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विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रवांई की कई शख्सियतों का सम्मान

विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रवांई की कई शख्सियतों का सम्मान

उत्तरकाशी
युवा सामाजसेवी रूद्रा because एग्रों स्वायत्त सहकारिता के संस्थापक नरेश नौटियाल की पहल लाई रंग नीरज उत्तराखंडी, देवसारी नौगांवरूद्रा एग्रो स्वायत्त सहकारिता और सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा)  ने  नौगांव ब्लाक के देवसारी गांव में नागरिक अभिनंदन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया. ज्योतिष समारोह में होटल मैनेजमेंट सर्टीफिकेट वितरण, रवांई के पारम्परिक पकवानों because गढ़ भोज की प्रर्दशनी, विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य का निशुल्क परीक्षण दवा वितरण एवं because ई-श्रमिक कार्ड  बनवाने की सुविधा क्षेत्रवासियों को उपलब्ध करवाई गई. होटल मैनेजमैंट कोर्स करने वाले 250 छात्रों को  वितरित किये गये  प्रमाणपत्र. ज्योतिषइन शख्शियतों को किया गयाकृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट because कार्य के लिए - श्रीमती सुनीता राणा एवं श्रीमती प्रमिला राणा . स्वास्थ्य के क्षेत्र मे...
रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं!- रवांई के लोक की अनमोल सांस्कृतिक विरासत से साक्षात्कार…

रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं!- रवांई के लोक की अनमोल सांस्कृतिक विरासत से साक्षात्कार…

पुस्तक-समीक्षा
ग्राउंड जीरो से संजय चौहान!शिक्षक, लेखक, कवि, लोकसंस्कृतिकर्मी और लोक से because जुड़े दिनेश रावत नई-नई पुस्तक रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं को पढने का सौभाग्य मिला. पांच अध्याय में लिखी गयी इस पुस्तक में आपको रवाई घाटी की अनमोल सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का मौका मिलेगा साथ ही यहाँ की अनूठी परम्पराओं की जानकारी भी मिलेगी जिन्हें आपने आज तक नहीं सुना होगा. तु आया देवा, शांख क सबद, तु आया देवा ढोलू की नाद तु आया देवा, अंग मोड़ी-मोड़ी, तु आया देवा बांगुडी बांदुऊ…ज्योतिष लेखक दिनेश रावत ने देवताओं की स्तुति से ही इस because किताब की शुरुआत की है. लोक के प्रति गहरी समझ और लोक संस्कृति के सच्चे साधक की यही एक निशानी होती है. जिसके बाद किताब के अगले पन्नो में साहित्यकार डॉ प्रयाग जोशी और साहित्यकार व रवांई की पहचान महाबीर रवाल्टा जी द्वारा पुस्तक की उपयोगिता और महत्ता के बारे में ...
विश्व पृथ्वी दिवस: जीना है तो धरती की भी सुनें

विश्व पृथ्वी दिवस: जीना है तो धरती की भी सुनें

पर्यावरण
विश्व पृथ्वी दिवस पर (22 अप्रैल 2022) विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  जाने कब से यह धरती मनुष्यसमेत सभी प्राणियों, जीव - जंतुओं और वनस्पतियों आदि के लिए आधार बन कर जीवन और भरण-पोषण का भार वहन करती चली आ रही है. कभी मनुष्य भी (आज की तरह का) कोई विशिष्ट प्राणी न मान कर अपने को प्रकृति का अंग समझता था. मनुष्य की स्थिति शेष प्रकृति के अवयवों के  एक सहचर  के रूप में थी.  मनुष्य को प्रकृति के रहस्यों ने बड़ा आकृष्ट किया because और अग्नि, वायु, पृथ्वी, शब्द आदि सब में देवत्व की प्रतिष्ठा होने लगी और वे पूज्य और पवित्र माने गए. प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखते हुए उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखा गया . उसके  उपयोग को सीमित और नियंत्रित करते हुए त्यागपूर्वक भोग की नीति अपनाई गई. विराट प्रकृति ईश्वर की उपस्थिति से अनुप्राणित होने के कारण मनुष्य उसके प्रति स्नेह और प्रीति के रिश्तों से अभिभूत ...
अनुराग ठाकुर की सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा देश भर के तमाम सांसदों के लिए प्रेरणा

अनुराग ठाकुर की सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा देश भर के तमाम सांसदों के लिए प्रेरणा

