पारंपरिक कृषि एवं पहाड़ी अनाजों के संरक्षण की मिसाल बनीं ‘रेड राइस लेडी’ स्वतंत्री बंधानी, मिला तीलू रौतेली सम्मान-2026

 

  • हिमांतर ब्यूरो, नौगांव (उत्तरकाशी)

उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि, स्थानीय अनाजों के संरक्षण एवं ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पिछले करीब दो दशकों से निरंतर कार्य कर रहीं स्वतंत्री बंधानी को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए तीलू रौतेली सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया है। लाल चावल के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के चलते उन्हें ‘रेड राइस लेडी’ के नाम से पहचान मिली है।

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स्वतंत्री बंधानी का कार्य केवल लाल चावल के संरक्षण तक सीमित नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड की पारंपरिक एवं पोषक फसलों कोणी, चीना सहित विभिन्न मिलेट्स और स्थानीय अनाजों के संरक्षण, संवर्धन और इनके महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लंबे समय से कार्य किया है। बदलते कृषि परिवेश में पारंपरिक फसलों की घटती खेती के बीच इन फसलों को बचाने और किसानों को इनके उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

उन्होंने स्थानीय किसानों, विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक कृषि, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और स्थानीय उत्पादों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया। उनका उद्देश्य पारंपरिक फसलों को संरक्षित करने के साथ ही इनके माध्यम से पहाड़ के किसानों और महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना रहा है।

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लाल चावल, कोणी और चीना जैसे पारंपरिक अनाज उत्तराखंड की कृषि एवं खाद्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। स्वतंत्री बंधानी ने इन पारंपरिक फसलों के संरक्षण के साथ इनके पोषण, कृषि जैव विविधता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल खेती के महत्व को भी सामने लाने का कार्य किया है।

करीब दो दशक से अधिक समय से जारी उनके जमीनी प्रयासों को तीलू रौतेली सम्मान के रूप में मिली यह पहचान न केवल स्वतंत्री बंधानी के कार्यों का सम्मान है, बल्कि उत्तराखंड के उन किसानों और ग्रामीण महिलाओं के योगदान का भी सम्मान है, जो राज्य की पारंपरिक कृषि एवं खाद्य विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोए हुए हैं।

स्वतंत्री बंधानी ने सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक फसलों, स्थानीय अनाजों और पहाड़ की कृषि विरासत के संरक्षण का उनका प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

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