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लोक पर्व-त्योहार

‘द्वितीयं ब्रह्मचारिणी’ : देवी का सच्चिदानन्दमयी स्वरूप

नवरात्र चर्चा – 2   डॉ. मोहन चंद तिवारी कल नवरात्र के प्रथम दिन ‘शैलपुत्री’ देवी के पर्यावरण because वैज्ञानिक स्वरूप पर प्रकाश डाला गया जो प्रकृति परमेश्वरीका प्रधान वात्सल्यमयी रूप होने के कारण पहला रूप है. आज नवरात्र के दूसरे दिन देवी के ‘ब्रह्मचारिणी’ रूप की पूजा-अर्चनाकी जा रही है.
साहित्‍य-संस्कृति

गांधी जी ने ‘भारतराष्ट्र’ को सांस्कृतिक पहचान दी

गांधी जी का राष्ट्रवाद-3 डॉ. मोहन चंद तिवारी (दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में ‘इंडिया ऑफ माय ड्रीम्स’ पर आयोजित ग्यारह दिन (9जुलाई -19 जुलाई,2018 ) के समर स्कूल के अंतर्गत गांधी जी के राष्ट्रवाद और समाजवाद पर दिए गए मेरे व्याख्यान का तृतीय भाग, जिसमें वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी जी के ‘राष्ट्रवाद’ और उनकी […]
पर्यावरण

धरती हमारी माँ है हम उसके बेटे, इस रिश्ते की समझ ही पर्यावरण को सरंक्षित कर सकती है: प्रो. नेगी

डॉ. राकेश रयाल विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तराखंड मुक्तविश्वविद्यालय मुख्यालय हल्द्वानी में विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं भू विज्ञान स्कूल की ओर से ‘पारस्थितिकी और उसका पुनरुत्थान’ विषय पर एक ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई. संगोष्ठी से पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओ. पी. एस. नेगी, कुलसचिव प्रो. एच एस नयाल, अन्य प्रोफ़ेसरों व […]
पर्यावरण

विकास की होड़ में पर्यावरण का विनाश

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर विशेष प्रकाश उप्रेती भारत में विकास की होड़ ने पर्यावरण के संकट को जन्म दिया. विकास के मॉडल का परिणाम ही है कि आज हर स्तर पर पर्यावरणीय संकट मौजूद है. विकास के मॉडल को because लेकर आजाद भारत में दो तरह की सोच और नीतियाँ रहीं हैं. एक […]
पर्यावरण

वैदिक संस्कृति का अनुपालन ही पर्यावरण संरक्षण का सर्वोत्तम विकल्प है

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर विशेष भुवन चंद्र पंत पूरा विश्व आज पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है, इसमें दो राय नहीं कि इस समस्या के पीछे हमारी अतिभोगवादी मनोवृत्ति रही है. अति का इति निश्चित है. ’ईट, ड्रिंक एण्ड बी because मैरी’ का विचार पश्चिम की देन है, हमारी विचारधारा तो वैदिक […]
स्मृति-शेष

धरती के सच्चे पुत्र सुंदरलाल बहुगुणा पंचतत्व में हुए विलीन

प्रकाश उप्रेती   उत्तराखंड के इतिहास और भूगोल की समझ के साथ जो चेतना विकसित हुई उसमें महत्वपूर्ण भूमिका सुंदरलाल बहुगुणा जी की रही. पहाड़ की चेतना में सुंदरलाल बहुगुणा पर्यावरणविद् से पहले एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी विद्यमान थे. टिहरी में जहाँ उनका जन्म हुआ उस रियासत से लड़ते हुए उन्होंने जनता […]
ट्रैवलॉग

खतरे में है मिठास

मधुमक्खी में 170 प्रकार की रासायनिक गंध को पहचानने की क्षमता होती है. इसकी खासियत यह है कि यह 6 से 15 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ती हैं. जिस तरह से वन घट रहे because हैं उसका प्रभाव मधुमक्खियों पर भी पड़ा है. उनकी संख्या में निरंतर गिरावट आ रही है. मंजू काला […]
पर्यावरण

‘पृथु वैन्य’ जिनके नाम पर ‘पृथिवी’ का नामकरण और लोकतंत्र की स्थापना हुई

 ‘पृथ्वी दिवस’ पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी आज 22 अप्रैल का दिन अंतरराष्ट्रीय जगत में ‘पृथ्वी दिवस’ (Earth Day) के रूप में मनाया जाता है. पृथिवी के पर्यावरण को बचाने के लिए ‘पृथ्वी दिवस’ की स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन के द्वारा 1970 में की गई थी. ‘पृथ्वी दिवस’ की अवधारणा सभी पहाड़, नदियों, […]
देहरादून

उत्तराखंड: आखिर कौन जिम्मेदार है इस आग के लिए…

जंगल में उपजी आग अधिकांशतः मानवजनित होती है! सुनीता भट्ट पैन्यूली क्या पहाड़ों पर कभी अब न पकेगा काफल चिड़िया नहीं चखेंगी हिस्सर भूखी रह जायेगी क्या कोयलिया. जंगल जब सुलग रहे हों आओ हम सब जल बन जायें. सड़क जो गांव से शहर को चली आओ उसी सड़क पर चल वापस लौट आयें अपने […]
बागेश्‍वर

मिलिए, उत्तराखंड के उस शख्स से जिनका पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में लिया नाम

ललित फुलारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के बागेश्वर निवासी जगदीश कुन्याल के पर्यावरण संरक्षण और जल संकट से निजात दिलाने वाले because कार्यों की सराहना की. पीएम मोदी ने कहा कि उनका यह कार्य बहुत कुछ सीखाता है. उनका गांव और आसपास का क्षेत्र पानी की जरूरत […]