समसामयिक

दुनिया में पहली बार हुई वायु प्रदूषण से किसी की मौत!

दुनिया में पहली बार हुई वायु प्रदूषण से किसी की मौत!

मौत के सात साल बाद कोर्ट ने भी आख़िर माना कि वायु प्रदूषण ने ही ली थी बच्ची की जान!

  • निशांत

दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है कि तमाम सबूतों और गवाहों के बयानात के मद्देनज़र किसी कोर्ट ने वायु प्रदूषण को किसी इन्सान की मौत का ज़िम्मेदार घोषित किया है.

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मामला ब्रिटेन का है जहां 9 साल की एला because दुनिया की पहली इंसान है जिसके मृत्यु प्रमाण पत्र पर वायु प्रदूषण को उसकी मौत के कारणों में दर्ज किया गया है. इससे यह सवाल मजबूती से खड़ा हो गया है कि क्या इस बच्ची की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई? यह मामला स्वास्थ्य, स्वच्छ हवा और जीवन जीने के उस अधिकार के बीच संबंधों की तरफ भी ध्यान खींचता है, जिसकी ब्रिटेन तथा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून दोनों में ही because गारंटी दी गई है. साथ ही यह मामला स्पष्ट करता है कि एला दुनिया के विभिन्न शहरों और ग्रामीण एलाकों में विकसित तथा विकासशील देशों में जहरीली हवा का दंश झेल रहे करोड़ों बच्चों की ही तरह है.

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सभी फोटो गूगल से साभार

ब्रिटेन की एक अदालत ने इतिहास रचा है. because उसने अपनी टिप्पणी में कहा है कि लंदन की एक अति व्यस्त सड़क के पास स्थित अपने मकान में अपनी मां के साथ रहने वाली 9 साल की एला किस्सी डेब्रा की मौत के कारणों में वायु प्रदूषण भी शामिल है. एला ब्रिटेन की और संभवत दुनिया की ऐसी पहली इंसान है, जिसकी मौत के कारणों में वायु प्रदूषण को भी शामिल किया गया है.

कोरोनर ने पाया है कि एला की मौत से 3 साल because पहले की अवधि में उसके घर के आसपास वायु प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ के पैमानों तथा यूरोपीय संघ द्वारा निर्धारित  सीमाओं को पार कर गया था, जो एला की मौत का एक कारण बना. कोरोनर ने कहा कि एला के वायु प्रदूषण की चपेट में आने की मुख्य वजह वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण था.

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एला की मौत के मामले में हुए because कानूनी परीक्षण के नतीजे साफ हवा में सांस लेने के अधिकार के लिए भविष्य में लड़ी जाने वाली लड़ाइयों के लिहाज से एक मिसाल पेश करेंगे. मानवाधिकार के साथ-साथ स्वास्थ्य सम्‍बन्‍धी परिपेक्ष्‍य में भी दुनिया भर की सरकारें  का यह कर्तव्य है कि वे ऐसी नीतियां और वायु गुणवत्ता प्रबंधन संबंधी योजनाएं लागू करें…

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कोरोनर का कहना है कि एनओ2 के स्तर में because कमी लाने में विफलता जाहिर है. संभव है कि यह भी एला की मौत की  एक वजह बनी हो. उसने यह भी माना है कि एला की मां को पूरी सूचना नहीं दिया जाना भी उसकी मौत का एक सबब हो सकता है.

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इस बारे में पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ because इंडिया में सेंटर फॉर एनवायरमेंटल हेल्थ की उपनिदेशक डॉक्‍टर पूर्णिमा प्रभाकरण ने कहा “एला की मौत के मामले में हुए कानूनी परीक्षण के नतीजे साफ हवा में सांस लेने के अधिकार के लिए भविष्य में लड़ी जाने वाली लड़ाइयों के लिहाज से एक मिसाल पेश करेंगे. मानवाधिकार के साथ-साथ स्वास्थ्य सम्‍बन्‍धी परिपेक्ष्‍य में भी दुनिया भर की सरकारें  का यह कर्तव्य है कि because वे ऐसी नीतियां और वायु गुणवत्ता प्रबंधन संबंधी योजनाएं लागू करें, जिनसे नागरिकों खासतौर पर  एला जैसे  बच्चों और युवा पीढ़ी  की सेहत  को बचाया जा सके. वायु की खराब गुणवत्ता बच्चों की जिंदगी के  हर चरण को बुरी तरह प्रभावित  करती है, लिहाजा भावी पीढ़ी की उसके पूरे जीवन भर सुरक्षा किया जाना बेहद महत्वपूर्ण है.”

