
- हिमांतर ब्यूरो, बड़कोट
अपर यमुना वन प्रभाग के जंगलों में अब आगजनी करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। वन विभाग ने पहली बार आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन कैमरों से निगरानी शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
ड्रोन से होगी 24 घंटे निगरानी
मुख्य वन संरक्षक के निर्देश पर शुरू की जा रही इस योजना के तहत बड़कोट स्थित अपर यमुना वन प्रभाग की संवेदनशील रेंज—मुगरसंती, कुथनौर और रवांई—में ड्रोन कैमरे तैनात किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में हर वर्ष फायर सीजन के दौरान सबसे अधिक आग की घटनाएं सामने आती हैं। ड्रोन के माध्यम से आग की सटीक लोकेशन तुरंत मिल सकेगी, जिससे समय रहते उस पर काबू पाया जा सकेगा।
फायर सीजन में बढ़ता खतरा
वन विभाग के अनुसार 15 फरवरी से 15 जून तक चलने वाले फायर सीजन में मई और जून सबसे संवेदनशील महीने होते हैं। गर्मी और सूखे के कारण इस दौरान जंगलों में आग तेजी से फैलती है। जागरूकता अभियानों के बावजूद कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर आग लगाने से बाज नहीं आते।
अधिकारियों के निर्देश पर पहल
हाल ही में यमुना घाटी के दौरे पर पहुंचे मुख्य वन संरक्षक डॉ. धीरज पांडेय ने वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए तकनीकी संसाधनों के अधिक उपयोग पर जोर दिया था। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाया जाए।
अपराधियों पर कसेगा शिकंजा
उप प्रभागीय वनाधिकारी साधु लाल पलियाल के अनुसार अब तक आग लगाने वाले लोग विभागीय टीम के पहुंचने से पहले ही फरार हो जाते थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल होता था। ड्रोन निगरानी शुरू होने के बाद ऐसी गतिविधियां रिकॉर्ड होंगी और दोषियों को आसानी से चिन्हित कर कार्रवाई की जा सकेगी।
वन संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
वन विभाग का मानना है कि यह पहल न केवल आग की घटनाओं को कम करने में सहायक होगी, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से वन संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
