Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
…ताकि ओडॉयर कि मौत की गूँज दुनिया भर को सुनाई दे!

…ताकि ओडॉयर कि मौत की गूँज दुनिया भर को सुनाई दे!

समसामयिक
फ़िल्म समीक्षा : एक खूबसूरत दर्दभरी कहानी है फिल्म ‘सरदार उधम सिंह’कमलेश चंद्र जोशीमाइकल ओडॉयर को गोली मारने के बाद उधम सिंह को ब्रिटिश जेल में जिस तरह की यातनाएँ दी गई उसके बारे में सोचकर भी किसी की रूह काँप जाए, लेकिन उधम सिंह मानो मौत का because कफन बाँधकर ही ओडॉयर को मारने ब्रिटेन गए थे. कुछ हमदर्द लोगों ने उधम सिंह से अपने इस कृत्य के लिए ब्रितानी हुकूमत से माफी माँगने की सलाह भी दी लेकिन भगत सिंह का यह अनुयायी उनसे इतना प्रभावित था कि उनके विचारों की पोटली साथ लेकर चलता था.  कहता था उसे एक ग्रंथी ने बोला है “पुत्तर! जवानी रब का दिया हुआ तोहफा है. अब ये तेरे ऊपर है, तू इस तोहफे को ज़ाया करता है या इसको कोई मतलब देता है.” ज्योतिष जिस तरह का नरसंहार उधम सिंह ने जलियाँवाला बाग में देखा और महसूस किया, उससे उसकी जवानी को मतलब मिल गया था और वह मतलब था किसी भी कीमत में जलियाँवाला...
फेसबुक सर्वेक्षण : कुमाऊं में मन्या अवशेष…

फेसबुक सर्वेक्षण : कुमाऊं में मन्या अवशेष…

धर्मस्थल
कुमाऊं में मनिया मंदिर: एक पुनर्विवेचना -3डॉ. मोहन चंद तिवारीद्वाराहाट के 'मनिया मंदिर समूह' के सन्दर्भ में पिछली दो पोस्टों में विस्तार से चर्चा की गई है.किंतु मन्याओं के बारे में इतिहास और पुरातत्त्व के विद्वानों द्वारा कोई खास जानकारी नहीं दी गई है. because इसी सन्दर्भ में फेसबुक के माध्यम से कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों में 'मन्या' सम्बन्धी जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया. चिंता का विषय है कि आज हमारे पास कत्युरी नरेश मानदेव के द्वारा जैन श्रावकों अथवा शिल्पकारों के माध्यम से निर्मित द्वाराहाट के 'मनिया मन्दिर समूह' के अतिरिक्त कोई भी जीवंत साक्ष्य नहीं हैं. अधिकांश मन्याएं नष्ट हो चुकी हैं,उनका कोई नामोनिशान नहीं बचा है. कुछ धार्मिक स्थलों की मन्याओं का पुनर्निर्माण हो चुका है.ज्योतिष 'कुमाऊंनी शब्द सम्पदा', 'कुमाऊंनी' और 'पहाड़ी फ़सक' ग्रुपों से मन्याओं के बारे में विभि...
द्वाराहाट, सुरेग्वेल और जालली क्षेत्र की मन्याओं का इतिहास

द्वाराहाट, सुरेग्वेल और जालली क्षेत्र की मन्याओं का इतिहास

धर्मस्थल
कुमाऊं में मनिया मंदिर : एक पुनर्विवेचना-2डॉ. मोहन चंद तिवारीद्वाराहाट के ऐतिहासिक स्थलों से सम्बंधित शोध योजना के अंतर्गत मैंने वर्ष 2017 के 30 मई से 3 जून, की अवधि में सुरेग्वेल  और जालली के मंदिर और वहां स्थित विलुप्त 'मन्याओं' का सर्वेक्षण किया, तो इस क्षेत्र के मन्या मंदिरों के बारे में अनेक नए तथ्यों का भी रहस्योद्घाटन हुआ. इस क्षेत्र के वरिष्ठ स्थानीय प्रबुद्धजनों से पता चला कि because द्वाराहाट और पाली पछाऊं के इलाके में 'मन्या' उस धार्मिक स्थान को कहते हैं, जहां यात्रीगण या मुसाफिर लोग रात्रि के समय विश्राम करते हैं. एक प्रकार से यह मंदिर के निकट रात्रि विश्राम हेतु बना धर्मशाला जैसा  विशेष कक्ष होता था.ज्योतिष द्वाराहाट का मनिया मन्दिर समूह द्वाराहाट प्राचीन काल से ही तीर्थनगरी के रूप में प्रसिद्ध रहा है. चारधाम यात्रा हो या कैलास मानसरोवर की यात्रा द्वाराहाट उन स...
देहरादून से “द्वारा” गांव वाया मालदेवता…

