Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
प्रेम मात्र पा लेना तो नहीं…

प्रेम मात्र पा लेना तो नहीं…

कविताएं
सपना भट्ट कविता कई मायनों में जीवन राग भी है. व्यक्ति के जीवन का व्यक्त- अव्यक्त, दुःख-सुख, प्रेम- वियोग, संघर्ष- सफलता की ध्वनि काव्य में सुनाई देती है. भले ही ‘लेखक की मृत्यु’ की घोषणा हुए पाँच दशक गुजर गए हों लेकिन रचना को आज भी लेखक के संघर्ष और जीवन-अनुभवों से काट कर नहीं देखा जा सकता है. कविता में तो जीवनानुभव और सघन रूप में मौजूद रहते हैं. जीवन की इन्हीं सघन अनुभूतियों को व्यक्त करने वाली कवियत्री हैं- सपना भट्ट. यहाँ सपना भट्ट की पाँच कविताएँ दी जा रही हैं. इन कविताओं में प्रेम की सघन अनुभूति भी है और निश्छल मन की बैचेनी भी है- (1) सहानुभूति के लेप से आत्मा के अदृश्य घाव नहीं भरते कोरे दिलासों से मन की चिर अतृप्त तृष्णाएं तृप्ति नहीं पाती। किसी स्वप्न में किये आलिंगन की स्मृति की सुवास से देह नहीं महकती। पीठ पर हाथ भर फेर देने से रीढ़ की टीस नहीं जाती हाथ की रेखाएं बदल ल...
कुमाऊं,गढ़वाल में गणपति गणेश की मूर्तिकला का इतिहास

कुमाऊं,गढ़वाल में गणपति गणेश की मूर्तिकला का इतिहास

लोक पर्व-त्योहार
गणेश चतुर्थी पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीआज गणेश चतुर्थी है. हिंदू धर्म में भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है. गणेशजी के जन्म के बारे में अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. उस सन्दर्भ में कुमाऊं स्थित देवभूमि उत्तराखंड के पाताल भुवनेश्वर में भगवान गणेश के आदिकालीन इतिहास के सांस्कृतिक और पुरातात्त्विक अवशेष आज भी संरक्षित हैं. यह स्थान श्रद्धालु because भक्तों के लिए बहुत ही पवित्र और गणेश के सांस्कृतिक महत्त्व को उजागर करने वाली देवभूमि है. यद्यपि शैव संस्कृति का मुख्य केंद्र होने के कारण उत्तराखंड में गणेश पूजा एक स्वतंत्र धार्मिक परम्परा के रूप में यहां विकसित नहीं हो सकी किन्तु यहां के शैव मंदिर हों या वैष्णव मंदिर अथवा शाक्त सम्प्रदाय के मंदिर सभी में देवपूजा के अंतर्गत गणपति की पूजा और अर्चना को प्रमुखता से स्थान मिला है. कुमाऊं प्रदेश में चाहे किसी प्रकार की धार्मिक पू...
हरताली’: सामवेदी तिवारी ब्राह्मणों का यज्ञोपवीत पर्व

हरताली’: सामवेदी तिवारी ब्राह्मणों का यज्ञोपवीत पर्व

लोक पर्व-त्योहार
एक धर्मशास्त्रीय विवेचनडॉ. मोहन चंद तिवारी इस बार 9 सितंबर,2021 (भादो 24 पैट) because को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया  तिथि और हस्त नक्षत्र के पावन अवसर पर हरताली तीज और सामवेदी ब्राह्मणों का उपाकर्म का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन अखंड सौभाग्य व उत्तम वर की कामना से महिलाएं व युवतियां निर्जल निराहार रहकर शिव-पार्वती का पूजन करती हैं.कोलकाता धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस दिन हस्त नक्षत्र के अवसर पर कुमाऊं उत्तराखंड के सामवेदी तिवारी ब्राह्मणों द्वारा यज्ञोपवीत धारण तथा रक्षासूत्र बंधन का पर्व 'हरताली' मनाया जाता है. सदियों से चली आ रही इस 'हरताली' की परम्परागत मान्यता के अनुसार because कुमाऊं में तिवारी, तिवाड़ी, तेवारी, तेवाड़ी, त्रिपाठी, त्रिवेदी आदि उपनामों से प्रचलित सामवेदी ब्राह्मण ‘हस्त’ नक्षत्र में ही ‘हरताली’ तीज पर जनेऊ धारण करते हैं. हरताली के दिन प्रा...
साकार होता खतलिंग पांचवां धाम  का इंद्रमणि बडोनी का स्वप्न

