Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
पुस्तक ‘रवाँई क्षेत्र के देवालय एवं देवगाथाएं’ लोकार्पित

पुस्तक ‘रवाँई क्षेत्र के देवालय एवं देवगाथाएं’ लोकार्पित

साहित्यिक-हलचल
पुस्तक लोकार्पणहिमांतर ब्‍यूरो, उत्तरकाशीसामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा) के तत्वाधान में देवभूमि उत्तराखण्ड के पश्चिमोत्तर रवाँई क्षेत्र में होने वाले प्रमुख लोकोत्सव देवलांग because के अवसर पर ‘देवडोखरी’ (बनाल) में because अवस्थित रा.उ.मा.विद्यालय के सभागार में दिनेश रावत की पुस्तक ‘रवाँई के देवालय एवं देवगाथाएँ’ का  लोकार्पण उत्‍तरकाशी जनपद के मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद प्रसाद सिमल्टी, साहित्यकार महाबीर रवांल्टा, पं. महीशरण सेमवाल, सुखदेव रावत, पं. शांति प्रसाद सेमवाल, पूर्व ब्लाक प्रमुख रचना बहुगुणा, पूर्व जिला पंचायत because सदस्य नानई चंदी पोखरियाल, इ. चन्द्र लाल भारती एवं समिति के शशि मोहन रावत की उपस्थिति में किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया.सामाजिक कार्यक्रम के दौरान सुखदेव रावत ने because उपस्थितजनों का स्वागत संबोधन किया तो b...
सौ साल के इस टूटते हुए ‘दुर्गाभवन’ की स्मृतियां

सौ साल के इस टूटते हुए ‘दुर्गाभवन’ की स्मृतियां

संस्मरण
हर परिवर्तन के साक्षी बने हुए हैं हिमाच्छादित हिमालय शिव स्वरूपनीलम पांडेय ‘नील’काफी समय बाद बस से यात्रा की. because यात्रा देहरादून से रानीखेत की थी. मैदान से पहाड़ों की बसों में बजाए जाने  वाले गीत कुछ इस प्रकार होते हैं, एक उदाहरण के तौर पर जैसे देहरादून से हरिद्वार तक देशी छैल छबीले गीत, हरिद्वार से नजीबाबाद तक निरपट धार्मिक गीत, नजीबाबाद से हल्द्वानी तक 80 के दशक के रोमांटिक गीत और हल्द्वानी से रानीखेत तक सिर्फ पहाड़ी गीत. पूरी रात, मैं इन गीतों से लगभग ऊब चुकी थी because और अब पूरी रात की यात्रा के बाद बस पहुंचने वाली ही थी.पूरी रातबहुत पहले यहां रात्रि को because चौकीदार घुमा करता था. ‘जागते रहो-जागते रहो’ की आवाज सुनाई देती थी, लेकिन शायद अब ऐसा कुछ नहीं है.  मुझे लगा साढ़े पांच बजे के बाद शायद कुछ लोग सुबह की सैर पर निकलते तो होंगे, लेकिन  कोई प्राणी सड़क पर दिख...
राजनीति के अखाड़े में खेती के दांव पेंच  

राजनीति के अखाड़े में खेती के दांव पेंच  

समसामयिक
प्रो. गिरीश्वर मिश्रकिसान आंदोलन को एक  पखवाड़ा बीत चुका  है और गतिरोध ऐसा कि जमी बर्फ पिघलने का नाम ही नहीँ ले रही है. आज खेती किसानी के सवालों को ले कर राजधानी दिल्ली को चारों because ओर से घेर कर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चल कर आए हजारों किसानों का केन्द्रीय सरकार के कानूनों के खिलाफ धरना-आन्दोलन  बदस्तूर जारी है. सरकारी पक्ष के साथ पांच छह दौर की औपचारिक बातचीत में so कृषि से जुडे तीन बिलों के विभिन्न पहलुओं पर घंटों विस्तृत  चर्चा हुई पर अभी तक कोई हल नहीं निकला और दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोई बात नहीं बन पाई है. बीच में आन्दोलन के समर्थन के लिए ‘भारत बंद’ का भी आयोजन हुआ जिसका देश में मिला-जुला असर रहा. अब आन्दोलन को और तेज करने और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है .केन्द्रीय सरकारकिसानों के मन  में कृषि के कार्पोरेट हाथों में दिये जाने की शंका बनी ...
केतली मे धुरचुक

