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लोक पर्व-त्योहार

लोक पर्व-त्योहार

विकृत इतिहास चेतना की भेंट चढ़ता ‘खतड़ुवा’ पर्व

पशुधन की कुशलता की कामना का पर्व  है ‘खतडुवा’ डॉ. मोहन चंद तिवारी ‘कुमाऊं का स्वच्छता अभियान से जुड़ा ‘खतडुवा’ because पर्व वर्षाकाल की समाप्ति और शरद ऋतु के प्रारंभ में कन्या संक्रांति के दिन आश्विन माह की प्रथमा तिथि को मनाया जाने वाला एक सांस्कृतिक लोकपर्व है.
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हमारी समृद्ध परंपरा और खुशहाली के प्रतीक हैं हमारे त्यौहार

लगातार 6 दिनों तक मनाया जाता है ‘मगोच’ डॉ. दीपा चौहान राणा हमारे उत्तराखंड में 12 महीनों के बारह त्यौहार मनाए जाते हैं और हर त्यौहार का अपना एक खास महत्व है. हम उत्सवधर्मी लोग हैं. हमारे रीति—रिवाज हमारी संस्कृति की एक खास पहचान हैं. butहमारे यहां तीज—त्यौहार, उत्सव तो बहुत हैं लेकिन आज मैं […]
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‘हस्त’ नक्षत्र में ही क्यों होता है कूर्माचल के सामवेदी ब्राह्मणों का ‘उपाकर्म’?

डॉ. मोहन चंद तिवारी जन्माष्टमी की भांति इस बार हरतालिका का पर्व भी दो दिन मनाया जा रहा है, 21 अगस्त को और 22 अगस्त को. वैसे कलेंडर और पंचांगों में हरतालिका तीज (हरताई) इस बार 21अगस्त की बताई गई है और 22 अगस्त को सामवेदी ब्राह्मणों का ‘उपाकर्म’ पर्व बताया गया है.वर्त्तमान समय में […]
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“इजा मैंले नौणि निकाई, निखाई”

घृत संक्रान्ति 16 अगस्त पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी ‘घृत संक्रान्ति’ के अवसर पर समस्त देशवासियों और खास तौर से उत्तराखण्ड वासियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए कि कृषिमूलक हरित क्रान्ति से पलायन करके आधुनिक औद्योगिक क्रान्ति के लिए की गई दौड़ ने हमें इस योग्य तो बना दिया है कि हम पहाड़ों […]
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‘धर्म की स्थापना और दुष्टों के विनाश के लिए मनुष्य का रूप धरते हैं’

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष ज्योतिर्मयी पंत कृष्ण जन्माष्टमी, कृष्ण जयंती, गोकुलाष्टमी आदि कई नामों से सुप्रसिद्ध यह दिन हिन्दुओं  का एक अति विशिष्ट पर्व है. इस दिन विष्णु भगवान ने धरती पर श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया. यह विष्णु का आठवाँ  अवतार माना जाता है. इसी दिन को कृष्ण  के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है जिसे जन्माष्टमी […]
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‘धर्म’ की सामाजिक विकृतियों से संवाद करते आए हैं कृष्ण

गीता का कालजयी चिंतन-1 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी आज भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व समूचे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. द्वापर युग में कंस के अत्याचार और आतंक से मुक्ति दिलाने तथा धर्म की पुनर्स्थापना के लिए इसी दिन विष्णु के […]
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‘गिदारी आमा’ के विवाह गीत

डॉ. मोहन चंद तिवारी “पिछले लेखों में शम्भूदत्त सती जी के ‘ओ इजा’ उपन्यास के सम्बन्ध में जो चर्चा चल रही है,उसी सन्दर्भ में यह महत्त्वपूर्ण है कि इस रचना का एक खास प्रयोजन पाठकों को पहाड़ की भाषा सम्पदा और वहां प्रचलित लोक संस्कृति के विविध पक्षों तीज-त्योहार, मेले-उत्सव खान-पान आदि से अवगत कराना […]
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स्मृति मात्र में शेष रह गए हैं ‘सी रौता’ और थौलधार जातर

दिनेश रावत सी रौता बाई! सी रौता!! कितना उल्लास, उत्सुकता और कौतुहल होता था. गाँव, क्षेत्र के सभी लोग ख़ासकर युवाजन जब हाथों में टिमरू की लाठियाँ लिए ढोल—दमाऊ की थाप पर नाचते, गाते, थिरकते, हो—हल्ला करते हुए अपार जोश—खरोश के साथ गाँव से थौलधार के लिए निकलते थे. कोटी से निकला यह जोशीला जत्था […]
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अपनी थाती-माटी से आज भी जुड़े हैं रवांल्‍टे

अपने पारंपरिक व्‍यंजनों और संस्‍कृति को आज भी संजोए हुए हैं रवांई-जौनपुर एवं जौनसार-बावर के बांशिदे आशिता डोभाल जब आप कहीं भी जाते हैं तो आपको वहां के परिवेश में एक नयापन व अनोखापन देखने को मिलता है और आप में एक अलग तरह की अनुभूति महसूस होती है. जब आप वहां की प्राकृतिक सुंदरता, […]
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च्यला! हर्याव बुण कभें झन छोड़िए!

डॉ. मोहन चंद तिवारी आज श्रावण संक्रांति के दिन हरेले का शुभ पर्व है. हमारे घर में नौ दिन पहले आषाढ़ के महीने में बोए गए हरेले को आज प्रातःकाल श्रावण संक्रांति के दिन काटा गया. कल रात हरेले की गुड़ाई की गई  उसे पतेशा भी गया.हरेला पतेशने के कुछ खास मंत्र होते हैं,जो हमें […]