साकार होता खतलिंग पांचवां धाम  का इंद्रमणि बडोनी का स्वप्न

पर्यटन
हिमालय दिवस (9 सितंबर) पर विशेषकवि बीर सिंह राणा 2 सितंबर 2021 का दिन वास्तव में  भिलंगना घाटी के लिए अविस्मरणीय और गौरवमय इतिहास का साक्षी बन गया. जहां पिछले ढाई दशक से सजग मातृशक्ति because और ऊर्जावान युवाओं का आह्वान किया जाता रहा कि खतलिंग को पांचवां धाम स्वार्थी और सत्तालोलूप नेता नहीं स्थानीय जनशक्ति बनाएगी और वो भी तब जब  घुत्तू में मेले  तक सीमित ऐतिहासिक कोलकाता महायात्रा  बडोनी जी वाले स्वरूप में लौटेगी. घाटी के युवा ही नहीं माता -  बहनें 2015 से लगातार खतलिंग सहस्रताल तक की यात्रा करने वाले आधे दर्जन लोगों के जुनून से वाकिफ भी थे ,सहानुभूति केक्साथ सहयोग और बराबर रुचि भी ले रहें थे  . 2016 से जब दिल्ली से बडोनी जी की खतलिंग महायात्रा को पद्मविभूषण because सुंदरलाल बहुगुणा जी की प्रेरणा से हिमालय जागरण से जोड़ा गया,सोशल मीडिया,पत्र पत्रिकाओं और विभिन्न मंत्रालयों और सरका...
‘संझा’ देवी को सर्वाधिक प्रिय है सफेद फूल

‘संझा’ देवी को सर्वाधिक प्रिय है सफेद फूल

ट्रैवलॉग
मंजू दिल से… भाग-18मंजू कालाकवार मास का प्रारंभ ...यानी शरद ऋतु का आगमन जिसमे रंग-आकृति और गंध वाले फूलों की बहुतायत देखने को मिलती है. ये फूल केवल कला की उत्कृष्टता को इंगित नहीं करते वरन उनकी समग्र सुगंधावली का भी प्रस्फुटन करते हैं. इसी प्रकृति उल्लास के साथ बालिका पर्व यानी सांझी का शुभारंभ होता है. संझा बनाते समय लड़कियां because एक-एक फूल और उसकी पंखुड़ी को बड़े जतन से सहेजती हैं. संझा की ऋतु में जो फूल जिस अंचल में खिले मिलते हैं उन्हीं से संझा सजाई जाती है. मालवा तथा निमाड़ के क्षेत्रों में गुलगट्टे, गुलबास, गुलतेवड़ी के अलावा चंपा, चमेली, गुलाब, चांदनी, कनेर, गेंदा और अन्य फूल अधिकता में पाए जाते हैं कोलकाता संझा के अंकन के समय लड़कियां एक एक फूल और उसकी पंखुड़ियों से गोबर से अंकित संझा की आकृति पर श्रृंगार करती हैं. संझा का मूल अंकन गोबर से किया जाता है क्योंकि, गोबर से be...
पहाड़ में लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से पलायन रोकने एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है फेडयूके

पहाड़ में लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से पलायन रोकने एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है फेडयूके

देहरादून
उत्तराखंड के उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर ले जाना हमारा लक्ष्य – जगदीश भट्टहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनफेडरेशन ऑफ उत्तराखंड एंटरप्रेन्योर्स (Federation of Uttarakhand Entrepreneurs) (फेडयूके) उत्तराखंड के सभी स्थानीय उद्यमियों को एक साथ लाने का प्रयास कर रहा है. फेडयूके का मुख्य उद्देश उत्तराखंड के उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर ले जाना एवं उनको पहचान दिलाना है. इस संस्था के माध्यम से उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लघु एवं कुटीर उद्योगों को लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा साथ ही साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सभी स्टार्टअपस, एसएमई और एमएसएमई से जुड़े हुए लोगों को अपनी सदस्यता देकर स्वरोजगार और उत्तराखंड के समग्र विकास को बढ़ावा देना है. ज्योतिष 'फेडरेशन ऑफ उत्तराखंड एंटरप्रेन्योर' के संस्थापक जगदीश भट्ट ने कहा, उत्तराखंड में बहुत से लघु एवं कुटीर उद्योग ऐसे हैं जिनको...
रवांई के लाल दिनेश रावत ‘टीचर ऑफ द ईयर अवार्ड’ से सम्मानित

रवांई के लाल दिनेश रावत ‘टीचर ऑफ द ईयर अवार्ड’ से सम्मानित

देहरादून
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिक्षक दिवस पर किया सम्मानित हिमांतर ब्यूरो, देहरादून  शिक्षक दिसव के मौके पर देहरादून में because तकनिकी विश्वविद्यालय में दिव्य हिमगिरी की ओर से आयोजित 'टीचर ऑफ द ईयर अवार्ड' से शिक्षकों को सम्मानित किया गया. इनमें उत्तरकाशी जिले की रवांई घाटी के कोटी बनाल निवासी शिक्षक दिनेश रावत भी शामिल हैं. उनको शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया. ज्योतिष लोक संस्कृति की भी अलख जगाई दिनेश रावत वह शिक्षक हैं, जो जिस because भी स्कूल में जाते हैं. उस स्कूल को अपना बना लेते हैं. बच्चों को पढ़ाने के उनके तरीके ऐसे होते हैं कि बच्चे खेल-खेल में बहुत कुछ सीख जाते हैं. अपने शिक्षण कौशल से उन्होंने बच्चों को ना केवल अच्छी शिक्षा दी, बल्कि उनमें अपनी लोक संस्कृति की भी अलख जगाई. ज्योतिष पहली बार पत्रिका प्रकाशन किया शिक...
मुख्यमंत्री ने किया ‘कोरोना वॉरियर्स’ का विमोचन

