
‘कैसा हो अपना उत्तराखंड?’ – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर तीन लाख से अधिक विद्यार्थीरखेंगे
अगले पांच वर्षों का विजन; 150 श्रेष्ठ विचारों पर मुख्यमंत्री खुद करेंगे आमने-सामने मंथन
- हिमांतर वेब डेस्क, देहरादून
कल्पना कीजिए—उत्तराखंड के किसी दूरस्थ पहाड़ी गांव के स्कूल में पढ़ने वाला कक्षा 11 का एक विद्यार्थी अपने राज्य के भविष्य को लेकर एक विचार लिखता है। शायद वह अपने गांव तक बेहतर सड़क पहुंचाने की बात करे। शायद उसके पास पहाड़ों से पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने का कोई नया मॉडल हो। हो सकता है वह पर्यटन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने का सुझाव दे या तकनीक के जरिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम गांव तक पहुंचाने का रास्ता सुझाए।
उसका यही विचार कुछ दिनों बाद मुख्यमंत्री के सामने चर्चा का विषय बन सकता है। उत्तराखंड में 10 अगस्त से शुरू होने जा रहा ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ इसी संभावना का मंच है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पहल के जरिए प्रदेश के 2,800 से अधिक विद्यालयों के कक्षा 11 और 12 में पढ़ने वाले तीन लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को एक बड़ा सवाल दिया जा रहा है—
“कैसा हो अपना उत्तराखंड?”
सवाल छोटा है, लेकिन इसका दायरा बहुत बड़ा।
इसमें उत्तराखंड के अगले पांच वर्षों का सपना भी है, चुनौतियां भी और उन्हें हल करने के लिए नई पीढ़ी की सोच को सामने लाने की कोशिश भी।
जिन्होंने उत्तराखंड को बनते नहीं देखा, वे बताएंगे इसे आगे कैसे बढ़ना है
इस मंथन की सबसे दिलचस्प बात इसकी पीढ़ी है।
इसमें शामिल होने वाले अधिकांश विद्यार्थी उस उत्तराखंड में पैदा हुए हैं जो पहले से एक अलग राज्य था। उन्होंने राज्य निर्माण का आंदोलन नहीं देखा। लेकिन उन्होंने बदलते उत्तराखंड को जरूर देखा है।
उन्होंने पहाड़ों से पलायन की चर्चा सुनी है। पर्यटन को तेजी से बढ़ते देखा है। इंटरनेट और स्मार्टफोन को गांवों तक पहुंचते देखा है। नई सड़कें, नए शिक्षण संस्थान और नई संभावनाएं देखी हैं—और साथ ही रोजगार, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा कनेक्टिविटी से जुड़ी चुनौतियों को भी करीब से महसूस किया है।
अब इसी पीढ़ी से पूछा जा रहा है कि वह अगले उत्तराखंड को किस रूप में देखना चाहती है।
यह केवल विद्यार्थियों की राय जानने का प्रयास नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की कल्पना को समझने की कोशिश है जिसे आने वाले वर्षों में राज्य की विकास यात्रा का नेतृत्व करना है।

आठ विषय, एक उत्तराखंड
विद्यार्थियों के सामने केवल एक सामान्य प्रश्न नहीं रखा गया है। उन्हें राज्य के भविष्य से जुड़े उन क्षेत्रों पर सोचने का अवसर दिया जाएगा जिनसे उत्तराखंड की अगली विकास यात्रा तय हो सकती है।
- पर्यटन विकास — क्या उत्तराखंड ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित कर सकता है जो स्थानीय लोगों को रोजगार भी दे और पहाड़ों के पर्यावरण को सुरक्षित भी रखे?
- रोजगार — क्या युवाओं को रोजगार के लिए पहाड़ छोड़ना जरूरी हो या रोजगार उनके अपने शहर, कस्बे और गांव तक पहुंच सकता है?
