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महावीर रवांल्टा समेत नौ साहित्यकारों को उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान

महावीर रवांल्टा समेत नौ साहित्यकारों को उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान

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महावीर रवांल्टा समेत नौ साहित्यकारों को उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मानदेहरादून: मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में उत्तराखण्ड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित साहित्य गौरव सम्मान समारोह तथा लोक भाषा सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा समेत 9 साहित्यकारों को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजनों से प्रदेश में स्थानीय भाषाओं के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली बोलियों व उनमें रचे जा रहे साहित्य को भी प्रोत्साहन मिलेगा। देश के अनेक साहित्यकारों ने हिन्दी को विश्व पटल पर स्थापित करने में महान योगदान दिया है।उन्होंने कहा कि हमारे यहां गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी बोलियां बोली जाती हैं परन्तु हमारे प्रदेश का हिन्दी से गहरा लगाव है। उन्होंने इसे सुखद संयोग बताया कि साहित्य गौरव सम्मान पान...

उत्तराखंड: यूनिफार्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार, आज हो सकता है बड़ा ऐलान!

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उत्तराखंड: यूनिफार्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार, आज हो सकता है बड़ा ऐलान!देहरादून: यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) को लेकर देशभर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीति भी चरम पर है। PM मोदी के बयान के वाद पूरे देश में यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) को लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है। इस बीच उत्तराखंड से बड़ी खबर है। जानकारी के अनुसार उत्तराखंड यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। CM धामी ने कुछ दिनों पहले कहा था कि 30 जून तक ड्राफ्ट तैयार हो जाएगा। UCC को लेकर बनाई गई कमेटी आज दिल्ली में पत्रकार वार्ता करने वाली है। उत्तराखंड : ‘जसवंतगढ़’ के नाम से जाना जाएगा ‘लैंसडौन’, रक्षा मंत्रालय लगाएगा मुहर!  माना जा रहा है कि यूसीसी कमेटी आज यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर सकती है। उत्तराखंड का ड्राफ्ट सामने आने के बाद गुजरात और मध्य प्रदेश में भी इसको लागू करने का ऐलान हो सकत...

उत्तराखंड मौसम अपडेट: अगले चार दिन के लिए येलो अलर्ट, इन जिलों होगी बारिश!

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उत्तराखंड मौसम अपडेट: अगले चार दिन के लिए येलो अलर्ट, इन जिलों होगी बारिश!देहरादून: मॉनसून के पहुंचने के बाद से ही लगातार बादल बरस रहे हैं। देशभर के विभिन्न राज्यों के साथ ही उत्तराखंड में भी असमानी आफत बरस रही है। लगातार बारिश के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ी जिलों में भूस्खलन हो रहा है, जिसके चलते कई मार्ग भी बंद हो गए हैं। लगातार खतरा बना हुआ है। नदी-नाले उफार पर हैं। इस बीच मौसम विभाग ने एक बार फिर देहरादून सहित नैनीताल, टिहरी, पौड़ी, चमोली और बागेश्वर में अगले चार दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है। इन जनपदों में कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ ही गरज-चमक के साथ बिजली चमक सकती है। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया, तीन जुलाई तक प्रदेश के इन जनपदों में भारी बारिश के आसार हैं। साथ ही पर्वतीय जनपदों में कहीं-कहीं ...
उत्तराखंड :  ‘जसवंतगढ़’ के नाम से जाना जाएगा ‘लैंसडौन’, रक्षा मंत्रालय लगाएगा मुहर!

उत्तराखंड : ‘जसवंतगढ़’ के नाम से जाना जाएगा ‘लैंसडौन’, रक्षा मंत्रालय लगाएगा मुहर!

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उत्तराखंड : ‘जसवंतगढ़’ के नाम से जाना जाएगा ‘लैंसडौन’, रक्षा मंत्रालय लगाएगा मुहर!लैंसडौन : लैंसडौन ये वो नाम है, जो उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश और दुनिया के पर्यटन प्रेमियों की पहली पंसद है। यहां हर साल देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही दूसरे देशों के पर्यटक भी घूमने पहुंचते हैं। यह गढ़वाल राइफल का रेजिमेंटल सेंटर भी है। यहीं पर गढ़वाल राइफल के योद्धाओं को तैयार किया जाता है। केंद्र सरकार ने अंग्रेजों के जमानें की पहाचन बो बदलने की एक मुहिम शुरू की थी। उसीके तहत लैंसडौन का नाम बदले जाने चर्चा लंबे समय से चल रही है। लैंसडौन का नाम बदलने की घोषणा के बाद से ही स्थानीय लोग लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। लैंसडौन का नाम बदलना कहीं ना कहीं इस हिल स्टेशन की पहचान को पूरी तरह से बदलने जैसा है। लोगों ने नाम बदलने की चर्चा सामने आने के बाद ही विरोध दर्ज करा दिया था। उसके बाद मामला कुछ समय के लिए ठंडे बस...
कभी घर की रसोई में बादशाहत थी कांसे के बर्तनों की

