Tag: रिवर्स माइग्रेशन

बागेश्वर में रिवर्स माइग्रेशन की मिसाल: आधुनिक कृषि और कीवी खेती से पलायन पर लगाम, बढ़ी किसानों की आय

बागेश्वर में रिवर्स माइग्रेशन की मिसाल: आधुनिक कृषि और कीवी खेती से पलायन पर लगाम, बढ़ी किसानों की आय

बागेश्‍वर
  पहाड़ में लौटती उम्मीद: आधुनिक कृषि से बदल रहा बागेश्वर का भविष्यहिमांतर ब्यूरो, बागेश्वरउत्तराखंड के पहाड़ों में वर्षों से पलायन एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती रहा है। बेहतर शिक्षा, रोजगार और सुविधाओं की तलाश में गांवों से शहरों की ओर बढ़ता कदम अक्सर सूने घरों और वीरान खेतों की कहानी कहता था। लेकिन अब इसी पहाड़ में एक नई कहानी जन्म ले रही है- “रिवर्स माइग्रेशन” की कहानी, जहां लोग लौट रहे हैं… और सिर्फ लौट ही नहीं रहे, बल्कि अपने गांवों की तस्वीर बदल रहे हैं। बागेश्वर इस बदलाव की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। यहां आधुनिक कृषि, सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों ने उम्मीद की नई किरण जगाई है।बदलती सोच, बदलती ज़मीन जिलाधिकारी आकांक्षा कोंड़े के नेतृत्व में जनपद में कृषि को केवल आजीविका नहीं, बल्कि उद्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस प्रयास क...
दिल्ली में रैबार–7 का भव्य आयोजन : संवाद, संस्कृति और रिवर्स माइग्रेशन पर राष्ट्रीय मंथन

दिल्ली में रैबार–7 का भव्य आयोजन : संवाद, संस्कृति और रिवर्स माइग्रेशन पर राष्ट्रीय मंथन

दिल्ली-एनसीआर
 हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीदिल्ली में रैबार–7 कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने रैबार शब्द के शाब्दिक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि गढ़वाल एवं कुमाऊँ क्षेत्र में रैबार एक प्राचीन, परंपरागत और अत्यंत विश्वसनीय संचार माध्यम रहा है. उन्होंने गढ़वाली बोली के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारतीय सेना की विभिन्न पहलों से सीमावर्ती क्षेत्रों में रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहन मिला है. उन्होंने इस संदर्भ में मिशन सम्भावना का उल्लेख किया. असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने युवाओं को मेहनत और ईमानदारी के साथ देश सेवा करने का संदेश देते हुए कहा कि आज देश मजबूत नेतृत्व में निरंतर आगे बढ़ रहा है.उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डॉ....
उत्तराखंड में भांग की औद्योगिक एवं चिकित्सीय खेती के लिए नियामवली तैयार!

उत्तराखंड में भांग की औद्योगिक एवं चिकित्सीय खेती के लिए नियामवली तैयार!

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनउत्तराखण्ड में इंडस्ट्रियल हैम्प (industrial hemp) आधारित स्वरोजगार सृजन (self employment generation) और रिवर्स माइग्रेशन (reverse migration) को गति प्रदान करने के लिए वर्ष 2003-04 से ही इंडस्ट्रियल हैम्प (industrial hemp) की खेती, प्राकृतिक रेशों, बीज और डंठलों का उपयोग कर लघु कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माता प्रयासरत् रहे हैं. गौरतलब है कि पूर्व में उत्तराखण्ड कैनेबिस चिकित्सीय व वैज्ञानिक प्रयोजन और औद्योगिक हैम्प की खेती को एक साथ रख कर वर्ष 2016 में पहली इंडस्ट्रियल हैम्प पॉलिसी बनायी गयी थी. इसकी अंतिम बैठक तत्कालीन मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह जी की अध्यक्षता में 20 मार्च 2020 को हुई थी. इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए ‘‘औद्योगिक हैम्प एवं चिकित्सीय कैनाबिस” की नियमावली, 2023 पर स्टेक होल्डर्स की परामर्श बैठक का आयोजन सचिव, कृषि एवं कृषक कल्...
जनपद चमोली में लहलहाने लगा चाइनीज़ बैम्बू/मोसो बांस

जनपद चमोली में लहलहाने लगा चाइनीज़ बैम्बू/मोसो बांस

पर्यावरण
पर्यावरण दिवस (5 जून) पर विशेषजे. पी. मैठाणीउत्तराखण्ड में जनपद चमोली की टंगसा गाँव स्थित वन वर्धनिक की नर्सरी में उगाया गया चाइनीज़ बैम्बू बना आकर्षण का केन्द्र. चाइनीज़ बैम्बू को ग्रीन गोल्ड यानी हरा सोना कहा जाता है. यह नर्सरी गोपेश्वर बैंड से लगभग 6 किमी0 की दूरी पर पोखरी मोटर मार्ग पर स्थित है. रिवर्स माइग्रेशन कर आ रहे पहाड़ के युवा जिनके गाँव 1200 मीटर से अधिक ऊँचाई पर हैं उन गाँवों के लिए चाइनीज़ बैम्बू स्वरोजगार के बेहतर और स्थायी रास्ते खोल सकता है. हस्तशिल्प उत्पाद, फर्नीचर, होम स्टे की हट्स और घेरबाड़. हमने अपने जीवन में सामान्यतः कई तरह के बांस के पौधे या झुरमुट देखे होंगे. ये आश्चर्य की बात है कि बांस को कभी पेड़ का दर्जा दिया गया था, जिससे उसके काटने और लाने ले जाने के लिए वन विभाग से परमिट की आवश्यकता पड़ती थी. लेकिन कुछ समय पूर्व भारत सरकार द्वारा पुनः वन कानून में पर...