समसामयिक

गांवों में बदलाव की मुहिम छेड़ रहा है गढ़वाल कुमाऊं वार्रियर्स!

गांवों में बदलाव की मुहिम छेड़ रहा है गढ़वाल कुमाऊं वार्रियर्स!

समसामयिक
हिमांतर ब्‍यूरो, नई दिल्लीप्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बीके सामंत ने कहा कि गढ़वाल कुमाऊं वार्रियर्स के तहत हम हर जिले से हमारे इस संगठन में एक लाख लोगों को जोड़ेंगे, उसके उपरांत हमारी कोशिश रहेगी की अपने संगठन के माध्यम से जिलों के हर उन गांवों तक पहुंचें जो सामाजिक व विकास की दृष्टि से पिछड़े हों, इन गांवों को गोद लेने के बाद हम गांवों में शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, पानी, सड़क, रास्ते, खेती, because संस्कृति व खेलों को लेकर व्यापक पैमाने पर काम करेंगे.संगठन उन्होंने आगे कहा कि हम युवाओं में बढ़ रहे नशे के खिलाफ भी निर्णायक मुहिम छेड़ेंगे, गांवों को गोद लेने की हमारे संगठन की एक अपनी प्रक्रिया होगी, जैसे कि गांव की आबादी व गांव से पलायन चुके लोगों की आबादी, अपने गांव से पलायन कर चुके लोगों को हम कैसे उन्हें उनके गांव से जोड़ें इसको लेकर भी हमारे...
भारतीय किसान की चुनौतियां सुलझाना जरूरी…

भारतीय किसान की चुनौतियां सुलझाना जरूरी…

समसामयिक
गाँव और शहर के बीच की बढ़ती खाई ने शहर को ही विकास की नीति का केंद्र बना दियाप्रो. गिरीश्वर मिश्रभारत बहुत दिनों से गाँवों की धरती के रूप में पहचाना जाता रहा है. भारत के परम्परागत सामाज के मौलिक प्रतिनिधि के रूप में गाव को लिया गया. so सन सैतालिस में पचासी प्रतिशत भारतवासी गाँवों में रहते थे. खेती-बाड़ी ही आम जन की आजीविका का मुख्य साधन था. तब भारत की राष्ट्रीय आय में 55 प्रतिशत हिस्सा खेती का था. किसान देश की मजबूती की कड़ी था. राष्ट्र के निर्माण में किसान मुख्य था. because असली  भारत का प्रतिनिधि था गाँव. आर्थिक विकास में सत्तर के दशक की हरित क्रांति के आधार पर भारत खाद्यान्न में आत्म निर्भर हुआ था. सात दशक बाद गाव की यह छवि बदल चुकी है. अब भारत तेजी से आगे बढ़ते शहरों और मध्यवर्ग की छवि वाला हो रहा है.भारतगांव या कृषि क्षेत्र एक बेवजह के भार जैसा, पिछड़ेपन, अशिक्षा और गरी...
पंकज ध्यानी चुने गए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के महासचिव

पंकज ध्यानी चुने गए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के महासचिव

समसामयिक
हिमांतर ब्‍यूरो, नई दिल्‍लीपंकज ध्यानी को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का महासचिव चुना गया है. वह एनएसडी प्रशासन से जुड़े हुए हैं और इससे पहले साल 2010 में भी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के महासचिव चुने गए थे. so उन्होंने आज एनएसडी परिसर but के अभिमंच सभागार में अपने पद की शपथ ली है. पिछले साल नवंबर में एनएसडी कर्मचारी संगठन ने गुप्त मतदान के जरिए पंकज ध्यानी को जनरल सेकेट्री चुना था. पंकज ध्यानी because राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में नौकरी करते हुए रंगमंच के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं. उन्होंने कई बड़े नाट्य निर्देशकों के साथ काम किया है और कई नाटकों का निर्देशन भी किया है. हिमालयमूलत: पौड़ी गढ़वाल के because लैंसडाउन के गिवोली गांव के रहने वाले पंकज 1998-1999 से एनएसडी में नौकरी कर रहे हैं. अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने वर्कर यूनियन के लिए काफी काम किये so और जिन लोगों का प्रम...
राजनीति के अखाड़े में खेती के दांव पेंच  