कभी घर की रसोई में बादशाहत थी कांसे के बर्तनों की

साहित्‍य-संस्कृति
भुवन चंद्र पंत पांच-छः दशक पहले तक पीतल, तांबे और कांसे के बर्तनों की जो धाक घरों में हुआ करती, उससे उस घर की सम्पन्नता का परिचय मिलता. रईस परिवारों में चांदी के बर्तनों की जो अहमियत थी, सामान्य परिवारों में कांसे के बर्तन को वही सम्मान दिया जाता. पानी के लिए तांबे का फौव (गगरी) तो हर घर की शान हुआ करता. तब ’आर ओ’ व ’वाटर फिल्टर’ जैसे उपकरण नहीं थे और पानी की शुद्धता के लिए तांबे के बर्तनों का प्रयोग ही एकमात्र विकल्प था. सामान्य परिवारों में कलई की हुई पीतल की थालियां आम थी, जब कि कांसे की थालियां व अन्य बर्तन प्रत्येक घर में सीमित संख्या में होते और इन्हें सहेज कर जतन से रखा जाता. घर में कांसे के एक दो ही बर्तन होते तो घर के मुखिया को ही कांसे की थाली में भोजन परोसा जाता. पीतल की कलई युक्त थालियों का कुछ समय प्रयोग करने के बाद उनकी कलई उतर जाती और पीतल का असली रंग उभर आता. पीतल के कलई ...
कैलाश पर्वत : अब भारत से भी होंगे दर्शन

कैलाश पर्वत : अब भारत से भी होंगे दर्शन

पिथौरागढ़
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लिपुलेख से कैलाश पर्वत के दर्शन संभव है. स्थानीय लोगों ने जब चीन सीमा पर बसे ओल्ड लिपुपास की पहाड़ी से कैलाश पर्वत के दर्शन किये. उसके बाद उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इसके बारे में बताया. जिसके बाद जिला प्रशासन इस इलाके में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं की तलाश में जुट गया है.पिथौरागढ़ राज्य के साथ ही यह पूरे भारत के लिए गौरव की बात है जो भी श्रद्धालु काफी समय से कैलास मानसरोवर यात्रा नहीं होने से मायूस है वे यात्री अब पिथौरागढ़ से ही कैलास दर्शन कर सकते हैं यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है. इससे हमारा सीमांत क्षेत्र पयर्टन के क्षेत्र में आगे बढेगा और जो कैलास मानसरोवर को लेकर पिथौरागढ़ की जो पहचान थी वह दोबारा उसको मिल सकेगी. सरकार और प्रशासन को इस ओर जल्दी से जल्दी ध्यान देना चाहिए ताकि ऐसा रास्ता निकाला जाये कि पिथौरागढ़ से ही कैलास के दर्शन हो सके. पयर्टन विभाग के ...
प्रख्यात साहित्यकार महावीर रवांल्टा को मिलेगा ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव’ सम्मान

प्रख्यात साहित्यकार महावीर रवांल्टा को मिलेगा ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव’ सम्मान

उत्तरकाशी
उत्तरकाशी: देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार महावीर रवांल्टा को उत्तराखंड भाषा संस्थान की ओर से उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया जाएगा. यह रवांई और रवांल्टी भाषा के लिए गौरव का पल है. महावीर रवांल्टा को हिन्दी साहित्य के लिए इससे पहले भी कई सम्मान मिल चुके हैं. उनके सम्मानों की सूची भले ही कितनी ही लंबी क्यों ना हो, लेकिन लोकभाषा के लिए मिलने वाला यह सम्मान उनके लिए बहुत मायने रखता है. सम्मान की घोषणा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की थी. इसके तहत राज्य की भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन करने वाले लोकभाषा साहित्यकारों का चयन किया जाना था. इसके लिए बाकायदा एक समिति का गठन किया गया था. चयन समिति ने रवांल्टी के लिए महावीर रवांल्टा का चयन किया. यह सम्मान 30 जून को सर्व चौक स्थिति आईआडीटी ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देंगे.मुझे बहुत सम्मान मिले हैं, लेकिन अपनी लोकभाषा ...
मेरे हिस्से का आपातकाल

