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पुस्तक-समीक्षा

सब मज़ेदारी है! कथा नीलगढ़- अनन्त गंगोला

डॉ. अरुण कुकसाल ‘तन ढंकने को कपड़े नहीं, सिर छिपाने को मुकम्मल छत नहीं, दो वक्त के चूल्हे के जलने का कोई सिलसिला नहीं, पर इस सब के बीच, ‘क्या हाल है?’ का जवाब ‘सब मजे़दारी है’. आखिर कैसे हो सकता है?’ इस बात ने नीलगढ़ में आकर रहने का जैसा निमंत्रण दे दिया’. (भूमिका […]
पुस्तक-समीक्षा

स्मृति-कथाओं के जीवंत शब्द-चित्र- ये चिराग जल रहे हैं

डॉ. अरुण कुकसाल ‘जिस मकान पर आपके बेटे ने ही सही, बडे़ फख्र से ‘बंसीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ की तख़्ती टांग दी थी, उसमें देवकी पर्वतीया का खून-पसीना लगा है. यह नाम कभी आपने ही because उन्हें दिया था लेकिन नेम प्लेट पर अपने नाम के साथ इसे भी शोभायमान करना आप भूले ही रहे (पृष्ठ-41).’’ […]
सोशल-मीडिया

जनपद पौड़ी में लोकपाल पद पर नियुक्त हुए डॉ. अरुण कुकसाल

वरिष्ठ समाज विज्ञानी, प्रशिक्षक, लेखक एवं घुमक्कड़ डॉ. अरुण कुकसाल को भारत सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी ‘मनरेगा’ से सम्बद्ध so शिकायतों के निवारण एवं उनके अनुश्रवण के लिए जनपद पौड़ी में लोकपाल के पद पर नियुक्त होने पर सभी क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है. ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना […]
पुस्तक-समीक्षा

कुछ अच्छी बातें सिर्फ गरीबी में ही विकसित होती हैं…

डॉ. अरुण कुकसाल ‘बाबा जी (पिताजी) की आंखों में आंसू भर आये थे. मैंने नियुक्ति पत्र उनके हाथौं में दिया तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया. वह बहुत कुछ कहना चाह रहे थे लेकिन कुछ भी बोल नहीं पा रहे थे. सिर्फ़ मेरे सिर पर हाथ फेरते रहे… मैं उसी विभाग में प्रवक्ता बन गया […]
पुस्तक-समीक्षा

‘पत्थरों का उपासक, प्रकृति का पुजारी’

डॉ. अरुण कुकसाल ‘सबकी अपनी जीवन कहानी होती है और सबका अपना संघर्ष होता है, सबके अपने सौभाग्य और सफलताएं होती हैं, तो अवरोध और असफलताएं भी. फिर भी हर जीवन अपने जमाने से प्रभावित होता है. अनेक जीवन अपने जमाने को जानने और बनाने में बीत जाते हैं और उनके जीवन को जमाना यों […]
पुस्तक-समीक्षा

बचपन की यादों को जीवंत करती किताब

 ‘मेरी यादों का पहाड़’ डॉ. अरुण कुकसाल ‘आ, यहां आ. अपनी ईजा (मां) से आखिरी बार मिल ले. मुझसे बचन ले गई, देबी जब तक पढ़ना चाहेगा, पढ़ाते रहना.’ उन्होने किनारे से कफन हटाकर मेरा हाथ भीतर डाला और बोले ‘अपनी ईजा को अच्छी तरह छू ले.’ मैंने ईजा (मां) के पेट पर अपनी हथेली […]
पुस्तक-समीक्षा

दृढ़ इच्छा शक्ति से मिला मुकाम : महेशा नन्द

डॉ. अरुण कुकसाल ‘गांव में डड्वार (अनाज मांगने की कटु प्रथा) मांगने गई मेरी मां जब घर वापस आई तो उसकी आखें आसूओं से ड़बडबाई हुई और हाथ खाली थे. मैं समझ गया कि आज भी निपट ‘मरसा का झोल’ ही सपोड़ना पड़ेगा…. गांव में शिल्पकार-सर्वण सभी गरीब थे इसलिए गरीबी नहीं सामाजिक भेदभाव मेरे […]
स्मृति-शेष

‘विकट से विशिष्ट’ जीवन-यात्रा

पूर्णानन्द नौटियाल (सन् 1915 – 2001) डॉ. अरुण कुकसाल बचपन में मिले अभावों की एक खूबी है कि वे बच्चे को जीवन की हकीकत से मुलाकात कराने में संकोच या देरी नहीं करते. घनघोर आर्थिक अभावों में बीता बचपन जिंदगी-भर हर समय जीवनीय जिम्मेदारी का अहसास दिलाता रहता है. उस व्यक्ति को पारिवारिक-सामाजिक उत्तरदायित्वों के […]
इतिहास

अन्वेषक अमर सिंह रावत के अमर उद्यमीय प्रयास

डॉ. अरुण कुकसाल सीरौं गांव (पौड़ी गढ़वाल) के महान अन्वेषक और उद्यमी अमर सिंह रावत सन् 1927 से 1942 तक कंडाली, पिरूल और रामबांस के कच्चेमाल से व्यावसायिक स्तर पर सूती और ऊनी कपड़ा बनाया करते थे. उन्होने सन् 1940 में मुम्बई (तब का बम्बई) में प्राकृतिक रेशों से कपड़ा बनाने के कारोबार में काम […]