राजनीति के अखाड़े में खेती के दांव पेंच  

समसामयिक
प्रो. गिरीश्वर मिश्रकिसान आंदोलन को एक  पखवाड़ा बीत चुका  है और गतिरोध ऐसा कि जमी बर्फ पिघलने का नाम ही नहीँ ले रही है. आज खेती किसानी के सवालों को ले कर राजधानी दिल्ली को चारों because ओर से घेर कर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चल कर आए हजारों किसानों का केन्द्रीय सरकार के कानूनों के खिलाफ धरना-आन्दोलन  बदस्तूर जारी है. सरकारी पक्ष के साथ पांच छह दौर की औपचारिक बातचीत में so कृषि से जुडे तीन बिलों के विभिन्न पहलुओं पर घंटों विस्तृत  चर्चा हुई पर अभी तक कोई हल नहीं निकला और दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोई बात नहीं बन पाई है. बीच में आन्दोलन के समर्थन के लिए ‘भारत बंद’ का भी आयोजन हुआ जिसका देश में मिला-जुला असर रहा. अब आन्दोलन को और तेज करने और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है .केन्द्रीय सरकारकिसानों के मन  में कृषि के कार्पोरेट हाथों में दिये जाने की शंका बनी ...
टिहरी में कांग्रेस को बड़ा झटका

टिहरी में कांग्रेस को बड़ा झटका

समसामयिक
जिला पंचायत सदस्य व जिला नियोजन समिति टिहरी के सदस्य अमेन्द्र बिष्ट ने पहनी 'आप' की टोपीइन्‍द्र सिंह नेगी, देहरादून  टिहरी में कांग्रेस के ओबीसी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष, so जनपद में कांग्रेस का सक्रिय युवा, जानकार, संवेदनशील व लगभग सभी वर्गो में समान रूप से लोक प्रिय चेहरा जिला पंचायत सदस्य व जिला नियोजन समिति टिहरी के सदस्य अमेन्द्र बिष्ट ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया की but उपस्थिति में कांग्रेस को अलविदा कह विधिवत् आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर टोपी पहन ली है. अमेन्द्र बिष्ट के इस दाव से कयास लगाया जा सकता है कि वे विधानसभा चुनाव- 2022 में धनोल्टी विधानसभा से प्रत्याशी होगें. विधानसभाअमेन्द्र पिछले कुछ समय से because गोपनीय ढंग से अपनी टीम की राय लेने में व्यस्त थे, भाजपा में पहले से ही नेताओं की लम्बी फेहरिस्त है जहां उनके लिए कोई सम्भावना नजर नहीं आ रही ...
दुनिया में पहली बार हुई वायु प्रदूषण से किसी की मौत!

दुनिया में पहली बार हुई वायु प्रदूषण से किसी की मौत!

समसामयिक
मौत के सात साल बाद कोर्ट ने भी आख़िर माना कि वायु प्रदूषण ने ही ली थी बच्ची की जान!निशांतदुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है कि तमाम सबूतों और गवाहों के बयानात के मद्देनज़र किसी कोर्ट ने वायु प्रदूषण को किसी इन्सान की मौत का ज़िम्मेदार घोषित किया है. प्रदूषण मामला ब्रिटेन का है जहां 9 साल की एला because दुनिया की पहली इंसान है जिसके मृत्यु प्रमाण पत्र पर वायु प्रदूषण को उसकी मौत के कारणों में दर्ज किया गया है. इससे यह सवाल मजबूती से खड़ा हो गया है कि क्या इस बच्ची की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई? यह मामला स्वास्थ्य, स्वच्छ हवा और जीवन जीने के उस अधिकार के बीच संबंधों की तरफ भी ध्यान खींचता है, जिसकी ब्रिटेन तथा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून दोनों में ही because गारंटी दी गई है. साथ ही यह मामला स्पष्ट करता है कि एला दुनिया के विभिन्न शहरों और ग्रामीण एलाकों में विकसित तथा विकासशील द...
योगी आदित्यनाथ फिर नंबर वन…

योगी आदित्यनाथ फिर नंबर वन…

समसामयिक
‘शिखर पर उत्तराखंडी टॉप-50’ वार्षिक रैंकिंग जारीहिमांतर ब्‍यूरो, देहरादूनउत्तराखंड के बेटे-बेटियां किस तरह देश के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग पदों पर रहते हुए महती भूमिका निभा रहे हैं, यह समूचा विश्व देख रहा है. आज राजनीति और कूटनीति, रक्षा और सुरक्षा, गीत-संगीत, कला, योग पर्यावरण, साहित्य और सेवा, हर क्षेत्र में पहाड़ के सपूत सफलता के नए प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं. हिल-मेल पत्रिका ने पहाड़ के ऐसे ही सपूतों पर आधारित अपनी वार्षिक ‘शिखर पर उत्तराखंडी टॉप-50’ रैंकिंग जारी कर दी है. उत्तराखंडीयह सिलसिला देश की राजनीति के फलक पर तेजी से चमक बिखेर रहे यूपी के मुख्यमंत्री और पौड़ी के बेटे योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ बनाए गए जनरल बिपिन रावत, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल नि...
किसानों का असली दुश्मन, जलवायु परिवर्तन