मुख्यमंत्री ने किया ‘कोरोना वॉरियर्स’ का विमोचन

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनउत्तराखंड के युवा बाल साहित्यकार ललित शौर्य की पुस्तक कोरोना वॉरियर्स का विमोचन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि ललित शौर्य की रचना धर्मिता प्रभावित करती है. उन्होंने कम उम्र में उत्कृष्ठ साहित्य रचा है. शौर्य हिंदी के उन्नयन व बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. ललित शौर्य ने कहा कि कोरोना वॉरियर्स कोरोना पर केंद्रित देश का पहला बाल कहानी संग्रह है. इसमें बच्चों  व बड़ो को कहानी के माध्यम से कोरोना से बचने व कोरोना काल में किये जाने वाले व्यवहार के बारे में जानकारी दी गई है. शौर्य ने मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया. ललित शौर्य की अब तक 13 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उन्हें राष्ट्रीय व प्रादेशिक स्तर पर अनेकों सम्मानो से सम्मानित किया जा चुका है. शौर्य की कहानियों का अनुवाद अंग्रेज...
सल्ट क्रांति : ग्राम स्वराज का क्रांतिकारी आंदोलन

सल्ट क्रांति : ग्राम स्वराज का क्रांतिकारी आंदोलन

इतिहास
सल्ट क्रांति दिवस (5 सितंबर) पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीदेश की आजादी को लेकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जब भी आंदोलन शुरू हुआ तो उसमें उत्तराखंड के क्रांतिवीरों की अहम भूमिका रही है. समूचे देश में कुली बेगार,आंदोलन हो या गांधी जी का 'भारत छोड़ो' आंदोलन, सीमा से लगे सल्ट क्षेत्र ने इसमें बढ़चढ़ कर भाग लिया. सन् 1920 में  ही सल्ट क्षेत्र के पुरुषोत्तम उपाध्याय की because अगुवाई में लोगों ने आजादी का बिगुल बजा दिया था. 1922 में महात्मा गांधी के जेल जाने पर यहां के क्रांतिवीरों ने इसका जबरदस्त विरोध किया. पुरुषोत्तम उपाध्याय 1927 में सरकारी नौकरी छोड़कर पूरी तरह संघर्ष में कूद गए. 1927 में नशाबंदी,तंबाकू बंदी आंदोलन के दौरान धर्म सिंह मालगुजार के गोदामों में रखा तंबाकू जला दिया गया. इस क्षेत्र में गांधी जी द्वारा चलाए गए अवज्ञा आंदोलन, नमक सत्याग्रह, जंगल सत्याग्रह,जैसे आंदोलन ग्राम पंचाय...
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के हर्षोल्लास एवं धरती के प्रति कृतज्ञता का पर्व है आठाँईं पूजन

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के हर्षोल्लास एवं धरती के प्रति कृतज्ञता का पर्व है आठाँईं पूजन

लोक पर्व-त्योहार
दिनेश रावतदेवभूमिउत्तराखण्ड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी का पश्चिमोत्तर रवाँई क्षेत्र अपनी सामाजिक—सांस्कृतिक विवि​धता एवं विशिष्टता के लिए सदैव से ही विख्यात रहा है. पर्व—त्योहार—उत्सव हों या कोई अन्य सामाजिक—सांस्कृतिक आयोजन, सभी की अपनी—अपनी विशिष्टताएं हैं. पर्व—त्योहारों की श्रृंखला में प्रमुखता से शामिल है 'भादों की आठाँई' या 'दुर्बाष्टमी को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव'.ज्योतिषलोक की अपनी रीति—नीति, मान्यता—परम्पराएं होती हैं उन्हीं के आलोक में लोकवासी श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाते हैं, जो पूरी तरह विरल व विविधतायुक्त होता है.कृष्ण के साथ because लोकपूजित समस्त देवी—देवताओं का आह्वान—स्मरण, पूजन—वंदन और धरती के प्रति कृतज्ञता अभिव्यक्त करते हुए आनन्द—उत्सव मनाते हैं.ज्योतिष भाद्रपद मास यानी एक तरफ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूमदूसरी तरफ गाँव—घरों के आस—पास मौसमी साग—सब्जी व फलों से भरे ...