
सयाना होता भारतीय गणतंत्र
प्रो. गिरीश्वर मिश्र
मनुष्य द्वारा रची कुछ बेहद ताकतवर परिभाषाओं में देश, राज्य, राष्ट्र और गणतंत्र जैसी कोटियाँ भी आती हैं जो धरती पर सामुदायिक-सांस्कृतिक यात्रा में पथ प्रदर्शक की भूमिकाएं अदा करती हैं. इन परिभाषाओं की व्यावहारिक परिणति परस्परसहमति के सापेक्ष्य होती है. इतिहास गवाह है कि असहमति हिंसा को जन्म देती है और आक्रमण, युद्ध और संधियों ने इन संरचनाओं को लगातार प्रभावित किया है. because अनेक देशों में सैन्य शासन ने चुनी सरकार को सत्ता से बेदखल किया है. लोभ में अनेक बार युद्ध , नर संहार और लूट मचती रही है. सभ्यता के बढ़ते कदम के साथ क्रूरता, बर्बरता, छल-छद्म और कुटिलता के नए नए रूप आते रहे हैं. न्यूक्लियर तकनालाजी ने इस परिदृश्य को और भी जोखिम भरा बना दिया है. ऐसे में विकसित, विकासशील और अविकसित देशों के बीच की खाई पटती नजर नहीं आती. मुसीबत यह भी है कि ‘विकसित’ कहे जाने व...









