
कोरोना काल : सजग रहकर दूरदर्शी व्यवहार अपनाने का वक्त
डॉ. अरुण कुकसालआज के कोरोना काल में पर्वतीय अंचलों के ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक जीवन में आने वाली चुनौतियों को समझने से पहले विगत शताब्दी में पहाड़ी गांवों के क्रमबद्ध बदलते मिजाज को मेरे गांव चामी के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं.
अपने गांव चामी (असवालस्यूं) पौड़ी गढ़वाल में रहते हुए मैं अभी भी उन मौलिक कारणों को समझने की प्रक्रिया में हूं जो गांव के युवाओं को देश के मैदानी नगरों और महानगरों की ओर धकलने के लिए प्रेरित करते हैं. मेरा चिंतन इस ओर भी है कि आखिर वे कौन से कारण हैं जिनके वशीभूत होकर अधिकांश प्रवासी वापस अपने गांव नहीं आये. मैं अपने आपको बैकगियर में ले जाता हूं तो याद आता है, बचपन. स्वावलम्बी और सम्पन्न समाज में पल्लवित सहज, सरल और आत्मसम्मान से भरपूर, बचपन. बचपन की यादें सुख की वह गठरी है जिसे जब चाहें मन के सबसे नाजुक कोने में चुपचाप खोलकर परम आनन्द की अनुभूति प्राप्त की ज...









