Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
वसन्त पंचमी : सारस्वत सभ्यता, समाराधना और साधना का पर्व

वसन्त पंचमी : सारस्वत सभ्यता, समाराधना और साधना का पर्व

लोक पर्व-त्योहार
वसन्त पंचमी पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीआज वसंत पंचमी का दिन सारस्वत समाराधना का पावन दिन है.वसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है. सरस्वती देवी का आविर्भाव दिवस होने के कारण यह because दिन श्री पंचमी अथवा वागीश्वरी जयंती के रूप में भी प्रसिद्ध है. प्राचीन काल में वैदिक अध्ययन का सत्र श्रावणी पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर इसी तिथि को समाप्त होता था तथा पुनः नए शिक्षासत्र का प्रारम्भ भी इसी तिथि से होता था. इसलिए वसन्त पंचमी को सारस्वत साधना का पर्व माना जाता है. इस दिन सरस्वती के समुपासक और समस्त शिक्षण संस्थाएं नृत्य संगीत का विशेष आयोजन करते हुए विद्या की अधिष्ठात्री देवी की पूजा अर्चना करती हैं.पावन ऋतु भारतीय परम्परा में देवी सरस्वती ज्ञान विज्ञान की अधिष्ठात्री देवी ही नहीं बल्कि 'भारतराष्ट्र' को पहचान देने वाली देवी भी है. ऋग्वेद के अनुसार वंसत प...
हिमालयी सरोकारों को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका ‘हिमांतर’ का लोकार्पण

हिमालयी सरोकारों को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका ‘हिमांतर’ का लोकार्पण

साहित्यिक-हलचल
सी एम पपनैं, नई दिल्लीउत्तराखंड सदन चाणक्यपुरी में 14 फरवरी को ‘टीम हिमांतर’ द्वारा अनौपचारिक कार्यक्रम के तहत, हिमालयी सरोकारों को समर्पित त्रिमासिक पत्रिका ‘हिमांतर’ का लोकार्पण because एवं परिचर्चा का आयोजन, उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, रमेश चन्द्र घिन्डियाल की अध्यक्षता व उत्तराखंड के प्रबुद्ध पत्रकारों, साहित्यकारों, समाजसेवियों व विभिन्न व्यवसायों से जुड़े  प्रबुद्धजनो के सानिध्य मे सम्पन्न हुआ.उत्तराखंड लोकार्पण कार्यक्रम शुभारंभ से because पूर्व विगत दिनों व महीनों मे उत्तराखंड तपोवन त्रासदी व कोरोना संक्रमण मे जान गवा चुके उत्तराखंड के जनसरोकारों से निरंतर जुडे़ प्रबुद्धजनो को दो मिनट का मौन रख कर, भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.उत्तराखंड ‘हिमांतर’ पत्रिका कार्यकारी संपादक because डा. प्रकाश उप्रेती व पत्रिका टीम सदस्य शशि मोहन रवांल्टा द्वारा पत्रिका के प्र...
नशे के खिलाफ ‘जय हो’ का हस्ताक्षर अभियान

नशे के खिलाफ ‘जय हो’ का हस्ताक्षर अभियान

साहित्‍य-संस्कृति
नशे के खिलाफ नगरवासियों को जागरूक कर उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापनहिमांतर ब्यूरो, बड़कोटनगर पालिका परिषद सहित आसपास के क्षेत्रों में नशे का करोबार बहुत फलफूल रहा है. सामाजिक चेतना की बुलन्द आवाज 'जय हो' ग्रुप, नगर व्यापार मण्डल सहित नगर केbecause प्रबुद्वजनों ने नशे के खिलाप हस्ताक्ष अभियान चलाकर थाना प्रभारी निरीक्षक और उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए नशे से जूड़े लोगों व माफियाओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की मांग की. इधर 'जय हो' ग्रुप ने जिलाधिकारी because और पुलिस अधीक्षक को भी 501 लोगों के हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन भेजकर नशे से बड़कोट को मुक्त करने की अपील की. हस्ताक्षर नगर पालिका परिषद सहित आसपास के क्षेत्रों में नशीले पदार्थों का बड़ा गोरख धंधा चल रहा है, जिसमें भारी मात्रा में बड़कोट व आसपास के क्षेत्रों में स्मैक, भांग आदि नशा because युवाओं को परोसा जा रहा है, इससे युवा पीड़ी...
आओ! आज वेलेंटाइन-डे पर प्रकृति प्रेम का इजहार करें