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इंस्‍टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी इन इंडिया because के अध्यक्ष और लंग केयर फाउंडेशन के संस्‍थापक ट्रस्टी डॉक्‍टर अरविंद कुमार ने कहा “किसी भी बच्चे को एला की तरह सांस लेने के लिए संघर्ष करते हुए नहीं मरना चाहिए. किसी माता पिता पर उस तरह की फिक्र का बोझ नहीं पड़ना चाहिए जैसा कि रोजामंड पर पड़ा. रोजामंड ने हर पल यह महसूस किया कि क्या उनकी बच्ची सांस ले पाएगी और क्या उन्हें उसे हर बार लेकर अस्पताल because दौड़ना पड़ेगा. ब्रिटेन के कोरोनर ने वायु प्रदूषण को एला की मौत के एक कारण के तौर पर जाहिर करके भारत समेत दुनिया भर की सरकारों को यह जता दिया है कि जिंदगी जीने और साफ हवा में सांस लेने तथा स्वास्थ्य परक पर्यावरण में जीवन जीने के अधिकार की अदायगी सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है. सरकारों को आगे आते हुए अपनी युवा पीढ़ी को उस मुसीबत से बचाना चाहिए जिसका एला ने सामना किया.”

अब एला के मृत्यु प्रमाण पत्र में because लिखा जाएगा कि उसकी मौत निम्नलिखित कारणों से हुई: 1a) श्वसन प्रणाली का नाकाम होना, 1b) गंभीर दमा, 1c) वायु प्रदूषण

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“यह तस्वीर बेहद चमकदार भूरी because आंखों वाली बच्ची की है. उसके चेहरे पर दिख रही मुस्कान इस तस्वीर से कहीं ज्यादा बड़ी लगती है. मैंने एला के बारे में जो कुछ भी पढ़ा उससे उसका दृढ़ निश्चय साफ जाहिर होता है. हमें यहां तक लाने के लिए आपका (रोजामंड) धन्यवाद देने को हमारे पास अनेक कारण मौजूद हैं.”

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कोरोनर ने एला की एक तस्वीर का जिक्र because किया जो उसकी 9 वीं सालगिरह से थोड़े ही समय पहले ली गई थी. इसे अदालती कार्यवाही के दौरान कोरोनर न्यायालय में रखा गया था. इस दौरान कहा गया “यह तस्वीर बेहद चमकदार भूरी आंखों वाली बच्ची की है. उसके चेहरे पर because दिख रही मुस्कान इस तस्वीर से कहीं ज्यादा बड़ी लगती है. मैंने एला के बारे में जो कुछ भी पढ़ा उससे उसका दृढ़ निश्चय साफ जाहिर होता है. हमें यहां तक लाने के लिए आपका (रोजामंड) धन्यवाद देने को हमारे पास अनेक कारण मौजूद हैं.”

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एला की मां रोजामंड ने अदालती because कार्यवाही के दौरान यह प्रमाण दिया और कहा कि उनकी बेटी गंभीर दमे और दौरों की चपेट में आने के बाद करीब 28 बार अस्पताल ले जाई गई. फरवरी 2013 में एला की मौत से कुछ घंटे पहले परिवार ने वैलेंटाइंस डे  की शाम को because एक साथ खाना खाया था. उसके बाद उन्होंने एला के साथ कुछ वक्त गुजारा था. उन्होंने कहा “मैंने उसे उस दिन बीथोवेन के प्रेम पत्र पढ़कर सुनाए थे. वे आखरी दस्तावेज थे जो मैंने उसके लिए पढ़े.”

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एला की मां रोजामंड एडू किस्‍सी डेब्रा because ने कहा “यह एक लैंड मार्क केस है. सात साल की जद्दोजहद के बाद एला के मृत्यु प्रमाण पत्र में वायु प्रदूषण को उसकी मृत्यु के एक कारण के तौर पर दर्ज किया गया है. उम्मीद है कि इससे अनेक अन्य बच्चों की जिंदगी बच सकेगी. because उन सभी का धन्यवाद जिन्होंने हमारा साथ दिया.”