देहरादून से “द्वारा” गांव वाया मालदेवता…

संस्मरण
लघु यात्रा संस्मरणसुनीता भट्ट पैन्यूली Treasure of thoughts are with us. They only have to be discovered.... मेरे अन्दर  पेड़ नदी,पहाड़, झरने,जंगली फूलों से सराबोर प्रकृति के विभिन्न आयामों की सुंदर व अथाह  प्रदर्शनी सजी हुई है किंतु फिर भी मेरा मन नहीं भरता है और मैं शरणोन्मुख because हो जाती हूं  नदियों, पहाड़ों और सघन जंगलों से बात करने की तृषा-तोष हेतु.ज्योतिष स्मृतियों और अनूभूतियों के चिंतन का so कारवां  चलता रहता है मेरी यात्राओं में मेरे साथ-साथ जिससे सृजन के वेग को मेरी कलम की हौसला-अफ़जाई द्वारा एक बल मिलता है. मेरे यात्रा अनुभव,मेरे संस्मरण और मेरे मोबाइल के कैमरे की जुगलबंदी कुछ इस तरह हो जाती है कि, या सीधा-साफ कहूं मेरे अनुभव और मेरे मोबाइल के बीच अच्छी बनने लगी है because जिससे मेरी लघु- या चिर यात्राओं  के गंतव्य की भौगोलिक-स्थिती वहां का खान-पान,वहां की वनस्पति...
माताश्री मंगला के जन्मदिन पर उत्तराखंड को 14 डायलिसिस केंद्रों और 13 सचल अस्पतालों की सौगात

माताश्री मंगला के जन्मदिन पर उत्तराखंड को 14 डायलिसिस केंद्रों और 13 सचल अस्पतालों की सौगात

देहरादून
मुख्यमंत्री ने हंस फाउंडेशन की संरक्षक माताश्री मंगला को जन्मोत्सव की दी बधाई ‘द हंस फाउण्डेशन डायलिसिस केन्द्र’ का लोकार्पणहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मोहकमपुर because देहरादून में द हंस फाउण्डेशन डायलिसिस केन्द्र का लोकार्पण किया. माता मंगला जी के जन्मोत्सव के अवसर पर हंस फाउण्डेशन के संस्थापक श्री भोले जी महाराज और माता मंगला जी ने प्रदेश को 14 डायलिसिस केन्द्रों एवं 13 सचल चिकित्सालयों की सौगात दी.ज्योतिष मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने माता मंगला जी को जन्मोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु की कामना की. उन्होंने कहा कि माता मंगला जी और श्री भोले जी महाराज ने अपना पूरा जीवन परमार्थ के लिए लिए समर्पित किया है. उनके लिए नर सेवा ही नारायण सेवा है. उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण देश में उनके द्वारा जन सेवा के लिए अ...
द्वाराहाट के ‘मन्या’ मंदिर : एक पुनर्विवेचना

द्वाराहाट के ‘मन्या’ मंदिर : एक पुनर्विवेचना

धर्मस्थल
डॉ. मोहन चंद तिवारी बीस-पच्चीस वर्ष पूर्व जब मैं अपनी पुस्तक ‘द्रोणगिरि:इतिहास और संस्कृति’ के लिए द्वाराहाट के मंदिर समूहों के सम्बंध में जानकारी जुटा रहा था, तो उस समय मेरे लिए 'मन्या' या 'मनिया'because नामक मंदिर समूह के नामकरण का औचित्य ज्यादा स्पष्ट नहीं हो पाया था. द्वाराहाट के इतिहास के बारे में जानकार विद्वानों से पूछने के बाद भी यह प्रश्न सुलझ नहीं पाया कि इन मंदिर समूहों को आखिर 'मन्या' क्यों कहा जाता है? इस क्षेत्र से जुड़े पुरातत्त्व विशेषज्ञ और स्थापत्य के जानकार भी द्वाराहाट के मनिया मंदिर के बारे में ज्यादा वास्तुशात्रीय जानकारी शायद इसलिए नहीं दे पाए क्योंकि द्वाराहाट क्षेत्र में विभिन्न मन्या स्मारकों के बारे में उनकी जानकारी का सर्वथा अभाव ही था.ज्योतिष हालांकि राहुल सांकृत्यायन, नित्यानन्द मिश्र, प्रो.राम सिंह आदि इतिहासकारों ने कुछ अप्रत्यक्ष जानकारी अवश्य दी है. क...
कालसी गेट की रामलीला और मैं…