आओ! आज वेलेंटाइन-डे पर प्रकृति प्रेम का इजहार करें

साहित्‍य-संस्कृति
आज 14 फरवरी को मनाया जाने वाला वेलेंटाइन डे प्यार के इजहार का दिन है.डॉ. मोहन चंद तिवारीभारत में वैलेंटाइन-डे के मौके पर वसंत ऋतु का सुहाना मौसम चल रहा होता है. जिस प्रकार प्यार मोहब्बत की स्नेहधारा के साथ इस पावन ऋतु का स्वागत किया जाना चाहिए, so वह माहौल आज कहीं गायब है.संसद हो या सड़क चारों ओर घृणा विद्वेष की भावना से वातावरण विषाक्त बना हुआ है. कोरे विकासवाद और आर्थिक सुधारों ने खेत, किसान यहां तक कि हिमालय की गिरि कंदराओं को because भी रुला कर रख दिया है.चमोली में ग्लेशियर के टूटने से जो जल सैलाब उमड़ा है, उसने गम्भीर चेतावनी दे दी है कि आने वाले दिन प्राकृतिक प्रकोप से जूझने के भयंकर दिन होंगे. कैसे कहें हम प्रकृति के उपासक देश हैं. पावन ऋतुपर आज वेलेंटाइन डे के मौके पर हम भारतीय होने के नाते यही मंगल कामना करते हैं कि हर्ष और उल्लास से इस प्रेम दिवस का स्वागत करें, घृणा...
सतत पर्यटन विकास के लिए जुटे लोग  

सतत पर्यटन विकास के लिए जुटे लोग  

पर्यटन
हिमांतर ब्‍यूरो, उत्तरकाशीसतत पर्यटन विकास (Sustainable Tourism Development), साहसिक और सुरक्षित पर्यटन स्थल कैसा हो,  इसको लेकर मोरी में स्थानीय लोगों के द्वारा एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के स्थायी पर्यटन विकास को लेकर चर्चा की गई. पर्यटन को सुगम because और सरल बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं. बैठक में क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया. इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि क्षेत्र में पर्यटन के so लिए प्राथमिक परिवहन, स्थानीय परिवहन, आवास, मनोरंजन, खान—पान का विशेष ध्यान रखा जाएगा, साथ ही कूड़ा निस्तारण के समुचित प्रबंधन को लेकर भी विचार—विमर्श किया गया. इसके लिए सभी ने एक स्वर में यमुना घाटी में रिसाइक्लिंग प्लांट लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया. पर्यटनक्षेत्र के सभी टूर ऑपरेटर, ट्रैकिंग but एजेंसियों के द्वारा सुव्यवस्थित पर्यटन की कल्पना की गई, जिसमें फ...
पैंगोंग झील से कदम पीछे हटाने को मजबूर हुआ चीन

पैंगोंग झील से कदम पीछे हटाने को मजबूर हुआ चीन

समसामयिक
वाई एस बिष्ट, नई दिल्लीरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज राज्यसभा में पूर्वी लद्दाख के मौजूदा हालात की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पैंगोंग झील इलाके में चीन के साथ पीछे हटने को लेकर समझौता हो गया है. पिछले 8 महीने से ज्यादा समय से भारत और चीन की सेनाएं आमने सामने हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं सदन को यह भी बताना चाहता हूं कि भारत ने चीन को हमेशा यह कहा है कि द्विपक्षीय संबंध दोनों पक्षों के प्रयास से ही विकसित हो सकते हैं, साथ ही सीमा के प्रश्न को भी बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति में किसी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति का हमारे द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ता है. कई उच्च स्तरीय संयुक्त बयानों में भी यह जिक्र किया गया है कि एलएसी तथा सीमाओं पर शांति कायम रखना द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत आवश्यक है. पिछले वर्ष मैंने इस सदन क...
गावों में भाईचारे की मिसाल हैं परम्परागत घराट  

गावों में भाईचारे की मिसाल हैं परम्परागत घराट  

साहित्‍य-संस्कृति
आशिता डोभालपहाड़ की चक्की, शुद्धता और आपसी भाईचारे की मिसाल कायम करने वाली ये चक्की शायद ही अब कहीं देखने को मिलती होगी, गुजरे जमाने में जीवन जीने का यह because मुख्‍य आधार हुआ करती थी. पहाड़ में मानव सभ्यता के विकास की ये तकनीक सबसे प्राचीन है. यहां की जीवन शैली में इसे आम भाषा में घराट (Gharat) या घट्ट कहा जाता है और हिंदी में पनचक्‍की यानी पानी से चलने वाली चक्की. but ये पूर्ण रूप से हमारे चारों ओर के पर्यावरण के अनुकूल होते थे, इसका निर्माण हमारे बुजुर्गों  ने अपनी सुविधा के अनुसार किया है, जिस जगह पानी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता रही, वहीं इसका निर्माण किया, खासकर नदी या सदाबहार गाढ़ गदेरे में इसका निर्माण हुआ है. एक समय वह भी था जब हर गांव का अपना एक घराट होता हुआ करता था, चाहे वो किसी एक व्यक्तिगत परिवार so का रहा हो, पूरे गांव के लोग उसी घराट में अपना गेहूं, जौ, मक्...
गाड़ी का धुआं दुनिया में हर पांचवीं मौत का ज़िम्मेदार!

