अक्षय तृतीया : कृषि सभ्यता और मानसूनों के पूर्वानुमान का पर्व

अक्षय तृतीया : कृषि सभ्यता और मानसूनों के पूर्वानुमान का पर्व

अक्षय तृतीया पर विशेष डॉ . मोहन चंद तिवारी आज शुक्रवार,14 मई,2021 के दिन वैशाख शुक्ल तृतीया की तिथि को मनाया जाने वाला ‘अक्षय तृतीया’ का शुभ पर्व है. ‘अक्षय तृतीया’ जिसे स्थानीय भाषा में ‘अखा तीज’ भी कहा जाता है,भारत की कृषि सभ्यता because और मानसूनों के पूर्वानुमान का भी महत्त्वपूर्ण पर्व है. ‘अक्षय’ […]

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 उत्तराखंड में उद्यानीकरण की हकीकत

उत्तराखंड में उद्यानीकरण की हकीकत

पलायन ‘व्यक्तिजनित’ नहीं ‘नीतिजनित’ है भाग-3 चारु तिवारी  सरकार बार-बार कह रही है कि उद्यानीकरण को रोजगार का आधार बनायेगी. मुख्यमंत्री अपने हर संबोधन में बता रहे हैं कि वे फलोत्पादन और नकदी फसलों से लोगों की आमदनी बढ़ायेंगे, ताकि वे महानगरों की ओर न भागें. सरकार अगर इस तरह सोच रही है तो निश्चित […]

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 बंजर होते खेतों के बीच ईजा का दुःख

बंजर होते खेतों के बीच ईजा का दुःख

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—9 प्रकाश उप्रेती हमारे खेतों के भी अलग-अलग नाम होते हैं. ‘खेतों’ को हम ‘पटौ’ और ‘हल चलाने’ को ‘हौ बहाना’ कहते हैं. हमारे लिए पटौपन हौ बहाना ही कृषि या खेती करना था. कृषि भी क्या बस खेत बंजर न हो इसी में लगे रहते थे. हर खेत […]

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 पिठाड़ी—पिदें की बाकर्या अर बाकर्यों कु त्यार

पिठाड़ी—पिदें की बाकर्या अर बाकर्यों कु त्यार

लोक पर्व दिनेश रावत वर्ष का एक दिन! जब लोक आटे की बकरियाँ बनाते हैं. उन्हें चारा—पत्ती चुंगाते हैं. पूजा करते हैं. धूप—दीप दिखाते हैं. गंध—अक्षत, पत्र—पुष्ठ चढ़ाते हैं. रोली बाँधते हैं. टीका लगाते हैं. अंत में इनकी पूजा—बलि देकर आराध्य देवी—देवताओं को प्रसन्न करते हैं. त्यौहार मनाते हैं, जिसे ‘बाकर्या त्यार’ तथा संक्रांति जिस […]

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