October 29, 2020
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स्मृति शेष

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के जननायक

विपिन त्रिपाठी की पुण्यतिथि (30 अगस्त) पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी “गांव से नेतृत्व पैदा होने तक मैं गांव में रहना पसंद करूंगा. सत्ता पगला देती है. समाजवादी बौराई सत्ता से दूर रहें.”                                 -विपिन त्रिपाठी 30 अगस्त को उत्तराखंड […]
साहित्यिक हलचल

इजा! नि थामि तेरी कईकई, सब जगां रई तेरी नराई

(शम्भूदत्त सती का व्यक्तित्व व कृतित्व-3) डॉ. मोहन चंद तिवारी कुमाऊं के यशस्वी साहित्यकार शम्भूदत्त सती की रचनाधर्मिता से पहाड़ के स्थानीय लोग प्रायः कम ही परिचित हैं किन्तु पिछले तीन दशकों से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक आंचलिक कुमाऊंनी साहित्यकार के रूप में सती जी ने अपनी एक खास पहचान बनाई है. शम्भूदत्त […]
साहित्यिक हलचल

‘ओ इजा’ उपन्यास में कल्पित इतिहास चेतना और पहाड़ की लोक संस्कृति

शम्भूदत्त सती का व्यक्तित्व व कृतित्व-2 डॉ. मोहन चन्द तिवारी पिछले लेख में शम्भूदत्त सती जी के ‘ओ इजा’ उपन्यास में नारी विमर्श से सम्बंधित चर्चा की गई थी. इस उपन्यास का एक दूसरा खास पहलू पहाड़ के लोगों की इतिहास चेतना और लोक संस्कृति से भी जुड़ा है,जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है. […]
उत्तराखंड

राज्य मिलने के बीस साल बाद भी उपेक्षित है जालली सुरेग्वेल क्षेत्र

डॉ. मोहन चन्द तिवारी अभी हाल ही में 22, जुलाई, 2020 को जालली क्षेत्र के सक्रिय कार्यकर्त्ता और समाजसेवी भैरब सती ने अमरनाथ, ग्राम प्रधान जालली; मनोज रावत, ग्राम प्रधान ईड़ा; सरपंच दीन दयाल काण्डपाल, मोहन काण्डपाल, नन्दन सिंह, गोपाल दत, पानदेव व महेश चन्द्र जोशी आदि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल की अगुवाई […]