Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
देहरादून से “द्वारा” गांव वाया मालदेवता…

देहरादून से “द्वारा” गांव वाया मालदेवता…

संस्मरण
लघु यात्रा संस्मरणसुनीता भट्ट पैन्यूली Treasure of thoughts are with us. They only have to be discovered.... मेरे अन्दर  पेड़ नदी,पहाड़, झरने,जंगली फूलों से सराबोर प्रकृति के विभिन्न आयामों की सुंदर व अथाह  प्रदर्शनी सजी हुई है किंतु फिर भी मेरा मन नहीं भरता है और मैं शरणोन्मुख because हो जाती हूं  नदियों, पहाड़ों और सघन जंगलों से बात करने की तृषा-तोष हेतु.ज्योतिष स्मृतियों और अनूभूतियों के चिंतन का so कारवां  चलता रहता है मेरी यात्राओं में मेरे साथ-साथ जिससे सृजन के वेग को मेरी कलम की हौसला-अफ़जाई द्वारा एक बल मिलता है. मेरे यात्रा अनुभव,मेरे संस्मरण और मेरे मोबाइल के कैमरे की जुगलबंदी कुछ इस तरह हो जाती है कि, या सीधा-साफ कहूं मेरे अनुभव और मेरे मोबाइल के बीच अच्छी बनने लगी है because जिससे मेरी लघु- या चिर यात्राओं  के गंतव्य की भौगोलिक-स्थिती वहां का खान-पान,वहां की वनस्पति...
माताश्री मंगला के जन्मदिन पर उत्तराखंड को 14 डायलिसिस केंद्रों और 13 सचल अस्पतालों की सौगात

माताश्री मंगला के जन्मदिन पर उत्तराखंड को 14 डायलिसिस केंद्रों और 13 सचल अस्पतालों की सौगात

देहरादून
मुख्यमंत्री ने हंस फाउंडेशन की संरक्षक माताश्री मंगला को जन्मोत्सव की दी बधाई ‘द हंस फाउण्डेशन डायलिसिस केन्द्र’ का लोकार्पणहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मोहकमपुर because देहरादून में द हंस फाउण्डेशन डायलिसिस केन्द्र का लोकार्पण किया. माता मंगला जी के जन्मोत्सव के अवसर पर हंस फाउण्डेशन के संस्थापक श्री भोले जी महाराज और माता मंगला जी ने प्रदेश को 14 डायलिसिस केन्द्रों एवं 13 सचल चिकित्सालयों की सौगात दी.ज्योतिष मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने माता मंगला जी को जन्मोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु की कामना की. उन्होंने कहा कि माता मंगला जी और श्री भोले जी महाराज ने अपना पूरा जीवन परमार्थ के लिए लिए समर्पित किया है. उनके लिए नर सेवा ही नारायण सेवा है. उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण देश में उनके द्वारा जन सेवा के लिए अ...
द्वाराहाट के ‘मन्या’ मंदिर : एक पुनर्विवेचना

द्वाराहाट के ‘मन्या’ मंदिर : एक पुनर्विवेचना

धर्मस्थल
डॉ. मोहन चंद तिवारी बीस-पच्चीस वर्ष पूर्व जब मैं अपनी पुस्तक ‘द्रोणगिरि:इतिहास और संस्कृति’ के लिए द्वाराहाट के मंदिर समूहों के सम्बंध में जानकारी जुटा रहा था, तो उस समय मेरे लिए 'मन्या' या 'मनिया'because नामक मंदिर समूह के नामकरण का औचित्य ज्यादा स्पष्ट नहीं हो पाया था. द्वाराहाट के इतिहास के बारे में जानकार विद्वानों से पूछने के बाद भी यह प्रश्न सुलझ नहीं पाया कि इन मंदिर समूहों को आखिर 'मन्या' क्यों कहा जाता है? इस क्षेत्र से जुड़े पुरातत्त्व विशेषज्ञ और स्थापत्य के जानकार भी द्वाराहाट के मनिया मंदिर के बारे में ज्यादा वास्तुशात्रीय जानकारी शायद इसलिए नहीं दे पाए क्योंकि द्वाराहाट क्षेत्र में विभिन्न मन्या स्मारकों के बारे में उनकी जानकारी का सर्वथा अभाव ही था.ज्योतिष हालांकि राहुल सांकृत्यायन, नित्यानन्द मिश्र, प्रो.राम सिंह आदि इतिहासकारों ने कुछ अप्रत्यक्ष जानकारी अवश्य दी है. क...
कालसी गेट की रामलीला और मैं…

