प्रेमचंद के स्त्री पात्र एवं आधुनिक संदर्भ

प्रेमचंद के स्त्री पात्र एवं आधुनिक संदर्भ

प्रेमचंद जी की पुण्यतिथि (8 अक्टूबर) पर विशेष डॉ. अमिता प्रकाश 08 अक्टूबर आज प्रेमचंद को because याद करने का विशेष दिन है. आज उपन्यास विधा के युगपुरुष एवं महान कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि है. 31 जुलाई के दिन प्रेमचंद ने लमही में एक फटेहाल परिवार में जन्म लेकर तत्कालीन फटेहाल भारत को […]

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 शुभदा

शुभदा

कहानी डॉ. अमिता प्रकाश यही नाम था उसका शुभदा! शुभदा-शुभता प्रदान करने वाली. शुभ सौभाग्य प्रदायनी. हँसी आती है आज उसे अपने इस नाम पर और साथ ही दया के भाव भी उमड़ पड़ते हैं उसके अन्तस्थल में, जब वह इस नाम को रखने वाले अपने पिता को याद करती है…. कितने लाड़ और गर्व […]

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 पहाड़ में बालिका शिक्षा की दशा एवं दिशा: नई शिक्षा नीति के संदर्भ

पहाड़ में बालिका शिक्षा की दशा एवं दिशा: नई शिक्षा नीति के संदर्भ

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भाग-7 डॉ. अमिता प्रकाश शिक्षा, वह व्यवस्था जिसे मनुष्य ने अपने कल्याण के लिए, अपनी दिनचर्या में शामिल किया . मनुष्य की निरंतर बढ़ती मानसिक शक्तियों ने स्वयं को अपने परिवेश को, अपने सुख-दुख, आशाओं–आकांक्षाओं को व्यक्त और अनुभूत करने के लिए जो कुछ किया, वह जब दूसरों के द्वारा अनुकृत किया […]

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 ‘हे दरी हिमाला दरी ताछुम’

‘हे दरी हिमाला दरी ताछुम’

डॉ. अमिता प्रकाश “हे दरी हिमाला दरी ताछुम-ताछुमा-छुम. दरी का ऐंगी सौदेर दरी ताछुम-ताछुमा-छुम”.. हाथों से एक दूसरे की बाँह पकड़कर घेरे में गोल-गोल घूमकर दो कदम आगे बढ़ाते हुए धम्म से कूदती हुई लड़कियों को देखकर छज्जे में बैठी मेरी नानी, मामी और दूसरी लड़कियों की दादी, बोडी (ताई), काकी (चाची) की टिप्पणियाँ हमें […]

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 काणी मैं (मामी) उर्फ हल्या बौ (भाभी)

काणी मैं (मामी) उर्फ हल्या बौ (भाभी)

डॉ. अमिता प्रकाश पहाड़ हम पहाड़वासियों की रग-रग में इसी तरह बसा है जैसे शरीर में प्राण. प्राण के बिना जैसे शरीर निर्जीव है, कुछ वैसे ही हम भी प्राणहीन हो जाते हैं, पहाड़ के बिना. पहाड़ में हमारी जड़ें हैं जिनसे आज भी हम पोषण प्राप्त कर रहे हैं और जीवन के संघर्ष में […]

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