मेरे हिस्से का आपातकाल

संस्मरण
चारु तिवारी अंधेरी काली रातें. तारों से भरा आसमान. कड़कड़ाती ठंड़. चांद भी जैसे सुबह होने का इंतजार कर रहा हो. अभी ‘ब्यांण तार’ आने में देर थी. घाटी में बसे इस छोटे से कस्बे के चारों ओर गांव ही गांव. कहीं कोई आहट नहीं. चिड़ियों ने भी अपना ‘घोल’ नहीं छोड़ा है. रात खुलने के अभी कोई संकेत नहीं. दूर शियारों की ‘टुक्याव ’ (बोलने की आवाज) अभी आयी नहीं. बगल के गांव रावलसेरा के मुर्गे तो और देर में बांग देते हैं. बाहर खेतों में दूर तक बिछी ‘तुषार’ (रात को गिरी ओस का सख्त होना) की सफेद चादर. जहां पानी रुका हैं वहां ‘खांकर’ (पानी का जमना) जम गई है. सोचता था पिताजी इतनी जल्दी उठ क्यों जाते हैं? स्कूल जाने का समय भी दस बजे का है. इतनी जल्दी पिताजी जाते कहां हैं? ईजा से एक-दो बार पूछा तो वह भी टाल गई. बहुत बाद में पता चला कि देश में आपातकाल लगा है. सरकारी कर्मचारियों से सख्ती है. नौकरी बचानी है तो इंदिरा ग...
उत्तराखंड: मठ-मंदिरों के प्रति मैं श्रद्धा से नतमस्तक हो गई

उत्तराखंड: मठ-मंदिरों के प्रति मैं श्रद्धा से नतमस्तक हो गई

संस्मरण
जाख देवता (गुप्तकाशी) जाखधार देवशालसुनीता भट्ट पैन्यूली यात्राओं का एक नैतिक व सकारात्मक कर्म यह भी होना चाहिए कि जहां-जहां हम जाते हैं, रहगुज़र जिस पर भी हमारी दृष्टि पड़ती है उसके बारे में कौतुहल, जिज्ञासा  इतनी विकराल होनी चाहिए कि हम उस वैशिष्ट्य और वैविध्य को दूसरों के संज्ञान में भी ला सकें. यदि हम पौराणिक और धार्मिक स्थलों की यात्रा पर हैं तो यात्रायें निश्चित ही अपनी  परंपराओं और अपने सांस्कृतिक गौरव को बल देने के उद्देश्य से भी प्रेरित होनी चाहिए. अभी हाल ही में गुप्तकाशी जाना हुआ. गुप्तकाशी अपने आप में ही एक पौराणिक और सांस्कृतिक वैभव की नगरी है.केदारघाटी के जाख देवता जिन्हें यहां के स्थानीय निवासी यक्ष के रूप में पूजते हैं,अपने रहस्यमयी और चमत्कारिक अवतरण के लिए देश-विदेश में भी प्रख्यात हैं. कहा जाता है कि जाख देवता अपने पशवा पर अवतरित होकर जलते अंगारों पर नृत्य करता...
पुरोला : आसमानी बिजली गिरने से एक युवक की मौत

पुरोला : आसमानी बिजली गिरने से एक युवक की मौत

उत्तरकाशी
पुरोला. तहसील के अंतर्गत रविवार को आसमानी बिजली गिरने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गये। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया है. मिली जानकारी के अनुसार पुरोला तहसील के ग्राम कंडियाल गांव में खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों के ऊपर आकाशीय बिजली गिरने से उसकी चपेट में आने से अभिषेक (20) पुत्र धीरपाल सिंह की मौत हो गई. जबकि निखिल (17) पुत्र खुशपाल अशोक (14) पुत्र धीरपाल व चंद्र सिंह (58) पुत्र जयपाल सिंह गंभीर घायल हो गए, घायलों को बर्फिया लाला जुवांठा जिला उप चिकित्सालय पुरोला में प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया. बताया जा रहा है सभी लोग क्यारियों में धान की रोपाई का काम कर रहे थे, युवक की असमय दर्दनाक मौत से गांव में मातम छा गया है....