कालसी गेट की रामलीला और मैं…

संस्मरण
स्मृतियों के उस पारसुनीता भट्ट पैन्यूली अक्टूबर यानी पत्तियां रंग बदल रही हैं,  पौधे ज़मीन पर बदरंग होकर  स्वत:स्फूर्त बीज फेंक रहे हैं ज़मीन पर, जानवर सर्दियों से बचाव की तैयारी में चिंतन में आकंठ डूबे हुए हैं. यानी पूरी प्रकृति एक बदलाव की प्रक्रिया की ओर अग्रसर है. अक्तूबर आ गया है  सुबह सर्द मौसम की सरसराहट पूरे शरीर की धमनियों में दौड़ने लगी है और इसी सरसराहट के साथ नवरात्रि की धूम में  सुबह हवाओं में बहुमिश्रित अगरबत्तियों की खुशबू है.कहीं मंदिरों में घंटियों की टुनटुनाहट है. देर रात्रि में दूर शहर में कहीं  माइक पर धीमी होती आवाज़ में  रामलीला के डायलोग जैसे ही मेरे कर्णों को भेदते हैं, मेरी स्मृतियों के कपाट इस चिरपरिचित आवाज़ को सुनकर हर साल की तरह इस बार भी खुल गये हैं जिसके घुप्प अंधेरे को भेदकर बहुत पीछे जाने पर मेरे भीतर बचपन की रंग-बिरंगी अकूत झांकियां सजी हुई  हैं. ...
चित्रकला की दुनिया में जगमोहन बंगाणी

चित्रकला की दुनिया में जगमोहन बंगाणी

वीडियो
चित्रकला की दुनिया में जगमोहन बंगाणी एक सुपरिचित और प्रतिष्ठित नाम है। कैलीग्राफी और रंगों के अद्भुत  समायोजन के कारण उसकी एक अलग पहचान है। उसके चित्रों में संगीत की लय और शब्दों की ध्वनि है। वह स्वयं रंगों और शब्दों की दुनिया में जीने वाला कलाकार है। तभी तो वह कहता है कि 'मैं रंगों से चित्रों की निर्मिति को निर्माण से ज्यादा एन्जॉय करता हूँ"। जगमोहन ने कैलीग्राफी में अभिनव प्रयोग किए हैं। वह एक अलहदा आर्टिस्ट है जिसने मंत्रों को रंगों की दुनिया में उतारा है। वह हिंदी, संस्कृत, पंजाबी और अन्य भाषाओं के शब्दों के माध्यम से कला की एक नई दुनिया रच रहा है। उत्तराखंड का एक सुदूरवर्ती गाँव मौंडा, हिमाचल और उत्तराखंड के बॉर्डर पर स्थित है। जगमोहन इसी मौंडा गाँव से कला (आर्ट) का पीछा करते-करते देहरादून, दिल्ली होते हुए लंदन तक पहुँच जाता है। कला का स्वभाव उसने हिमालय की छाँव से जाना तो उसके आयाम य...
जगमोहन बंगाणी:  टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं के बीच जीवन का संघर्ष

जगमोहन बंगाणी: टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं के बीच जीवन का संघर्ष

कला-रंगमंच
एक चित्रकार के संघर्ष की कहानीशशि मोहन रवांल्टासीमांत जनपद उत्तरकाशी के अंतिम छोर पर बसे मौंडा गांव में जन्में और गांव की ही पाठशाला में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद महानगरों का रूख किया. प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही मेरा झुकाव कला की ओर हो गया था. दैनिक जीवन की जरूरी वस्तुओं के लिए गांव से कई मील पैदल चलने के बाद हम स्थानीय बाजार में खरीददारी करने जाते थे. मैं जब अपनी किताबें लेने के लिए जाता तो अपनी कक्षा की किताबों के साथ—साथ कला की एक कॉपी के बजाए दो कॉपियां खरीद लाता था. because घर पहुंचने पर जब मां—बाप स्कूल से मिली किताबों की सूची से मिलान करते तो उन्हें कला की एक कॉपी बजाय दो कॉपियां मिलती थीं. इसके लिए माताजी से हमेशा सुनना पड़ता था कि because बिना सोचे—समझे दो कॉपियां उठा लाते हो. जबकि सारे बच्चे तो एक ही लाते हैं. चूंकि मैं बचपन से कुछ न कुछ चित्रका...
मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण आवश्यक है 

मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण आवश्यक है 

साहित्‍य-संस्कृति
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्तूबर) पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  आयुर्वेद के अनुसार यदि आत्मा , मन और इंद्रियाँ प्रसन्न रहें तो आदमी को स्वस्थ कहते हैं. ऐसा स्वस्थ आदमी ही सक्रिय हो कर उत्पादक कार्यों को पूरा करते हुए न केवल अपने लक्ष्यों की पूर्ति कर पाता है बल्कि समाज और देश की उन्नति में योगदान भी कर पाता है. निश्चय ही यह एक आदर्श स्थिति होती है परंतु यह स्थिति किसी भी तरह because निरपेक्ष नहीं कही जा सकती. जीवन का आरम्भ और जीने की पूरी प्रक्रिया परिस्थितियों के बीच उन्ही के विभिन्न अवयवों से बनते-बिगड़ते एक गतिशील परिवेश के बीच आयोजित होती है. उदाहरण के लिए देखें तो पाएँगे साँस लेना भी परिवेश से मिलने वाले आक्सीजन पर निर्भर करता है जो नितांत स्वाभाविक और प्राकृतिक लगता है पर प्रदूषण होने पर या फेफड़े में संक्रमण हो तो मुश्किल हो जाती है. कोविड महामारी में यह सबने बखूबी देखा ...
आदित्य चौहान ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर रवांई घाटी का नाम किया रोशन 

