Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
राष्ट्रीय खेलों से बनेगा ऐसा माहौल, कि दुनिया देखेगी : मीर रंजन नेगी

राष्ट्रीय खेलों से बनेगा ऐसा माहौल, कि दुनिया देखेगी : मीर रंजन नेगी

देहरादून
पूर्व हॉकी कोच मीर रंजन नेगी उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन से बेहद उत्साहित, राष्ट्रीय खेलों के दौरान उत्तराखंड आएंगे मीर रंजन नेगी चक दे इंडिया फेम पूर्व अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी व कोच मीर रंजन नेगी उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों को लेकर उत्साहित हैं. उनका मानना है कि पहाड़ के खिलाड़ियों के सपने राष्ट्रीय खेल से पूरे होंगे. खेल प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलेगा और खेल का ऐसा माहौल उत्तराखंड में बनेगा, कि पूरी दुनिया देखेगी. नेगी 38 वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान उत्तराखंड भी आएंगे. उन्होंने इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को शुभकामनाएं दीं. मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के निवासी मीर रंजन नेगी लंबे समय से मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में रह रहे हैं. उत्तराखंड से उनका जुड़ा कभी कम नहीं रहा है. यही कारण है कि वह कभी उत्तराखंडी फिल्मों में अभिनय करते नजर आते हैं, तो महाराणा प्रता...
जनपद चमोली का शानदार ट्रेक है- देवाल विकास खंड का मोनाल ट्रेक

जनपद चमोली का शानदार ट्रेक है- देवाल विकास खंड का मोनाल ट्रेक

पर्यटन
मोनाल पक्षियों का शानदार आशियाना है - मोनाल टॉपजे . पी. मैठाणी सभी फोटो - हीरा सिंह बिष्ट जनपद चमोली के सीमान्त विकास खंड में देवाल में मोनाल ट्रेक एक नए ट्रेक के रूप में रूप में उभर रहा है, इस ट्रेक की समुद्र तल से उंचाई लगभग 12000 फीट है. उत्तराखंड के पर्यटक और टूरिज्म के नक़्शे पर तेजी  से उभरते हुए इस ट्रेक को गढभूमि एडवेंचर के सीईओ हीरा सिंह गढ़वाली और देवेन्द्र सिंह ने  सबसे पहले प्रचारित-प्रसारित किया.  वर्तमान में जिला पर्यटन विभाग के जनार्जन थपलियाल ने जिला पर्यटन अधिकारी और जिलाधिकारी चमोली के सहयोग से 30 युवक युवतियों को शामिल कर  प्रथम मोनाल ट्रेक का सफलता पूर्वक आयोजन किया. ये टीम आज ही मोनाल ट्रेक को संपन्न  कर वाण गांव वापस पहुंचे हैं. जैसा कि नाम से विदित है मोनाल ट्रेक पर सबसे अधिक मोनाल दिखाई दे रहे हैं इसकी एक वजह इस क्षेत्र में मानवीय  हस्तक्षेप का बहुत कम होना भ...
पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक व हिमालय के गांधी, सुंदरलाल बहुगुणा

पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक व हिमालय के गांधी, सुंदरलाल बहुगुणा

उत्तराखंड हलचल
डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला भारत की मिट्टी में इतनी महान हस्तियों ने जन्म लिया कि अगर उनका जिक्र करने या उनकी कहानी बयां करने बैठे तो शायद एक युग कम पड़ जाएगा. क्योंकि हिंदुस्तान की मिट्टी की तासीर ऐसी रही है जिसमें अनेक महापुरुष देवत्व लेकर पैदा हुए. आज भारत एक ऐसी ही हस्ती की जयंती मना रहा है. जिसने अपना सारा जीवन भारतीय मिट्टी और भारत के साथ-साथ विश्व पर्यावरण के लिए कुर्बान कर दिया.सुंदरलाल बहुगुणा भारत के महान पर्यावरण-चिन्तक एवं उत्तराखण्ड में चिपको आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तक थे. उन्होंने हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में वनों के संरक्षण के लिए अथक प्रयासों के साथ महान संघर्ष किया था. देश–दुनिया में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण उनका जन्म 09 जनवरी 1927 को गांव मरोड़ा (टिहरी गढ़वाल) में हुआ था. पांच भाई बहनों में सबसे छोटे होने के बावजूद उन्होंने कई बड़े कार्य किये. प्रारंभ में उनका नाम गंगा...
सुंदरलाल बहुगुणा की जयंती पर उनके लेखों की पुस्तक ‘पहाड़ की पीड़ा’ का लोकार्पण