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कुछ घंटों के बाद एला उठी because और उसे अपने अस्थमा पंप की जरूरत महसूस की. जागने पर उसे फिर से सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई, जिसके बाद उसकी मां ने एंबुलेंस बुलाई और उसे लेवीशाम हॉस्पिटल ले गई जहां उसकी हालत और खराब होती गई. because उसकी मां ने कहा “मैंने कंसल्टेंट से बहुत मिन्नतें की. मैं जानती थी कि हम मुश्किल में हैं.” मगर वे उनकी बेटी को नहीं बचा सके. रोजामंड ने अदालती सुनवाई के दौरान कहा “इस बार नहीं. एला को 15 फरवरी तडके 3:27 पर मृत घोषित कर दिया गया.”

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दुनिया में 15 साल से कम because उम्र के 93% बच्चे खराब हवा में सांस लेने को मजबूर हैं और शोधकर्ताओं ने पाया है कि वायु प्रदूषण मां के प्लेसेंटा में दाखिल हो सकता है और वह गर्भाशय में भ्रूण तक पहुंच बनाने की क्षमता भी रखता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक वर्ष 2016 में 600000 बच्चों की मौत खराब हवा के कारण उत्पन्न एक्यूट लोअर रेस्पिरेट्री संक्रमण की वजह से हुई. इस वक्त आधी दुनिया के because पास सेहत के इस खतरे के समाधान के लिए जरूरी आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. वहीं, जिन देशों में वायु प्रदूषण संबंधी कानून बने हुए हैं वहां इनका लगातार उल्लंघन हो रहा है.

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“एला की मौत दमे के because गंभीर दौरे की वजह से श्वसन प्रणाली नाकाम हो जाने के कारण हुई.” कई सालों के अभियान के बाद दिसंबर 2019 में एला के परिवार की लीगल टीम वायु प्रदूषण के स्तरों को लेकर  सामने आए नए सबूतों  के आधार पर  इस मामले को दोबारा खोलने  के सिलसिले में हाई कोर्ट में अपनी याचिका दाखिल करने में कामयाब रही.

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इससे पहले गवर्नर अर्नाल्ड श्वाजनेगर because ने रोजामंड के प्रति समर्थन जाहिर किया था और परिवार ने उन्हें ‘नायक’ का खिताब दिया था.

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गौरतलब है कि एला किस्‍सी डेब्रा की because मौत 3 साल तक पड़े दौरों और सांस की समस्या को लेकर 27 बार अस्पताल जाने के बाद फरवरी 2013 में हुई. वर्ष 2014 में इस मामले में अदालती कार्रवाई शुरू हुई जिसका केंद्र एला की चिकित्सीय देखभाल पर था. अदालत ने कहा “एला की मौत दमे के गंभीर दौरे की वजह से श्वसन प्रणाली नाकाम हो जाने के कारण हुई.” कई सालों के अभियान के बाद दिसंबर 2019 में एला के because परिवार की लीगल टीम वायु प्रदूषण के स्तरों को लेकर  सामने आए नए सबूतों  के आधार पर  इस मामले को दोबारा खोलने  के सिलसिले में हाई कोर्ट में अपनी याचिका दाखिल करने में कामयाब रही.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन में पर्यावरण जलवायु परिवर्तन तथा स्वास्थ्य शाखा की निदेशक डॉक्टर मारिया नीरा ने कहा “रोजामंड ने अपनी बेटी को गौरवान्वित किया है और पूरी दुनिया के सामने मिसाल पेश की है कि वायु प्रदूषण एला की मौत का वास्तविक अपराधी है. उनकी बहादुरी भरी मुहिम एक खूबसूरत इंसानी चेहरे को उस विध्वंस की तरफ ले गयी है, वायु प्रदूषण के कारण जिसका खतरा पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों की जिंदगी पर मंडरा रहा है. किसी भी शहर का मेयर या सरकार का कोई मंत्री यह नहीं कह सकता कि वह इस खतरे के बारे में नहीं जानता. हम सभी को अपने बच्चों और खुद अपने वास्ते साफ हवा के लिए संघर्ष करने की जरूरत है.”