केतली मे धुरचुक

ट्रैवलॉग
मंजू दिल से… भाग-8मंजू कालायूँ तो पालम पुर, हिमाचल की सुरम्य उपत्यकाओं में बसा हुआ एक छोटा सा पर्वतीय स्थल है. हिमाचल की इस छोटी सी सैरगाह को “धौलाधार” के साये में पली कांगड़ा घाटी के so नाम से भी जाना जाता है. समुद्र तल से 1205 मीटर की ऊँचाई पर स्थित because पालमपुर सर्दी हो या गर्मी, हर मौसम में सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है. कहा जाता है कि पालमपुर की उत्पत्ति स्थानीय बोली के “पुलम” शब्द से हुई थी. जिसका अर्थ पर्याप्त जल होता है. जानिए गा के यहाँ जल की कोई कमी नहीं है… हर तरफ पानी के चश्मे, सोते और झरने मौजूद हैं! शायद इसीलिए यहाँ की because हवाओं में शीतलता के साथ नमीं भी है. यही एक विशिष्टता है जो कि चाय की खेती के लिए पूरी तरह से मुफीद है. शीतलता पालमपुर की इसी विशिष्टता को भांपकर 1849 में because डॉ. जमसन ने यहाँ पहली बार चाय की खेती की थी... जो कि कालांतर में वैश...
टिहरी में कांग्रेस को बड़ा झटका

टिहरी में कांग्रेस को बड़ा झटका

समसामयिक
जिला पंचायत सदस्य व जिला नियोजन समिति टिहरी के सदस्य अमेन्द्र बिष्ट ने पहनी 'आप' की टोपीइन्‍द्र सिंह नेगी, देहरादून  टिहरी में कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष, so जनपद में कांग्रेस का सक्रिय युवा, जानकार, संवेदनशील व लगभग सभी वर्गो में समान रूप से लोक प्रिय चेहरा जिला पंचायत सदस्य व जिला नियोजन समिति टिहरी के सदस्य अमेन्द्र बिष्ट ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया की but उपस्थिति में कांग्रेस को अलविदा कह विधिवत् आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर टोपी पहन ली है. अमेन्द्र बिष्ट के इस दाव से कयास लगाया जा सकता है कि वे विधानसभा चुनाव- 2022 में धनोल्टी विधानसभा से प्रत्याशी होगें. विधानसभाअमेन्द्र पिछले कुछ समय से because गोपनीय ढंग से अपनी टीम की राय लेने में व्यस्त थे, भाजपा में पहले से ही नेताओं की लम्बी फेहरिस्त है जहां उनके लिए कोई सम्भावना नजर नहीं आ रही ...
दुनिया में पहली बार हुई वायु प्रदूषण से किसी की मौत!

दुनिया में पहली बार हुई वायु प्रदूषण से किसी की मौत!

समसामयिक
मौत के सात साल बाद कोर्ट ने भी आख़िर माना कि वायु प्रदूषण ने ही ली थी बच्ची की जान!निशांतदुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है कि तमाम सबूतों और गवाहों के बयानात के मद्देनज़र किसी कोर्ट ने वायु प्रदूषण को किसी इन्सान की मौत का ज़िम्मेदार घोषित किया है. प्रदूषण मामला ब्रिटेन का है जहां 9 साल की एला because दुनिया की पहली इंसान है जिसके मृत्यु प्रमाण पत्र पर वायु प्रदूषण को उसकी मौत के कारणों में दर्ज किया गया है. इससे यह सवाल मजबूती से खड़ा हो गया है कि क्या इस बच्ची की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई? यह मामला स्वास्थ्य, स्वच्छ हवा और जीवन जीने के उस अधिकार के बीच संबंधों की तरफ भी ध्यान खींचता है, जिसकी ब्रिटेन तथा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून दोनों में ही because गारंटी दी गई है. साथ ही यह मामला स्पष्ट करता है कि एला दुनिया के विभिन्न शहरों और ग्रामीण एलाकों में विकसित तथा विकासशील द...
हिमनदियों-गिरिस्रोतों का उद्गम स्थल उत्तराखंड झेल रहा है भीषण जल संकट

हिमनदियों-गिरिस्रोतों का उद्गम स्थल उत्तराखंड झेल रहा है भीषण जल संकट

जल-विज्ञान
भारत की जल संस्कृति-30डॉ. मोहन चंद तिवारीउत्तराखण्ड में जल-प्रबन्धन-1 अत्यंत चिंता का विषय है कि विभिन्न नदियों because का उद्गम स्थल उत्तराखंड पीने के पानी के संकट से सालों से जूझ रहा है. गर्मियों के सीजन में हर साल पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को भीषण जल संकट से गुजरना पड़ता है किन्तु उत्तराखंड राज्य का जल प्रबंधन इस समस्या के समाधान में नाकाम ही सिद्ध हुआ है. पढ़ें- भारत के विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत जल संचयन प्रणालियां पिछले वर्ष 9 जुलाई 2018 को जारी की गई भारत but सरकार की नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश इस समय इतिहास में जल संकट के सबसे भयावह दौर से गुजर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार करीब 60 करोड़ लोग जबरदस्त जल संकट से जूझ रहे हैं, जबकि हर साल दो लाख लोग साफ पीने का पानी न मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं.रिपोर्ट के अनुसार भारत में 70 प्रतिशत पानी दूषित है और पेयजल स्वच्...
योगी आदित्यनाथ फिर नंबर वन…

