देश—विदेश

हिन्दी भारत की आजादी और देश की एकता की प्रतीक

  • हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्ली

हिन्दी भाषा भारत के गौरव की प्रतीक भाषा है,देश की आजादी का सबसे बड़ा अस्त्र और हमारे स्वाधीनता सेनानियों की मुखर स्वर रही है. जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश गुलामी के प्रतीकों से मुक्त हो रहा है तो हमें पूर्ण विश्वास है कि हिन्दी भी अपनी संवैधानिक स्थिति और जन स्वीकार्यता की शक्ति से अंग्रेजी का प्रभाव कम कर देगी. मंत्रालयों और सरकारी विभागों में फाइलों पर हिन्दी की टिप्पणियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए.

ये विचार नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष वरिष्ठ भाजपा नेता श्री सतीश उपाध्याय ने हिन्दी सप्ताह कार्यक्रमों के उद्घाटन के अवसर पर पालिका केंद्र सभागार,नई दिल्ली में व्यक्त किए.

समारोह के अतिविशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार और ऋतम डिजिटल नेटवर्क के कंटेंट हेड प्रो.सूर्य प्रकाश सेमवाल ने कहा कि आजादी की लड़ाई में हिन्दी को मुख्य हथियार बनाने की बात हो अथवा संसद में उसे राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने की, इस अभियान में अहिंदी क्षेत्र के योद्धाओं का बड़ा योगदान रहा है. आज हिन्दी सात समंदर पार वैश्विक भाषा के रूप में और देश के व्यापार,बाजार,खेल,प्रबंधन और तकनीक क्षेत्र में लोकप्रिय भाषा बन चुकी है. आजादी का यह अमृत काल हिन्दी को देश के अंदर आधिकारिक राष्ट्रभाषा और संयुक्त राष्ट्र संघ में आधिकारिक  मान्य भाषा बनाने का सुअवसर है.

नगरपालिका के उपनिदेशक श्री देवेन्द्र सिंह ने कहा कि अब सरकारी विभागों में अधिकारी और कर्मचारी हिन्दी को हीन भाव से नहीं स्वाभिमान और देश के सम्मान से जोड़कर देखने लगे हैं.

हिन्दी सप्ताह समारोह की संयोजक और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद की हिन्दी अधिकारी श्रीमती अनीता जोशी ने कहा कि परिषद कार्यालय स्तर पर राजभाषा को और  समाज स्तर पर राष्ट्रभाषा के लिए प्रतिबद्ध है.कोरोना काल में भी हमने हिन्दी प्रचार प्रसार के अभियान को नहीं रुकने दिया.आज भी परिषद द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगिताओं में सैकड़ों प्रतिभागी सम्मिलित हो रहे हैं.

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