अभिनव पहल

उत्तराखंड औद्योगिक भांग की खेती आधारित स्वरोजगार का इतिहास 210 वर्ष पुराना

उत्तराखंड औद्योगिक भांग की खेती आधारित स्वरोजगार का इतिहास 210 वर्ष पुराना

अभिनव पहल, इतिहास, उत्तराखंड हलचल
औद्योगिक भांग की खेती को लेकर विभागों एवं एजेंसियों में तालमेल का अभावजे.पी. मैठाणीउत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य है जहां औद्योगिक भांग के व्यावसायिक खेती का लाइसेंस इसके कॉस्मेटिक एवं औषधिय उपयोग के लिए दिया जाने लगा है, लेकिन दूसरी तरफ औद्योगिक भांग के लो टीचीएसी (टेट्रा हाइड्रा कैनाबिनोल) वाले बीज कहां से मिलेंगे इसके बारे में कोई जानकारी स्पष्ट नहीं है।पर्वतीय क्षेत्रों में 1910 से पूर्व अंग्रेजों के जमाने से अल्मोड़ा और गढ़वाल जिलों (वर्तमान का पौड़ी, चमोली, रूद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़) में रेशे और मसाले के लिए भांग की व्यावसायिक खेती की अनुमति का प्रावधान कानून में है।हालांकि राज्य में विभिन्न एजेंसियां भांग की व्यावसायिक खेती शुरू करने की बात पिछले दो वर्ष कर रही हैं, लेकिन उत्तराखंड में लो टीचीएससी का बीज किसी एजेंसी के पास आम पहाड़ी किसानों के लिए जब उपलब...
पलायन की पीड़ा को प्रोडक्शन में बदलेंगे : जेपी

पलायन की पीड़ा को प्रोडक्शन में बदलेंगे : जेपी

अभिनव पहल
- प्रेम पंचोली केसर का नाम सुनते ही लगता है बात जम्मू-कश्मीर की हो रही है. अपने देश में केसर की खेती सिर्फ जम्मू-कश्मीर में होती है. लेकिन अब लोगों ने नए—नए प्रयोग (अनुसंधान) करके केसर को अपने गमलों तक ला दिया. हालांकि गमलों में यह प्रयोग सफल तो नहीं हुआ, मगर केसर की खेती का प्रचार-प्रसार जरूर बढा. देहरादून में सहस्रधारा के पास एक गांव में कैप्टन कुमार भण्डारी वैद्य केसर की खेती कर रहे है. उनका यह परीक्षण सफल रहा है. कह सकते हैं कि प्राकृतिक संसाधनो से परिपूर्ण उत्तराखण्ड राज्य में यदि केसर की खेती को राज्य सरकार बढावा दें तो यह राज्य धन-धान्य हो सकता है. खैर! केसर की खेती के नफा-नुकसान पर वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता जगतम्बा प्रसाद ने एक रिपोर्ट निकाली है. वे अपनी रिपोर्ट के मार्फत बता रहे हैं कि ‘केसर खेती’ इस राज्य का भविष्य बना सकती है. हालांकि यह काम बहुत ही मंहगा है.इतिहा...
बधाई हो रवांई के लाल बधाई हो…

बधाई हो रवांई के लाल बधाई हो…

अभिनव पहल
— शशि मोहन रवांल्टा नरेश भाई! रवांई का मान—सम्मान बढ़ाने के लिए आपको हार्दिक बधाई। 26 जनवरी के दिन उत्तरखंड के मुखिया के हाथों आपको 'देव भूमि रत्न' सम्मान मिलने पर बहुत ही प्रसन्नता हुई। साथ ही उत्तराखंड पत्रकार यूनियन का हार्दिक आभार जिनके द्वारा यह आयोजन आयोजित किया गया और आपका चयन इस सम्‍मान के लिए हुआ।एक साधारण-सा दिखने व्यक्ति बहुत ही असाधारण काम कर रहा है। बातों ही बातों में पता चला कि नरेश भाई रवांई घाटी से पहाड़ी खाद्यानों को वहां के किसानों से एकत्रित करके देहरादून—दिल्ली—मुंबई जैसे महानगरों में स्टॉलों के माध्यम से लोगों को पहाड़ी खाद्य सामग्री मुहैया करवाते हैं। साथ ही यह भी पता चला कि नरेश भाई से यमुना घाटी के 500 किसान सीधे जुड़े हुए हैं वैसे से तो नरेश भाई मेरे क्षेत्र रवांई घाटी से ही हैं लेकिन मेरा इनसे पहले से कोई खास परिचय नहीं था। यदि परिचय था भी तो बस इतना भर कि न...