समसामयिक, देश—विदेश
अरविन्द मालगुड़ी देव भूमि हिमाचल जहाँ के सुदूर पहाड़ी इलाकों में बसे तमाम गांवों के लोगों को अक्सर बीमार होने की स्थिति में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था । अस्पताल तक पहुंचने में उन्हें कई तरह की परेशानियां पेश आती थी। इसी सार्थक सोच को मूर्त रूप मिला मई 2018 में जब वर्तमान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में शुरू की गई सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा जो आज पूरे हिमाचल के लिए मील का पत्थर बन चुकी है जिसका असल मकसद ग्रामीण इलाकों के मरीजों को अस्पतालों की भीड़ और परेशानी से निजात दिलवा कर घर-द्वार पर स्वास्थ्य लाभ देना है।अनुराग ठाकुर जी के मन में ख्याल आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि अस्पताल को ही जरूरतमंदों के घरों तक लाया जाए और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ करने के लिए और दूर-दराज के कोने में मेडिकल सेवा की पहुंच सुनिश्चित करने के ...
30 अप्रैल को दिल्ली में सजेगी उत्तराखंडी सिनेमा एवं संगीत की महफ़िल, यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स का होगा आयोजन

30 अप्रैल को दिल्ली में सजेगी उत्तराखंडी सिनेमा एवं संगीत की महफ़िल, यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स का होगा आयोजन

कला-रंगमंच
उत्तराखंडी सिनेमा एवं संगीत जगत एवं स्थानीय लोक-कलाकारों के प्रोत्साहन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु दिल्ली में प्रवासियों की संस्था यंग उत्तराखंड द्वारा शुरू की गयी एक सांस्कृतिक पहल जो यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स अथवा युका के नाम से बहुत चर्चित है ....एक बार पुन: अपने १०वें  संस्करण के साथ उत्तराखंडी सिनेमा संगीत जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए आगामी 30 अप्रैल 2022 को दिल्ली के डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स 2022 का आयोजन करने जा रही है ....इस अवार्ड शो में वर्ष 2019, 2020 एवं 2021 में उत्तराखंडी सिनेमा संगीत जगत में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलाकारों, व्यक्तियों अथवा संस्थानों को 8 श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। यंग उत्तराखंड संस्था 2010 से यह आयोजन करती आ रही है। पिछले 2 सालों में कोरोना वैश्विक महामारी के का...
विरासत से पहाड़ की विरासत गायब!

विरासत से पहाड़ की विरासत गायब!

देहरादून
अर्जुन सिंह रावत विरासत किसके लिए. कहते हैं संगीत की because कोई सीमा कोई दायरा नहीं होता लेकिन लोक को जीवित रखने के लिए उसे बताना भी जरूरी है और नई पीढ़ी से मिलाना भी. सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन कहकर प्रचारित किए जा रहे विरासत में देवभूमि की विरासत नदारद है. आयोजकों ने इसे महज रस्म अदायगी तक सीमित कर दिया है.ज्योतिष उत्तराखंड के देहरादून में बड़े जोर-शोर से विरासत का आयोजन किया जा रहा है. ओएनजीसी जैसे बड़े-बड़े प्रायोजक भी हैं और संगीत जगत के कई धुरंधर भी. कबीर की वाणी भी मिलेगी, because सूफी कलाम भी मिलेगा, क्लासिकल डांस फॉर्म भी मिलेंगे, लेकिन नहीं है तो उत्तराखंड का लोकस्वर. उत्तराखंड के वाद्ययंत्र और जागर जैसी देव विधा की प्रस्तुति.ज्योतिष कितनी हैरानी है न, जिस ढोल सागर, जागर को सम्मान देते हुए प्रीतम भरतवाण जी, बसंती देवी जी जैसे लोक साधकों को पद्मश्री सम्मान प्रदान किया ...
स्याल्दे बिखौती : कत्युरीकाल की  सांस्कृतिक विरासत का मेला

स्याल्दे बिखौती : कत्युरीकाल की  सांस्कृतिक विरासत का मेला

बागेश्‍वर, लोक पर्व-त्योहार
स्याल्दे बिखौती मेला : 13-14-15 अप्रैल पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीसांस्कृतिक नगरी द्वाराहाट (Dwarahat) में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला स्याल्दे-बिखौती (Syalde Bikhauti Mela) का ऐतिहासिक मेला पिछले दो वर्षों से कोरोना (Corona Virus) प्रकोप के चलते प्रतीकात्मक रूप से ही मनाया जा रहा था. किन्तु इस वर्ष मेला समिति के निर्णयानुसार मेला विशेष धूम धाम से मनाया because जा रहा है. मेला समिति व नगर पंचायत अध्यक्ष मुकेश साह द्वारा ग्राम प्रतिनिधियों की बैठक में की गई घोषणा के अनुसार लगभग 64 वर्ष पूर्व मेले से अलग हुए ईड़ा, जमीनी वार व पार ग्राम पंचायतें पुन: इस वर्ष स्याल्दे मेले का हिस्सा बनने जा रही हैं. परम्परागत मान्यता के अनुसार इस वर्ष चैत्र मास की अन्तिम रात्रि ‘विषुवत्’ संक्रान्ति 13 अप्रैल को द्वाराहाट से 8 कि.मी. की दूरी पर स्थित विभाण्डेश्वर महादेव में सारी रात बिखौती का मेला लगेगा...
देवलांग से रू-ब-रू करवाता दिनेश रावत द्वारा लिखित एक तथ्यात्मक गीत

