जागेश्वर धाम में पेड़ काटे जाने का CM धामी ने लिया संज्ञान

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जागेश्वर में एक हजार पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही थी। जिसका स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी लगातार विरोध कर रहे थे। यहां तक की इन पेड़ों को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर #savejageshwar की मुहिम भी चल रही है। जिसके बाद सीएम धामी ने इसका संज्ञान ले लिया।

पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट जागेश्वर धाम के सौंदर्यीकरण को लेकर आरतोला से जागेश्वर धाम तक सड़क का चौड़ीकरण किया जाना है। जिसके लिए एक हजार देवदार के पेड़ों का काटा जा रहा है। जिसका ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे थे। लेकिन अब खबर सामने आ रही है कि इस मामले का सीएम धामी ने खुद संज्ञान लिया है और अधिकारियों को दोबारा सर्वे करने के निर्देश दिए हैं।

 

सीएम धामी ने जागेश्वर में मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण कार्य में पेड़ों के संभावित कटान के मामले में दोबारा सर्वे कराए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। बता दें कि जागेश्वर धाम में सड़क चौड़ीकरण को देवदार के 1000 पेड काटे जाने प्रस्तावित हैं। जिसके लिए पेड़ों पर निशान लगाने की प्रक्रिया को भी पूरा कर लिया गया था। ग्रामीण लगातार इसका विरोध कर रहे थे। सीएम के निर्देश के बाद से लोगों के बीच इसे लेकर उम्मीद जगी है।

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जागेश्वर में पेड़ काटे जाने का मामला गरमाया हुआ है। सोशल मीडिया पर सेव जागेश्वर की मुहिम चल रही है। ये मुद्दा तब गरमाया जब वन विभाग ने सर्वे पूरा कर एक हजार पेड़ों को काटने की प्रक्रिया के तहत एक हजार पेड़ों को चिह्नित कर उन पर नंबर डाल दिया था। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया।

लोगों का कहना है कि वो किसी भी कीमत पर इन पेड़ों को हीं कटने देंगे क्योंकि इनके साथ उनकी आस्था जुड़ी हुई है। हिंदू मान्यताओं की तो देवदार को देवदारु भी कहा जाता है इसका मतलब होता है भगवान की लकड़ी। मान्यता है की देवदार के पेड़ों में भगवान शिव का निवास स्थान होता है।

इसके अलावा इन देवदार के पेड़ों की तुलना शिव की जटाओं से की जाती है। लोगों की इनके प्रति गहरी आस्था है। इस मामले में जागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी हेमंत भट्ट ने कहा कि पेड़ों को किसी भी कीमत पर नहीं कटने देंगे। इसके साथ ही स्थानीय लोगों का भी कहना है कि वो इन पेड़ों को किसी भी कीमत पर नहीं कटने देंगे। 

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