गाड़ी का धुआं दुनिया में हर पांचवीं मौत का ज़िम्मेदार!

पर्यावरण
शोध : हार्वर्ड विश्विद्यालय निशांत  आप और हम जब अपनी पेट्रोल और डीज़ल की गाड़ी में बैठ आराम से इधर से उधर जाते हैं तब हमारी गाड़ी से निकलने वाले धुआं दुनिया में होने वाली हर पांचवीं मौत का ज़िम्मेदार बन जाता है. बात भारत की करें because तो यहां जीवाश्म ईंधन के उपयोग से होने वाले PM2.5 वायु प्रदूषण के परिणामस्वरूप हर साल 14 वर्ष से अधिक आयु के 2.5 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है. यह आंकड़ा भारत में 14 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की होने वाली सालाना 8 मिलियन मौतों का  लगभग 30 फ़ीसद है. बांग्लादेश, भारत और दक्षिण कोरिया इस संदर्भ में दुनिया में सबसे खराब उदाहरण हैं.भारत ये हैरान करने वाली बातें हार्वर्ड so यूनिवर्सिटी द्वारा यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम, यूनिवर्सिटी ऑफ लीसेस्‍टर और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के सहयोग से किये गये एक ताज़ा शोध में कही गयी है. इस शोध से मिले आंकड़े पूर्व में किये गय...
आंदोलन के नाम पर अराजकता

आंदोलन के नाम पर अराजकता

कविताएं
उमेद सिंह बजेठागणतंत्र दिवस हमारा पर्व है, सभी धर्मों संप्रदायों का गर्व है.हमने ही जय जवान तथा, जय किसान का नारा दिया. फिर क्यों आज किसान ने, जवान पर तलवार से प्रहार किया.लाल किला राष्ट्रीय स्मारक है, राष्ट्र के गौरव का प्रतीक है. इसकी सुरक्षा व सम्मान प्रत्येक, भारतीय का कर्तव्य पुनीत है.आंदोलन की आड़ में तौहीन, यह कतई बर्दाश्त नहीं. तिरंगे के स्थान पर किसी, अन्य को यह मान प्राप्त नहींन भाषा मर्यादित है,  न आचरण प्रशंसनीय है. शांति व प्रेम से हल खोजो, टकराव की राह निंदनीय है.इतिहास के पन्ने पढ़कर, तुमने कुछ नहीं सीखा है. बलिदान को उनके भुला दिया, देश को जिन्होंने लहू से सींचा है.मत खेलो उन हाथों में, तोड़ना देश जो चाहते हैं. विफल करो षड्यंत्र सभी, ज्वाला नफ़रत जो फैलाते हैं.मिल बैठकर बातें कर लो, क्रोध विनाश का मूल है. वरना कुछ भी हासिल नहीं होगा, प...
पहाड़ पर बस में बैठने की ख्वाहिश…

पहाड़ पर बस में बैठने की ख्वाहिश…

साहित्‍य-संस्कृति
फकीरा सिंह चौहान ‘स्नेही’शहरों में बस के विषय में कई बार मैंने अपने पापा से सुना था, कि बस एक घर की तरह होती है. उसमें 40- 50 लोग एक साथ मिलकर बैठते हैं. उसके अंदर खिड़कियां भी होती हैं because जिससे बाहर का नजारा आसानी से देख सकते हैं. नदी के उस पार दूर पहाड़ की धार becauseपर खींची गई एक पतली-सी रेखा जिसे लोग सड़क कहते थे. सड़क पर चलने वाली मोटर मकड़ी की तरह सरकती नजर आती थी . नजर जब भी बुजुर्ग बस या मोटर की बात करते थे, मैं बड़े  उत्सुकता और ध्यान से सुनता था. मुझे नजदीक से सड़क और मोटर देखने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ था. अचानक एक दिन गांव के पंच आंगन में मीटिंग का आयोजन हुआ सभी बुजुर्गों ने उस मीटिंग में भाग लिया. मैं भी चुपके से एक दीवार की ओड लेकर आंगन के पीछे ही छुप छुप कर because मीटिंग में होने वाली बातों की चर्चा को सुनने लगा. गांव वाले सड़क के विषय में बात कर रहे थे. गां...