Category : लोक पर्व-त्योहार

ऋतुविज्ञान का भी पर्व डॉ. मोहन चंद तिवारी “उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद त्यज निद्रां जगत्पते. त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम्.” अर्थात्

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