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देश—विदेश

डीयू में सीयूईटी की सफलता से क्या टूटा 100% अंक मिथ?

संख्या के लिहाज़ से विगत वर्षों में केरल बोर्ड के विद्यार्थियों की संख्या इस बार दूसरे स्थान से सातवें स्थान पर खिसकी डॉ सीमा सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केरल बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन के छात्रों की संख्या, जो गत वर्ष दिल्ली
साहित्यिक-हलचल

डॉक्टर रेखा उप्रेती के यात्रा संस्मरण ‘क्षितिज पर ठिठकी सॉंझ’ का लोकार्पण

हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज के हिंदी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर रेखा उप्रेती के यात्रा संस्मरण ‘क्षितिज पर ठिठकी सॉंझ’ का रविवार को वसुंधरा में लोकार्पण हुआ. किताब में रेखा उप्रेती ने अपने यूरोप-यात्रा के संस्मरणों को शामिल किया है. 20 दिनों की इस यात्रा के दौरान लेखिका ने जो 15 संस्मरण लिखे थे, […]
साहित्‍य-संस्कृति

गांधी जी ने ‘भारतराष्ट्र’ को सांस्कृतिक पहचान दी

गांधी जी का राष्ट्रवाद-3 डॉ. मोहन चंद तिवारी (दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में ‘इंडिया ऑफ माय ड्रीम्स’ पर आयोजित ग्यारह दिन (9जुलाई -19 जुलाई,2018 ) के समर स्कूल के अंतर्गत गांधी जी के राष्ट्रवाद और समाजवाद पर दिए गए मेरे व्याख्यान का तृतीय भाग, जिसमें वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी जी के ‘राष्ट्रवाद’ और उनकी […]
साहित्‍य-संस्कृति

गांधी जी का राष्ट्रवाद जो आज भी सपना बनकर रह गया

गांधी जी का राष्ट्रवाद-2 डॉ. मोहन चंद तिवारी (दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में so ‘इंडिया ऑफ माय ड्रीम्स’ पर आयोजित ग्यारह दिन (9जुलाई -19 जुलाई, 2018 ) के समर स्कूल के अंतर्गत गांधी जी के राष्ट्रवाद और समाजवाद पर दिए गए मेरे व्याख्यान का द्वितीय भाग, जिसमें वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी जी के ‘राष्ट्रवाद’ की […]
संस्मरण

जंगल जाते, किम्मु छक कर खाते

प्रकाश उप्रेती मूलत: उत्तराखंड के कुमाऊँ से हैं. पहाड़ों में इनका बचपन गुजरा है, उसके बाद पढ़ाई पूरी करने व करियर बनाने की दौड़ में शामिल होने दिल्ली जैसे महानगर की ओर रुख़ करते हैं. पहाड़ से निकलते जरूर हैं लेकिन पहाड़ इनमें हमेशा बसा रहता है। शहरों की भाग-दौड़ और कोलाहल के बीच इनमें […]
उत्तराखंड हलचल साहित्‍य-संस्कृति

मेरे पांव में चमचाते शहर की बेड़ियां

ललित फुलारा युवा पत्रकार हैं। पहाड़ के सवालों को लेकर मुखर रहते हैं। इस लेख के माध्यम से वह पहाड़ से खाली होते गांवों की पीड़ा को बयां कर रहे हैं। शहर हमें अपनी जड़ों से काट देता है. मोहपाश में जकड़ लेता है. मेरे पांव में चमचाते शहर की बेड़ियां हैं. आंगन विरान पड़ा […]