कालसी गेट की रामलीला और मैं…

संस्मरण
स्मृतियों के उस पारसुनीता भट्ट पैन्यूली अक्टूबर यानी पत्तियां रंग बदल रही हैं,  पौधे ज़मीन पर बदरंग होकर  स्वत:स्फूर्त बीज फेंक रहे हैं ज़मीन पर, जानवर सर्दियों से बचाव की तैयारी में चिंतन में आकंठ डूबे हुए हैं. यानी पूरी प्रकृति एक बदलाव की प्रक्रिया की ओर अग्रसर है. अक्तूबर आ गया है  सुबह सर्द मौसम की सरसराहट पूरे शरीर की धमनियों में दौड़ने लगी है और इसी सरसराहट के साथ नवरात्रि की धूम में  सुबह हवाओं में बहुमिश्रित अगरबत्तियों की खुशबू है.कहीं मंदिरों में घंटियों की टुनटुनाहट है. देर रात्रि में दूर शहर में कहीं  माइक पर धीमी होती आवाज़ में  रामलीला के डायलोग जैसे ही मेरे कर्णों को भेदते हैं, मेरी स्मृतियों के कपाट इस चिरपरिचित आवाज़ को सुनकर हर साल की तरह इस बार भी खुल गये हैं जिसके घुप्प अंधेरे को भेदकर बहुत पीछे जाने पर मेरे भीतर बचपन की रंग-बिरंगी अकूत झांकियां सजी हुई  हैं. ...
चित्रकला की दुनिया में जगमोहन बंगाणी

चित्रकला की दुनिया में जगमोहन बंगाणी

वीडियो
चित्रकला की दुनिया में जगमोहन बंगाणी एक सुपरिचित और प्रतिष्ठित नाम है। कैलीग्राफी और रंगों के अद्भुत  समायोजन के कारण उसकी एक अलग पहचान है। उसके चित्रों में संगीत की लय और शब्दों की ध्वनि है। वह स्वयं रंगों और शब्दों की दुनिया में जीने वाला कलाकार है। तभी तो वह कहता है कि 'मैं रंगों से चित्रों की निर्मिति को निर्माण से ज्यादा एन्जॉय करता हूँ"। जगमोहन ने कैलीग्राफी में अभिनव प्रयोग किए हैं। वह एक अलहदा आर्टिस्ट है जिसने मंत्रों को रंगों की दुनिया में उतारा है। वह हिंदी, संस्कृत, पंजाबी और अन्य भाषाओं के शब्दों के माध्यम से कला की एक नई दुनिया रच रहा है। उत्तराखंड का एक सुदूरवर्ती गाँव मौंडा, हिमाचल और उत्तराखंड के बॉर्डर पर स्थित है। जगमोहन इसी मौंडा गाँव से कला (आर्ट) का पीछा करते-करते देहरादून, दिल्ली होते हुए लंदन तक पहुँच जाता है। कला का स्वभाव उसने हिमालय की छाँव से जाना तो उसके आयाम य...
जगमोहन बंगाणी:  टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं के बीच जीवन का संघर्ष

जगमोहन बंगाणी: टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं के बीच जीवन का संघर्ष

कला-रंगमंच
एक चित्रकार के संघर्ष की कहानीशशि मोहन रवांल्टासीमांत जनपद उत्तरकाशी के अंतिम छोर पर बसे मौंडा गांव में जन्में और गांव की ही पाठशाला में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद महानगरों का रूख किया. प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही मेरा झुकाव कला की ओर हो गया था. दैनिक जीवन की जरूरी वस्तुओं के लिए गांव से कई मील पैदल चलने के बाद हम स्थानीय बाजार में खरीददारी करने जाते थे. मैं जब अपनी किताबें लेने के लिए जाता तो अपनी कक्षा की किताबों के साथ—साथ कला की एक कॉपी के बजाए दो कॉपियां खरीद लाता था. because घर पहुंचने पर जब मां—बाप स्कूल से मिली किताबों की सूची से मिलान करते तो उन्हें कला की एक कॉपी बजाय दो कॉपियां मिलती थीं. इसके लिए माताजी से हमेशा सुनना पड़ता था कि because बिना सोचे—समझे दो कॉपियां उठा लाते हो. जबकि सारे बच्चे तो एक ही लाते हैं. चूंकि मैं बचपन से कुछ न कुछ चित्रका...
मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण आवश्यक है 

मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण आवश्यक है 

साहित्‍य-संस्कृति
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्तूबर) पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  आयुर्वेद के अनुसार यदि आत्मा , मन और इंद्रियाँ प्रसन्न रहें तो आदमी को स्वस्थ कहते हैं. ऐसा स्वस्थ आदमी ही सक्रिय हो कर उत्पादक कार्यों को पूरा करते हुए न केवल अपने लक्ष्यों की पूर्ति कर पाता है बल्कि समाज और देश की उन्नति में योगदान भी कर पाता है. निश्चय ही यह एक आदर्श स्थिति होती है परंतु यह स्थिति किसी भी तरह because निरपेक्ष नहीं कही जा सकती. जीवन का आरम्भ और जीने की पूरी प्रक्रिया परिस्थितियों के बीच उन्ही के विभिन्न अवयवों से बनते-बिगड़ते एक गतिशील परिवेश के बीच आयोजित होती है. उदाहरण के लिए देखें तो पाएँगे साँस लेना भी परिवेश से मिलने वाले आक्सीजन पर निर्भर करता है जो नितांत स्वाभाविक और प्राकृतिक लगता है पर प्रदूषण होने पर या फेफड़े में संक्रमण हो तो मुश्किल हो जाती है. कोविड महामारी में यह सबने बखूबी देखा ...