किसानों का असली दुश्मन, जलवायु परिवर्तन

समसामयिक
निशांतफ़िलहाल देश में किसानों का because आन्दोलन मीडिया की सुर्खिया बटोर रहा है. किसानों से जुड़ी हर रिपोर्ट में एमएसपी और आढ़ती शब्द जगह बनाए हुए हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन एक ऐसा शब्द युग्म है जिसका प्रयोग किसानों और किसानी के संदर्भ में ज़्यादा से ज़्यादा होना चाहिए.मीडिया इसकी वजह यह है कि भारतीय किसानों का सबसे बड़ा दुश्मन जलवायु परिवर्तन है. लेकिन समस्या यह है कि इस दुश्मन को न किसान देख पा रहे हैं हैं उन्हें मीडिया दिखा रही है. because फ़िलहाल, ताज़ा ख़बर ये है कि भारतीय किसान पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की चपेट में हैं. औसत वार्षिक तापमान बढ़ने से फसल की पैदावार/ उपज में गिरावट आई है और बेमौसम बारिश और भारी बाढ़ से फसल क्षति के क्षेत्र में वृद्धि हो रही है. यह सारी जानकारी आज क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा जारी एक रिपोर्ट से मिलती है. इस ब्रीफिंग रिपोर्ट में बताया गया है कि कै...
घड़ी परीक्षा की  है पर हिम्मत न हारें  

घड़ी परीक्षा की  है पर हिम्मत न हारें  

समसामयिक
प्रो. गिरीश्वर मिश्रआज कोरोना की महामारी ने ठण्ड because और प्रदूषण के साथ मिल कर आम आदमी की जिन्दगी की मुश्किलों को बहुत बढ़ा दिया है. बहुत कुछ अचानक हो रहा है और उसके साथ जुड़ी चिंता, परेशानी, कुंठा, व्यथा  दुःख की विभीषिका की तरह चल रही है. प्रिय जन को खोना, नौकरी छूट जाना, गंभीर रोग, दुर्घटना, त्रासदी जैसे भयानक अनुभव से गुजर कर उठना और आगे बढ़ना एक कठिन चुनौती होती है पर वह असंभव नहीं है. इस दौरान ऎसी कई कहानियां भी सुनने, पढने या देखने को मिल रही हैं जिनमें लोग कठिन परिस्थिति से उबर कर आगे बढ़ते हैं. so ऐसी स्थिति में जब खुद को पाते हैं तो क्या करें? अपनी व्यथा से कैसे पेश आएं?  ऐसे सवालों का कोई सीधे-सीधे उत्तर नहीं है. इस हाल में प्रतिरोध या जूझने की क्षमता (रेसीलिएंस) का विचार मदद करता है. जूझने का दम हो तो आदमी जीवन की कठिन परिस्थिति मे या कहें तनाव या त्रासद घड़ी से उबर कर  वापस ...
सर्दियों के इस मौसम में पर्यटकों के स्वागत को तैयार है औली

सर्दियों के इस मौसम में पर्यटकों के स्वागत को तैयार है औली

समसामयिक
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनउत्तराखंड में because बहुत से पर्यटन स्थल हैं जो अपनी प्राकृतिक सुदंरता से सैलानियों को चकित कर देते हैं. उत्तराखंड पर्यटन का ऐसा ही एक नगीना है औली. परिलोक सा खूबसूरत औली शांत प्रकृति की गोद में स्थित है. यहां से हिमालय के शिखरों का भव्य नजारा भी दिखाई देता है और स्कीइंग के लिए अनुकूल ढलानें भी रोमांचित करती हैं. औली में पर्यटकों को जो मंत्रमुग्ध करने वाला अनुभव प्राप्त होता है वही इस because बात का साक्ष्य है कि औली भारत के सर्वश्रेष्ठ चुनिंदा विंटर डेस्टिनेशंस में से एक है. उत्तराखंड देश में सर्दियों के मौसम की because आमद हो चुकी है, ऐसे में उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय के चमोली जिले में स्थित औली स्की रिजॉर्ट और हिल स्टेशन सर्दियों के पर्यटन हेतु पर्यटकों का स्वागत करने को बिल्कुल तैयार है. औली‘‘उत्तराखण्ड because राज्य में औली विशेष रूप से सर्दियों में...