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विश्व स्वास्थ्य संगठन because का कहना है कि वायुमंडलीय वायु प्रदूषण के कारण पूरी दुनिया में 4200000 लोगों की मौत होती है. वही खराब चूल्‍हों और ईंधन के इस्तेमाल की वजह से घरों में फैलने वाले प्रदूषण की जद में आकर 38 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है. because दुनिया की 91% आबादी ऐसे एलाकों में रहती है, जहां डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित पैमानों से कहीं ज्यादा वायु प्रदूषण है.

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हाईकोर्ट में हुई अदालती कार्यवाही 30 नवंबर because को शुरू हुई और 10 दिनों तक चली. इस दौरान इस बात पर गौर किया गया कि एला की मौत में वायु प्रदूषण कोई कारण है या फिर उसने इसमें योगदान किया. साथ ही उस वक्त वायु प्रदूषण के स्तर को कैसे मापा गया. so अदालती कार्यवाही के दौरान सामने आए मुद्दों में यह भी शामिल था कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कौन से कदम उठाए गए और जनता को प्रदूषण के स्तरों, उनके कारण उत्पन्न होने वाले खतरों तथा वायु प्रदूषण के संपर्क में  कमी लाने के उपायों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई या नहीं.

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एला की मां रोजामंड स्वच्छ वायु संबंधी मुहिम because की एक अहम आवाज बन गई हैं. उन्होंने एक फाउंडेशन but (द एला रॉबर्टा फैमिली फाउंडेशन) बनाया है. इसका उद्देश्य दमे से जूझ रहे बच्चों की जिंदगी को बनाना और सेहत तथा वायु की गुणवत्ता के सिलसिले में विश्व स्वास्थ्य संगठन  का पैरोकार बनना है. because अनेक सरकारी विभाग  तथा लंदन के मेयर इस मामले में दिलचस्पी रखने वालों के तौर पर चिह्नित किए गए हैं.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि because वायुमंडलीय वायु प्रदूषण के कारण पूरी दुनिया में 4200000 लोगों की मौत होती है. वही खराब चूल्‍हों और ईंधन के इस्तेमाल की वजह से घरों में फैलने वाले प्रदूषण की जद में आकर 38 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है. दुनिया की 91% आबादी ऐसे एलाकों में रहती है, जहां डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित पैमानों से कहीं ज्यादा वायु प्रदूषण है.

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मानव अधिकार तथा पर्यावरण को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डेविड आर बॉयड ने कहा “कोरोनर का निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानूनों में पहले से ही निहित बातों की पुष्टि करता है. but जीवन जीने के हमारे अधिकार, खासकर सबसे कम उम्र और एला ऐसे  सर्वाधिक जोखिम  वाले  नागरिकों के स्वास्थ्य और सेहतमंद पर्यावरण की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है. इसके बावजूद दुनिया के 10 में से 9 बच्चे अभी घर because के अंदर और उसके बाहर जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं because और उनमें से हर साल 600000 की मौत हो जाती है, क्योंकि उनकी सरकारें साफ हवा जैसे मूलभूत मौलिक अधिकार प्रदान करने में नाकाम साबित हुई हैं. इस बात की पहचान करना कि एला की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई है, because अनेक बच्चे और भावी पीढ़ियां मौत से बचाई जा सकेंगी क्योंकि इससे सरकारों पर इस खामोश महामारी से निपटने का दबाव बनेगा.”

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बांग्लादेश एनवायरमेंटल लॉयर्स because एसोसिएशन की मुख्य अधिशासी और उच्चतम न्यायालय की वकील सैयदा रिजवाना हसन ने कहा “एला की मौत हमें यह याद दिलाती है कि साफ हवा हमारी सेहत की बुनियाद है और हम साफ हवा की गारंटी दिए बगैर एक स्वस्थ समाज का निर्माण नहीं कर सकते. एला के मामले में हुई अदालती कार्यवाही से ऐसे करोड़ों बच्चों की जिंदगी बचाने में मदद मिलेगी जो एला की ही तरह because गंदी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं. साथ ही इससे सच्चे मायनों में एक ऐसे समाज का उभार होगा जिसमें सरकारें अपने हर नागरिक को जीवन जीने और साफ हवा का अधिकार दिलाने की गारंटी देंगी.”

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(लेखक लखनऊ में निवासरत हैं एवं पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों में रुचि और इन विषयों को हिन्दी पत्रकारिता के पटल पर प्रासंगिक बनाने के इरादे से इससे जुड़ी जानकारियां लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं.)

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