- वन एवं पर्यावरण — विकास और प्रकृति के बीच संतुलन का उत्तराखंड मॉडल कैसा हो?
- आधुनिक शिक्षा — बदलती तकनीक और नई अर्थव्यवस्था के दौर में स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को किस तरह बदलना चाहिए?
- महिलाओं की भूमिका — उत्तराखंड की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत कैसे किया जाए?
- सड़क एवं कनेक्टिविटी — दुर्गम क्षेत्रों और सीमांत गांवों को बेहतर तरीके से कैसे जोड़ा जाए?
- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य — पहाड़ों और दूरस्थ इलाकों तक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का रास्ता क्या हो?
- तकनीकी विकास — डिजिटल तकनीक, नवाचार और आधुनिक समाधान उत्तराखंड के विकास की रफ्तार कैसे बढ़ा सकते हैं?
इन सवालों के उत्तर किताबों से नहीं, विद्यार्थियों की अपनी कल्पना और अनुभव से आने हैं।
एक क्लिक और विचार बनेगा मंथन का हिस्सा
कार्यक्रम को बड़े स्तर पर ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जाएगा।
- विद्यार्थी हिंदी या अंग्रेजी में अपने विचार तैयार कर विद्यालयों के माध्यम से ऑनलाइन प्रविष्टियां अपलोड करेंगे। इसके लिए 24 अगस्त अंतिम तिथि निर्धारित की गई है।
- हर विद्यार्थी की भागीदारी को दर्ज करने के लिए प्रविष्टि सफलतापूर्वक जमा होने के बाद डिजिटल प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
- अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया में तीन लाख से अधिक विद्यार्थी अपने विचार भेजेंगे।
- यानी उत्तराखंड के भविष्य पर एक साथ लाखों युवा मस्तिष्क सोचेंगे।
- लेकिन लाखों विचारों में से कुछ विचार आगे एक और खास पड़ाव तक पहुंचेंगे।
जब विद्यार्थी के सामने होंगे मुख्यमंत्री
प्राप्त प्रविष्टियों में से करीब 150 श्रेष्ठ सुझावों का चयन विशेषज्ञों की टीम करेगी।
- इसके बाद शुरू होगा इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा।
- चयनित विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ आमने-सामने बैठने का अवसर मिलेगा।
- न कोई एकतरफा भाषण, न केवल औपचारिक प्रस्तुति।
- यह एक मंथन होगा—जहां विद्यार्थी अपना विचार रखेंगे और मुख्यमंत्री उनसे उस विचार पर सीधे बातचीत करेंगे।
- इस विशेष संवाद की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इसमें संबंधित विभागों के सचिव भी मौजूद रहेंगे।
- इसका उद्देश्य केवल अच्छे विचारों की सराहना करना नहीं है। प्रयास यह होगा कि ऐसे सुझाव, जो व्यावहारिक और उपयोगी हों, उन्हें संबंधित विभागों की नीतियों और भविष्य की विकास योजनाओं में शामिल करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।
इस तरह किसी विद्यार्थी की कॉपी या कंप्यूटर स्क्रीन पर जन्मा एक विचार नीति निर्माण की मेज तक पहुंच सकता है।
क्लासरूम से पॉलिसी टेबल तक
यही इस पूरी पहल का सबसे अलग पहलू है।
- युवा अक्सर सरकारी नीतियों के लाभार्थी होते हैं। शिक्षा नीति उनके लिए बनती है। रोजगार योजनाएं उनके लिए तैयार होती हैं। स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम उनके लिए चलते हैं।
- लेकिन यहां भूमिका कुछ बदल रही है।
- यहां उनसे केवल यह नहीं पूछा जा रहा कि उन्हें सरकार से क्या चाहिए। उनसे पूछा जा रहा है कि राज्य को क्या करना चाहिए।
- यानी विद्यार्थी केवल भविष्य की किसी योजना का लाभार्थी नहीं, बल्कि उस भविष्य की कल्पना करने वाला भागीदार भी होगा।
- उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए यह संवाद और महत्वपूर्ण हो जाता है। यहां विकास के साथ हिमालयी पर्यावरण की संवेदनशीलता जुड़ी है। पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार का प्रश्न जुड़ा है। सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भौगोलिक चुनौतियां हैं। आधुनिकता के साथ पहाड़ की संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है।
इन सवालों पर नई पीढ़ी क्या सोचती है—‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ उसी सोच को सामने लाने का प्रयास है।
धामी का मंत्र—नई सोच को सुनना होगा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस पहल को सरकार और नई पीढ़ी के बीच संवाद के रूप में देखते हैं।
उनका कहना है—
“हमारी सरकार ने हमेशा संवाद की संस्कृति को प्राथमिकता दी है। हम उन विद्यार्थियों का दृष्टिकोण समझना चाहते हैं जिनका जन्म उत्तराखंड राज्य बनने के बाद हुआ। समय तेजी से बदल रहा है और नई पीढ़ी की सोच, अपेक्षाएं तथा तकनीक के प्रति उनका दृष्टिकोण भी अलग है। हमें उनकी बात सुननी, समझनी और समाज के साथ साझा करनी होगी। नई सोच और नई तकनीक के साथ ही उत्तराखंड देश और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेगा।”
यह विचार उस बदलाव की ओर भी संकेत करता है जिसमें शासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित न रहकर नई पीढ़ी से यह जानने की कोशिश करता है कि बदलती दुनिया में उसकी प्राथमिकताएं क्या हैं।
तीन लाख सपने, 150 विचार और एक सवाल
10 अगस्त से उत्तराखंड के हजारों स्कूलों में जब विद्यार्थी इस मंथन का हिस्सा बनेंगे, तो उनके सामने शायद पहली बार अपने राज्य को केवल एक पाठ्यपुस्तक के अध्याय की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसे भविष्य की तरह देखने का अवसर होगा जिसे वे स्वयं प्रभावित कर सकते हैं।
- किसी के लिए भविष्य का उत्तराखंड ऐसा होगा जहां रोजगार के लिए गांव छोड़ना न पड़े।
- किसी के लिए ऐसा उत्तराखंड जहां आधुनिक अस्पताल पहाड़ के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकें।
- किसी की कल्पना में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन होगा।
- किसी के विजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक से जुड़े स्कूल होंगे।
- और शायद किसी विद्यार्थी के पास ऐसा विचार हो जिसके बारे में आज किसी सरकारी फाइल में एक पंक्ति भी न लिखी गई हो।
- यही इस मंथन की असली संभावना है।
क्योंकि उत्तराखंड के अगले पांच वर्षों की कहानी केवल सचिवालय की फाइलों और सरकारी बैठकों में नहीं लिखी जाएगी। उसमें उस पीढ़ी की आवाज भी शामिल करने की कोशिश होगी जिसे आगे चलकर इस राज्य की जिम्मेदारी संभालनी है।
सवाल अब नई पीढ़ी के सामने है— “कैसा हो अपना उत्तराखंड?”
और इस बार सरकार जवाब देने के बजाय जवाब सुनना चाहती है।

मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन – एक नज़र
शुभारंभ: 10 अगस्त
भागीदारी: 2,800 से अधिक विद्यालय
विद्यार्थी: तीन लाख से अधिक
कक्षाएं: 11वीं एवं 12वीं
माध्यम: ऑनलाइन
भाषा: हिंदी अथवा अंग्रेजी
प्रविष्टि की अंतिम तिथि: 24 अगस्त
श्रेष्ठ प्रविष्टियां: लगभग 150
विशेष अवसर: चयनित विद्यार्थियों का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधा संवाद
प्रमुख विषय: पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण, शिक्षा, महिला भागीदारी, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और तकनीकी विकास