सुंदरलाल बहुगुणा की जयंती पर उनके लेखों की पुस्तक ‘पहाड़ की पीड़ा’ का लोकार्पण

देहरादून
देहरादून. दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज अपराह्न  3:00 बजे प्रख्यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा की जयंती पर उनके लेखों की पुस्तक ‘पहाड़ की पीड़ा’ का लोकार्पण केंद्र के सभागार में किया गया. पुस्तक में शामिल आलेखों का संकलन सुंदरलाल बहुगुणा की बेटी श्रीमती मधु पाठक ने किया है. पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर विमला बहुगुणा, चंद्र सिंह, आईएएस रिटायर्ड, समाजसेवी डॉ. एस फ़ारुख, सामाजिक अध्यता डॉ. बी पी मैठाणी, सामजिक विचारक अनूप नौटियाल, जनकवि डॉ. अतुल शर्मा, डॉ. राजेन्द्र डोभाल और शिक्षाविद डॉ. हर्ष डोभाल आदि मौजूद थे. सुंदरलाल बहुगुणा की जयंती पर उनको याद करते हुए वक्ताओं ने उनके हिमालय के प्रति पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताया और उस दिशा पर प्राथमिकता के साथ काम करने की जरूरत पर बल दिया. उनके  लेखों की पुस्तक ‘पहाड़ की पीड़ा’ के लेखों की चर्चा करते हुए वक्...
मुख्यमंत्री धामी ने बरेली में किया 29 वें उत्तरायणी मेले का शुभारंभ

मुख्यमंत्री धामी ने बरेली में किया 29 वें उत्तरायणी मेले का शुभारंभ

देहरादून
उत्तराखंड में व्यापक पैमाने पर हो रहे हैं संस्कृति और विरासत के संरक्षण कार्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बरेली पुलिस लाइन में  29 वें उत्तरायणी मेले  में प्रतिभाग करते हुए मेले का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि उत्तरायणी मेले का प्राचीन समय से ही व्यापक सांस्कृतिक,व्यापारिक और ऐतिहासिक महत्व रहा है. प्राचीन समय में जब संचार और आवागमन के साधन सीमित थे तो उस समय मेल- मिलाप, व्यापार, सूचना के आदान-प्रदान हेतु  मेलों का बड़ा महत्व था. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि  प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण, उज्जैन महाकाल मंदिर कॉरिडोर निर्माण,  राम मंदिर निर्माण तथा विश्व पटल पर योग और भारत की प्राचीन विरासत का गुणगान इस बात के सुस्पष्ट प्रमाण हैं.मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में भी संस्कृति और विरासत के संरक...
उत्तराखंड की बद्री गाय पूजी जाएगी प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित धर्म संसद व गौ संसद में 

उत्तराखंड की बद्री गाय पूजी जाएगी प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित धर्म संसद व गौ संसद में 

दिल्ली-एनसीआर
सी एम पपनैंनई दिल्ली. प्रयागराज में आगामी 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित होने जा रहे महाकुंभ मेले में पहली बार उत्तराखंड की अति विशिष्ट बद्री गाय सहित अन्य 51 नस्ली गायों को उनकी भव्य पूजा अर्चना हेतु आमंत्रित किया गया है. महाकुंभ में आयोजित भव्य धर्म संसद व गौ संसद में ज्योतिष पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती-1008 सहित सभी शंकराचार्यों द्वारा गौ पूजन कर गौ माता-राष्ट्र माता का संकल्प लेकर गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए 24 कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. आमंत्रित नस्ली गायों में देवभूमि उत्तराखंड के हिमालयी अंचल में पाली जाने वाली बद्री गाय को एक विशिष्ट गाय के तहत प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित धर्म संसद व गौ संसद हेतु विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है. जिस हेतु विगत कई वर्षों से गोपाल मणी महाराज के सानिध्य में 'गौ माता राष्ट्र माता' आन्दोलन से ...
ITDA और NIC द्वारा विकसित की गई विभिन्न डिजिटल परियोजनाओं का मुख्यमंत्री धामी ने किया शुभारंभ

ITDA और NIC द्वारा विकसित की गई विभिन्न डिजिटल परियोजनाओं का मुख्यमंत्री धामी ने किया शुभारंभ

देहरादून
डिजिटल उत्तराखंड- वन स्टेट वन पोर्टल,  S3WaaS  फ्रेमवर्क वेबसाइट और नियर डिजास्टर रिकवरी सेंटर उत्तराखंड को डिजिटल डेस्टिनेशन बनाने में होंगे सहायक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सचिवालय में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और NIC द्वारा विकसित की गई विभिन्न डिजिटल परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा की चुनौतियां तथा डिजिटल युग में सार्वजनिक सेवाओं को अधिक दक्ष, तीव्र और समावेशी बनाने के लिए नई तकनीकी को आत्मसात करते हुए आईटीडीए और NIC द्वारा संयुक्त रूप से विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं. जिससे आम जनमानस को ऑल इन वन की तर्ज पर एक ही प्लेटफार्म पर आसानी से विविध प्रकार की सेवाएं मिल सकेगी. विभागों के कार्यों की प्रगति  ऑनलाइन देखी जा सकेगी; जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि होगी. उन्होंने कहा कि S3WaaS (...
पीपलकोटी गाँव की चंदुली पुफु और दीवाली के अमरूद