देवलांग से रू-ब-रू करवाता दिनेश रावत द्वारा लिखित एक तथ्यात्मक गीत

सोशल-मीडिया, साहित्‍य-संस्कृति
पूर्णता एवं तथ्यात्मकता के साथ देवलांग की विशेषताओं से परिचय करवाता दिनेश रावत का यह गीतशशि मोहन रवांल्टा सीमांत जनपद उपर साहित्यकार दिनेश रावत द्वारा लिखित गीत अब तक का सबसे पूर्णता एवं तथ्यात्मकता गीत है. रवांई घाटी के सुप्रसिद्ध देवलांग उत्सव की विशेषताओं को दर्शाता यह गीत रामनवमी के अवसर पर लॉन्च किया गया. because गीत साहित्यकार दिनेश रावत ने लिखा, जिसे रवांई घाटी सुप्रसिद्ध गायिका रेश्मा शाह ने आवाज दी और राजीव नेगी ने संगीतबद्ध किया है. गाने को इस तरह से पिरोया गया है कि उसमें देवलांग के आयोजन को आसानी से समझा जा सकता है. देवलांग पर लिखे गए इस गीत को हारूल शैली में गाया व संगीतबद्ध किया गया है.हरताली गीत में देवलांग की तैयारियों से लेकर देवलांग के खड़े होने और वहां से आखिर ओल्ला को मड़केश्वर महादेव तक ले जाने की पूरी जानकारी दी गई है. देवलांग के आयोजन में एक—एक गाँव की हिस्से...
ऐश्वर्य और सहज आत्मीयता की अभिव्यक्ति श्रीराम

ऐश्वर्य और सहज आत्मीयता की अभिव्यक्ति श्रीराम

साहित्‍य-संस्कृति
राम नवमी पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  सनातनी यानी सतत वर्त्तमान की अखंड अनुभूति के लिए तत्पर मानस वाला भारतवर्ष का समाज देश-काल में स्थापित और सद्यः अनुभव में ग्राह्य सगुण प्रत्यक्ष को परोक्ष वाले व्यापक और सर्व-समावेशी आध्यात्म से जुड़ने का माध्यम because बनाता है. वैदिक चिंतन से ही व्यक्त और अव्यक्त के बीच का रिश्ता स्वीकार किया गया है और देवता और मनुष्य परस्पर भावित करते हुए श्रेय अर्थात कल्याण की प्राप्ति करते हैं (परस्परं भावयन्त: श्रेय: परमवाप्स्यथ - गीता). इस तरह यहाँ का आम आदमी लोक और लोकोत्तर (भौतिक और पारलौकिक) दोनों को निकट देख पाता है और उनके बीच की आवाजाही उसे अतार्किक नहीं लगती. सृष्टि चक्र और जीवन में भी यह क्रम बना हुआ है यद्यपि सामान्यत: उधर हमारा ध्यान नहीं जाता.ज्योतिष उदाहरण के लिए सभी प्राणी अन्न से उत्पन्न और जीवित हैं, अन्न वर्षा से उत्पन्न होता है. वर्षा ...
हिमालयीय वनस्पति ‘र् वेंण’ सुहागिनों की सिंदूर-फली

हिमालयीय वनस्पति ‘र् वेंण’ सुहागिनों की सिंदूर-फली

देहरादून
डा. मोहन चंद तिवारीसंस्कृत- 'कम्पिल्लक'  हिंदी- 'कमीला',  Mallotus philippensis लगभग आठ वर्ष पूर्व जम्मू-कश्मीर हिमालय में मां वैष्णो देवी के दर्शन करने के दौरान शिवखोड़ी की लगभग 4 कि.मी.की पैदल यात्रा करने का अवसर मिला तो वहां जंगलनुमा रास्ते में कम्पिल्लक के वृक्षों में लटकते 'कमीला' के because सिन्दूरी फलों को देखकर अपने गांव जोयूं, उत्तराखंड की वह याद ताजा हो आई जब मैं बचपन में अपने चाचा जी के साथ 'र् वेंण' के वृक्षों में लगे फलों से लाल रंग का पराग टटकाया करता था. चाचा जी ने बताया था कि इस फल के लाल पराग को माथे पर तिलक करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. पुराने जमाने में इसी रोली से स्त्रियां अपने सुहाग का सिन्दूर भरती थी.हमारे पाली पछाऊं में इसे 'र् वेंण' का फल कहा जाता है. हरताली शिव खोड़ी के मार्ग में पड़ने वाले मन्दिर मैं ठहरे एक साधु महात्मा ने यह बताकर मेरी जिज्ञासा को और ...