योगी आदित्यनाथ फिर नंबर वन…

समसामयिक
‘शिखर पर उत्तराखंडी टॉप-50’ वार्षिक रैंकिंग जारीहिमांतर ब्‍यूरो, देहरादूनउत्तराखंड के बेटे-बेटियां किस तरह देश के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग पदों पर रहते हुए महती भूमिका निभा रहे हैं, यह समूचा विश्व देख रहा है. आज राजनीति और कूटनीति, रक्षा और सुरक्षा, गीत-संगीत, कला, योग पर्यावरण, साहित्य और सेवा, हर क्षेत्र में पहाड़ के सपूत सफलता के नए प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं. हिल-मेल पत्रिका ने पहाड़ के ऐसे ही सपूतों पर आधारित अपनी वार्षिक ‘शिखर पर उत्तराखंडी टॉप-50’ रैंकिंग जारी कर दी है. उत्तराखंडीयह सिलसिला देश की राजनीति के फलक पर तेजी से चमक बिखेर रहे यूपी के मुख्यमंत्री और पौड़ी के बेटे योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ बनाए गए जनरल बिपिन रावत, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल नि...
गिरगिट की तरह रंग बदलने पर मज़बूर हो रही थी मैं!

गिरगिट की तरह रंग बदलने पर मज़बूर हो रही थी मैं!

संस्मरण
जवाबदेही की अविस्मरणीय यात्रा – अंतिम किस्‍तसुनीता भट्ट पैन्यूलीवक़्त की हवा ही कुछ इस तरह से बह रही है because कि किसी अपरिचित पर हम तब तक विश्वास नहीं करते जब तक कि हम आश्वस्त नहीं हो जायें कि फलां व्यक्ति को हमसे बदले में कुछ नहीं चाहिए वह नि:स्वार्थ हमारी मदद कर रहा है. सत्य अमूमन ऐसा होता नहीं है कि किसी प्रोफेसर because के घर जाने की नौबत आये, कालेज के सभी कार्य और प्रयोजन कालेज में ही संपन्न कराये जाते हैं. छात्र और छात्राओं को प्रोफेसर के घर से क्या लेना-देना? ख़ैर अत्यंत असमंजस में थी मैं असाइनमेंट जमा करवाने को लेकर. यदि दीदी साथ न होती तो मेरी इतनी हिम्मत because नहीं थी कि सब कुछ ताक पर रखकर अकेले ही चली जाती प्रोफेसर के पास असाइनमेंट जमा करवाने. सत्यकिंतु यहां पर इस परिदृश्य में मेरी because स्थिती अलहदा है स्वयं को मैंने जज़्ब किया है कि मुझे फाईनल परीक्षा ...
बुझ गई पहाड़ पर लालटेन…

बुझ गई पहाड़ पर लालटेन…

स्मृति-शेष
अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि : प्रसिद्ध कवि और लेखक मंगलेश डबराल का निधन  चारु तिवारीबहुत विचलित करने वाली खबर आ रही है. हमारे अग्रज, प्रिय कवि, जनसरोकारों के लिये प्रतिबद्ध मंगलेश डबराल जी जिंदगी की जंग हार गये हैं. पिछले दिनों वे बीमार हुये तो लगातार हालत बिगड़ती गई. बीच में थोड़ा उम्मीद बढ़ी थी लेकिन आज ऐसी खबर मिली जिसे हम सुनना नहीं चाहते. उनका निधन हम सबके लिये आघात है. मंगलेश डबराल जी को विनम्र श्रद्धांजलि.बीमार यह 1998 की बात है. वे मुझे अचानक भरी बस में मिल गये. नोएडा से दिल्ली आते वक्त. उन दिनों शाहदरा से नोएडा के लिये एक बस लगती थी. इसे शायद एक नंबर बस कहते थे. यह हमेशा खचाखच भरी रहती थी. पांव रखने की जगह नहीं होती. शाम के समय तो बिल्कुल नहीं. मैं जहां से बस लगती थी, वहीं से बैठ गया था. दो-तीन स्टॉप के बाद वो भी बस में चढ़े. मेरी सीट के बगल में लोगों से पिसकर खड़े हो गय...