पीपलकोटी गाँव की चंदुली पुफु और दीवाली के अमरूद

संस्मरण
जे पी मैठाणी पीपलकोटी उत्तराखंड के चमोली जिले का सिर्फ कोई गाँव या कस्बा नहीं है. उत्तराखण्ड में ऐसे बहुत कम कस्बे या गाँव हैं जहां पर उत्तराखण्ड की दो प्रमुख विरासतें जो गढ़वाली और कुमांऊनी परंपराओं को संजोए रखती है. यहां पीपल के पेड़ भावनाओं के केन्द्र हैं. इस कसबे में भाषा , जाति और धरम को आप सार्वजनिक स्थान पर न तो देख सकते हैं और ना ही मह्सूस कर सकते हैं . पुराने बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पर बसा और वर्तमान में श्री बद्रीनाथ यात्रा मार्ग का प्रमुख पडाव पीपलकोटी एक ऐतिहासिक क़स्बा है. पुरातन समय में जब सड़क मार्ग नहीं था तब पैदल यात्रा मार्ग  जो चमोली. मठ, छिनका, बांवला, सियासैण,  हाट से अलकनन्दा को पार कर मंगरी गाड़ के बाद मुल्ला बाजार/शिवालय दुर्गा मंदिर से पीपलकोटी बस स्टेशन पर पहुंचता है, यही शिवालय से वर्तमान के प्रमुख बस अड्डे के बीच बसा ये ही पुराना पीपलकोटी क़स्बा है इसके बीच से ही पुरा...
गज्जू-मलारी वीडियो एल्बम का लोकार्पण

गज्जू-मलारी वीडियो एल्बम का लोकार्पण

देहरादून
विकासनगर. जौनसार-बावर की लोक संस्कृति पर आधारित जौनसारी बोली भाषा में निर्मित गज्जू-मलारी के वीडियो एल्बम का लोकार्पण जौनसार बावर भवन में किया गया. गज्जू-मलारी वीडियो एल्बम के लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए कालसी के क्षेत्रीय वन अधिकारी ज्वाला प्रसाद ने कहा कि जौनसार—बावर, जौनपुर—रवांई की संस्कृति आपसी प्रेम और सौहार्द की संस्कृति है. इस क्षेत्र का खानपान, रीति रिवाज, परंपरा व रहन-सहन अद्भुत है. इसलिए यहां पर जो गीत बनाए जा रहे हैं उन्हें लोग खूब पसंद करते हैं.कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी भारत चौहान ने कहा कि जौनसार बावर की लोक संस्कृति केवल गीत और नृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के लोगों के अंदर सहकारिता की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है, आपसी सहयोग से सभी समुदाय को साथ लेकर चलना यह भी एक संस्कृति का अंग है. उ...
35 साल पहले बंटे दो परिवार हुए एक, गांव में जश्न का माहौल

35 साल पहले बंटे दो परिवार हुए एक, गांव में जश्न का माहौल

देहरादून
जौनसार-बावर के बिजनू गांव के इस परिवार का 1990 में हुआ था बटवारा और 2025 में हुए एक  भारत चौहान ऐसे समय में जब परिवार विखंडित हो रहे हैं लोग एकाकी परिवारों में रहना पसंद कर रहे हैं तब जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में एक ऐसा उदाहरण सामने आया है इस परिवार का 1990 में बटवारा हो गया था वह 2025 में एक हो गया. यह वास्तविकता है जौनसार बावर के खत ऊपरली अठगाव ग्राम बिजनू की. बिजनू गांव में कुल 25 परिवार निवास करते हैं जिसमें‌ तिरनोऊ परिवार के तीन भाई अतर सिंह, सूरत सिंह और किशन सिंह सामूहिक रूप से रहते थे, तीनों ही सगे भाई है. सन 1990 में परिवार में कुछ विवाद हुआ और परिवार‌ का दो हिस्सों में बटवारा हो गया. जिसमें अतर सिंह और किशन सिंह एक तरफ हो गए और बीच वाले भाई सूरत सिंह अपने तीन बेटियों और दो बेटों पत्नी सहित अलग हो गए. समस्त गांववासियों ने पंडित को बुलाकर नियमानुसार परिवार और खेती-बाड़ी का...