एक लंबे संघर्ष की कहानी है “माऊंटेन विलेज स्टे-धराली हाईट्स”

एक लंबे संघर्ष की कहानी है “माऊंटेन विलेज स्टे-धराली हाईट्स”

विनय केडी समय कि उपलब्धता के अनुसार छोटी—छोटी यात्राएं बनाते हुए जानकारियां एकत्रित करने के काम को जारी रखा। और इन सभी यात्राओं से यह समझ में आ गया था कि आध्यात्मिक पर्यटन के साथ—साथ ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं पर भी काम करना होगा अन्यथा हासिल शून्य ही रहेगा।  18 अप्रैल वर्ष 2009 में आध्यात्मिक […]

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 वो बकरी वाली…

वो बकरी वाली…

अनीता मैठाणी उसका रंग तांबे जैसा था। बाल भी लगभग तांबे जैसे रंगीन थे। पर वे बाल कम, बरगद के पेड़ से झूलती जटाएं ज्यादा लगते थे। हां, साधु बाबाओं की जटाओं की तरह आपस में लिपटे, डोरी जैसे। सिर के ऊपरी हिस्से पर एक सूती कपड़े की पगड़ी—सी हमेशा बंधी रहती थी। चेहरे से […]

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 चाय बनाने की नौकरी से सीईओ तक का सफर

चाय बनाने की नौकरी से सीईओ तक का सफर

नरेश नौटियाल मन की बात भाग-1 15 जूलाई, 2002 से शुरू हुआ सफर आज भी जारी है। मै सन् 2002 मे बड़कोट डिग्री कालेज बी० ए० द्वितीय वर्ष की पढ़ाई रेगुलर कर रहा था। कालेज के दिनों की बात ही निराली होती है, दोस्तों के साथ खूब मौज—मस्ती, हंसी—मजाक, कालेज के दिनों के चुनावों मे […]

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 हर दिल अजीज थी वह

हर दिल अजीज थी वह

अनीता मैठाणी  ये उन दिनों की बात है जब हम बाॅम्बे में नेवी नगर, कोलाबा में रहते थे। तब मुम्बई को बाॅम्बे या बम्बई कहा जाता था। श्यामली के आने की आहट उसके पांव में पड़े बड़े-बड़े घुंघरूओं वाले पाजेब से पिछली बिल्डिंग से ही सुनाई दे जाती थी। उसका आना आमने-सामने की बिल्डिंग में […]

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 रवाँई यात्रा – भाग—3  (अंतिम किस्त )

रवाँई यात्रा – भाग—3  (अंतिम किस्त )

भार्गव चन्दोला, देहरादून महोत्सव के अंतिम दिन सुबह आंख खुली तो ठंड का अहसास रजाई से बाहर आकर ही हुआ। नौगांव फारेस्ट गेस्ट हाउस के बाहर आये तो देखा चारों तरफ से बांज देवदार के पेड़ों के बीच सुनसान जगह पर गेस्ट हाउस बना है, आसपास का दृश्य बेहद रूमानी था मगर बांज बुरांश देवदार […]

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 रवाँई यात्रा – भाग-2

रवाँई यात्रा – भाग-2

भार्गव चंदोला 28, 29, 30 दिसंबर, 2019 उत्तरकाशी जनपद की रवांई घाटी के नौगांव में तृतीय #रवाँई_लोक_महोत्सव अगली सुबह आंख खुली तो बाहर चिड़ियों की चहकने की आवाज रजाई के अंदर कानों तक गूंजने लगी, सर्दी की ठिठुरन इतनी थी की मूहं से रजाई हटाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। कुछ समय बिता तो […]

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 ‘रवाँई यात्रा- भाग -1’

‘रवाँई यात्रा- भाग -1’

प्रकृति, पहाड़, घाटी, यमुना नदी के मनोरम दृश्यों को निहारते हुए यमुना पुल पार कर माछ भात खाने रुके, यहां पर एक बंगाली परिवार है जिसका माछ भात का स्वाद आज उस दिशा में सफर करने वाले यात्रियों की पहली पसंद बना हुआ है भार्गव चंदोला 28, 29, 30 दिसंबर, 2019 को उत्तरकाशी जनपद की […]

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 शहरों ने बदल दी है हमारी घुघती

शहरों ने बदल दी है हमारी घुघती

 ललित फुलारा शहर त्योहारों को या तो भुला देते हैं या उनके मायने बदल देते हैं। किसी चीज को भूलना मतलब हमारी स्मृतियों का लोप होना। स्मृति लोप होने का मतलब, संवेदनाओं का घुट जाना, सामाजिकता का हृास हो जाना और उपभोग की संस्कृति का हिस्सा बन जाना। शहर त्योहारों को आयोजन में तब्दील कर […]

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 अब न वो घुघुती रही और न आसमान में कौवे

अब न वो घुघुती रही और न आसमान में कौवे

हम लोग बचपन में जिस त्योहार का बेसब्री से इंतजार करते थे वह दिवाली या होली नहीं बल्कि ‘घुघुतिया’ था। प्रकाश चंद्र भारत की विविधता के कई आयाम हैं इसमें बोली से लेकर रीति-रिवाज़, त्योहार, खान-पान, पहनावा और इन सबसे मिलकर बनने वाली जीवन पद्धति। इस जीवन पद्धति में लोककथाओं व लोक आस्था का बड़ा […]

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 कोठी जिसने बनाया कोटी को ‘कोटी’

कोठी जिसने बनाया कोटी को ‘कोटी’

दिनेश रावत रवांई क्षेत्र अपनी जिस भवन शैली के लिए विख्यात है वह है क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बने चौकट। चौकट शैली के ये भवन यद्यपि विभिन्न गांवों में अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं मगर इन सबका सिरमोर कोटी बनाल का छः मंजिला चौकट ही है, जो 1991 की विनाशकारी भूकम्प सहित समय-समय पर […]

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