आदित्य चौहान ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर रवांई घाटी का नाम किया रोशन 

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी विकासखंड मोरी आराकोट बंगाण क्षेत्र के किरोली गांव निवासी because आदित्य चौहान ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर जिला व रवांई घाटी का नाम रोशन किया है. उन्होंने 315 रैंक हासिल की है.बंगाण क्षेत्र के किरोली गांव निवासी गब्बर सिंह चौहान के बेटे आदित्य सिंह चौहान ने इस because वर्ष यूपीएससी की परीक्षा पास की है. आदित्य ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई दिल्ली से की है. आदित्य सिंह चौहान की ऑल इंडिया में 315 रैंक प्राप्त की है. कम्प्यूटर सांइस में किया बीटेक ज्योतिष आदित्य चौहान ने इस वर्ष यूपीएससी की परीक्षा पास की है. आदित्य ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई दिल्ली से की है. इसके बाद उन्होंने 2016 में गोविन्द बल्लभ पंत विश्व विद्यालय पंतनगर से कम्प्यूटर सांइस में बीटेक किया है. उनकी इस सफलता पर because रवांई घाटी में खुशी का माहौल है. आदित्य के पिता गब्बर सिं...
‘द्वितीयं ब्रह्मचारिणी’ : देवी का सच्चिदानन्दमयी स्वरूप

‘द्वितीयं ब्रह्मचारिणी’ : देवी का सच्चिदानन्दमयी स्वरूप

लोक पर्व-त्योहार
नवरात्र चर्चा - 2  डॉ. मोहन चंद तिवारीकल नवरात्र के प्रथम दिन ‘शैलपुत्री’ देवी के पर्यावरण because वैज्ञानिक स्वरूप पर प्रकाश डाला गया जो प्रकृति परमेश्वरीका प्रधान वात्सल्यमयी रूप होने के कारण पहला रूप है. आज नवरात्र के दूसरे दिन देवी के ‘ब्रह्मचारिणी’ रूप की पूजा-अर्चनाकी जा रही है.ज्योतिष देवी के इस दूसरे ‘ब्रह्मचारिणी’ because स्वरूप को प्रकृति के सच्चिदानन्दमय ब्रह्मस्वरूप के रूप में निरूपित किया जा सकता है. ऋग्वेद के ‘देवीसूक्त’ में अम्भृण ऋषि की पुत्री वाग्देवी ब्रह्मस्वरूपा होकर समस्त जगत को ज्ञानमय बनाती है और रुद्रबाण से अज्ञान का विनाश करती है -ज्योतिष  “अहं रुद्राय धनुरा तनोमि ब्रह्मद्विषे because शरवे हन्तवा उ.ज्योतिष अहं जनाय because समदं कृष्णोम्यहं द्यावापृथिवी because आ विवेश..” -(ऋ.10.125.6) ‘देव्यथर्वशीर्ष’ में भगवती देवों से अपने because स्व...
‘प्रथमं शैलपुत्री च’ : हिमालय पर्यावरण की रक्षिका देवी

‘प्रथमं शैलपुत्री च’ : हिमालय पर्यावरण की रक्षिका देवी

लोक पर्व-त्योहार
डॉ. मोहन चंद तिवारीशारदीय नवरात्र-1       आज शारदीय नवरात्र का पहला दिन है. आज नवदुर्गाओं में से देवी के पहले स्वरूप 'शैलपुत्री' की समाराधना की जाती है. पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से पर्वतराज हिमालय की प्रधान भूमिका है.because यह पर्वत मौसम नियंता होने के साथ-साथ विश्व पर्यावरण को नियंत्रित करने का भी केन्द्रीय संस्थान है. हिमालय क्षेत्र के इसी राष्ट्रीय महत्त्व को उजागर करने के लिए देवी के नौ रूपों में हिमालय प्रकृति को ‘शैलपुत्री’ के रूप में सर्वप्रथम स्थान दिया गया है. नवरात्र के पहले दिन अर्थात् प्रतिपदा की तिथि को ‘शैलपुत्री’ की विशेष पूजा-अर्चना इसलिए भी की जाती क्योंकि हिमालय क्षेत्र शैलपुत्री की क्रीड़ाभूमि व तपोभूमि दोनों है. दक्षपुत्री सती ने पार्वती के रूप में हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया तो इसी स्थान पर आदिदेव शिव के साथ उनका विवाह हुआ.ज्योतिष प्रतिमा विज्ञान क...