किया. उत्तराखण्ड के साथ हिमाचल, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के फील्ड लेवल के चुनाव अधिकारियों का प्रशिक्षण चल रहा है. पिछले दो माह में आयोग द्वारा नई दिल्ली में 3,350 से अधिक बीएलओ स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है. उत्तराखंड से जिला न...
विश्व पर्यटन दिवस: चयनित ग्रामों के प्रधानों ने प्राप्त किया पुरस्कार

विश्व पर्यटन दिवस: चयनित ग्रामों के प्रधानों ने प्राप्त किया पुरस्कार

दिल्ली-एनसीआर
जखोल गांव को साहसिक पर्यटन, सूपी को कृषि पर्यटन और हर्षिल व गुंजी गांव को वाइब्रेंट विलेज के लिए मिला पुरस्कार नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विश्व पर्यटन दिवस समारोह के आयोजन में उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया. पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तराखण्ड के चयनित ग्रामों के प्रधानों द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम पुरस्कार प्राप्त किया गया. इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम प्रतियोगिता में उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले के जखोल गांव को साहसिक पर्यटन के लिए चुना गया, जो अपनी ऊंचाई, खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों और चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग रूट्स के लिए जाना जाता है. साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के बीच यह गांव तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. उत्तरकाशी जिले के ही हर्षिल गांव और पिथौरागढ़ जिले के गुंजी गांव को वाइब्रेंट विलेज के रूप में सम्मानित क...
खाई में गिरी कार, हादसे में चार लोगों की मौत!

खाई में गिरी कार, हादसे में चार लोगों की मौत!

उत्तराखंड हलचल
बागेश्वर : बागेश्वर में दर्दनाक हादसे की खबर है। जानकारी के अनुसार चिडंग के पास सुबह करीब पांच बजे एक कार खाई में जा गिरी। बताया जा रहा है कि हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। कार वड्यूड़ा सनेती (रीमा) से बागेश्वर आ रही थी। चिडंग के पास सुबह पांच बजे कार खाई में जा गिरी। हादसे का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। मृतकों में तीन युवक एक ही गांव के थे। पुलिस, फायर और राजस्व विभाग की टीम मौके पर है।...
उत्तराखंड की बेटी ने रचा इतिहास, महासागर की गहराइयों में फहराई श्रीराम पताका

उत्तराखंड की बेटी ने रचा इतिहास, महासागर की गहराइयों में फहराई श्रीराम पताका

उत्तराखंड हलचल
भगवान राम के अयोध्या में विराज हो गए हैं। इस मौके पर उत्तराखंड की बेटी ने श्रीराम की पताका के साथ हिंद महासागर की गहरियों स्कूबा डाइविंग कर इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड की कल्पना ने श्रीराम की पताका को हिंद महासागर की गहराइयों में फहराकर इतिहास रच दिया है।उत्तराखंड के बागेश्वर की रहने वाली कल्पना ने स्कूबा डाइविंग कर हिंद महासागर की गहराइयों में श्रीराम पताका फहराई। कल्पना ने बताया कि रामलला के दर्शन करने के लिए उनका मन भी उत्साहित है। कल्पना ने बताया कि दो महीने के बाद जब छुट्टियों पर घर आएंगी तो उनकी कोशिश रहेगी कि वो अपने माता-पिता के साथ रामनवमी पर प्रभु राम की नयनाभिराम छवि को साक्षात देखें। मिली जानकारी के मुकाबिक कल्पना सैन्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। कल्पना बागेश्वर जिले के द्वारसों गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने कहा कि विदेश में होने के बाद उनका मन प्रभु राम के लिए कुछ न क...
चाकू उठाया और कर दिया ऐसा खौफनाक कारनामा, सोचकर ही आपकी रूह कांप जाएगी!

चाकू उठाया और कर दिया ऐसा खौफनाक कारनामा, सोचकर ही आपकी रूह कांप जाएगी!

उत्तराखंड हलचल
बागेश्वर: हर दिन ऐसी कई खबरें सामने आती हैं, जो आपको चौंका देती हैं। ऐसी घटनाएं भी सामने आती हैं, जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते। ऐसा ही एक कारनामा बागेश्वर के 45 व्यक्ति ने कर दिया, जिसके बारे में सोचकर ही आपकी रूह कांप जाएगी। बागेश्वर के काफलीगैर तहसील क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपना प्राइवेट पार्ट काट दिया। व्यक्ति की गंभीर हालत देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां खून ज्यादा बहने के कारण उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, व्यक्ति काफलीगैर तहसील के भटखोला गांव का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 45 साल है। आस पड़ोस के लोगों ने बताया कि उस व्यक्ति ने खुद को पांच दिनों से कमरे में बंद कर रखा था। शनिवार को उसके कमरे से चिल्लाने की आवाज आई। चिल्लाने की आवाज सुनकर आस पड़ोस के लोग भाग के उसके कमरे में गए। लोगों ने कमरे का नजारा देखा तो उनके होश उड़ गए। क्योंकि उस व्यक्ति...
बागेश्वर : DM के खिलाफ जांच के निर्देश, ये है मामला

बागेश्वर : DM के खिलाफ जांच के निर्देश, ये है मामला

बागेश्‍वर
बागेश्वर : DM अनुराधा पाल के खिलाफ वामपंथी पार्टियों की ओर से की गई शिकायत का चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है। इस मामले मे उत्तराखंड निर्वाचन आयोग को मामले की गंभीरता से जांच करने के कुमाऊं आयुक्त को जांच के निर्देश दिए हैं। मामले में  और प्वाइंट टू प्वाइंट रिपोर्ट भेजने को कहा है। चुनाव आयोग की ओर से साफ किया गया है डीएम के खिलाफ जो भी शिकायत की गई है उससे जुड़े हर पहलू की जांच की जानी चाहिए।बागेश्वर की DM पर मनमानी करने। एक राजनीतिक पार्टी की एजेंट के तौर कर काम करने का आरोप लगा था। लेफ्ट पार्टियों ने केंद्रीय चुनाव आयोग से ऑनलाइन शिकायत की गई थी उसी शिकायत पर अब जांच के आदेश दिए गए हैं। शिकायती पत्र में लिखा था ...
उत्तराखंड का परंपरागत रेशा शिल्प

उत्तराखंड का परंपरागत रेशा शिल्प

साहित्‍य-संस्कृति
चन्द्रशेखर तिवारी प्राचीन समय में समस्त उत्तराखण्ड में परम्परागत तौर पर विभिन्न पादप प्रजातियों के because तनों से प्राप्त रेशे से मोटे कपड़े अथवा खेती-बाड़ी व पशुपालन में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों का निर्माण किया जाता था. पहाड़ में आज से आठ-दस दशक पूर्व भी स्थानीय संसाधनों से कपड़ा बुनने का कार्य होता था. ट्रेल (1928) के अनुसार उस काल में पहाड़ के कुछ काश्तकार लोग कुछ जगहों पर कपास की भी खेती किया करते थे.ज्योतिष कुमाऊं में कपास की बौनी किस्म से कपड़ा बुना जाता था. कपड़ा बुनने के इस काम को तब शिल्पकारों की उपजाति कोली किया करती थी. हाथ से बुने इस कपड़े को 'घर बुण’ के नाम से जाना जाता था. टिहरी रियासत में कपड़ा बुनने वाले बुनकरों को because पुम्मी कहा जाता था. भारत की जनगणना 1931, भाग-1, रिपोर्ट 1933 में इसका जिक्र आया है. उस समय यहां कुमाऊं के कुथलिया बोरा व दानपुर के बुनकर तथा गढ़वाल के ...