
हीरासिंह राणा की गायकी में बसी है पहाड़ से पलायन की टीस
प्रथम पुण्यतिथि (13जून) पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारी"त्यर पहाड़, म्यर पहाड़ हौय दुःखों को ड्यौर पहाड़"- जैसे गीतों द्वारा पहाड़ के पलायन की टीस को जन जन तक बांटने वाले लोक गायक हीरा सिंह राणा जी की आज 13जून को प्रथम पुण्यतिथि है. "लस्का कमर बांध, हिम्मत का साथ फिर भोल उज्याई होलि,कां ले रोलि रात" -जैसे अपने ऊर्जा भरे बोलों से पहाड़ के लोगों को because कमर कस के हिम्मत जुटाने का साहस बटोरने और रात के अंधेरे को भगाकर उजाले की ओर जाने की प्रेरणा देने वाले उत्तराखंड लोक गायिकी के पितामह, लोक-संगीत के पुरोधा तथा गढ़वाली कुमाऊंनी और जौनसारी अकादमी,दिल्ली सरकार के उपाध्यक्ष श्री हीरा सिंह राणा जी का पिछले वर्ष 2020 को आज के ही दिन महाप्रयाण हुआ था.नेता जी
लोक गायकी की पहचान बने राणा because जी का अचानक चला जाना उत्तराखण्डी समाज के लिए बहुत दुःखद था और पर्वतीय लोक संगीत के लिए अपूरणीय क्...









