Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
2020 रहा मानव इतिहास का सबसे गर्म साल 

2020 रहा मानव इतिहास का सबसे गर्म साल 

पर्यावरण
निशांतफ़िलहाल मानव इतिहास में अब तक का सबसे गर्म साल 2016 को माना जाता था. लेकिन अब, 2020 को भी अब तक का सबसे गर्म साल कहा जायेगा. दरअसल यूरोपीय संघ के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम (अर्त ऑब्ज़र्वेशन प्रोग्राम), कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने घोषणा कर दी है कि ला-नीना, एक आवर्ती मौसम की घटना जिसका वैश्विक तापमान पर ठंडा प्रभाव पड़ता है, के बावजूद 2020 के दौरान असामान्य उच्च तापमान रहे और पिछले रिकॉर्ड-धारक 2016 के साथ अब 2020 भी सबसे गर्म वर्ष के रूप में दर्ज किया गया है. यह घोषणा एक चिंताजनक प्रवृत्ति की निरंतरता की पुष्टि करती है, पिछले छह वर्ष लगातार रिकॉर्ड पर सबसे गर्म रहे हैं. यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के लिए देशों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है, जो मुख्य रूप से ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार हैं. जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि पेरिस समझौते को पूरा करने के लिए वर्तमान ...
पंकज ध्यानी चुने गए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के महासचिव

पंकज ध्यानी चुने गए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के महासचिव

समसामयिक
हिमांतर ब्‍यूरो, नई दिल्‍लीपंकज ध्यानी को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का महासचिव चुना गया है. वह एनएसडी प्रशासन से जुड़े हुए हैं और इससे पहले साल 2010 में भी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के महासचिव चुने गए थे. so उन्होंने आज एनएसडी परिसर but के अभिमंच सभागार में अपने पद की शपथ ली है. पिछले साल नवंबर में एनएसडी कर्मचारी संगठन ने गुप्त मतदान के जरिए पंकज ध्यानी को जनरल सेकेट्री चुना था. पंकज ध्यानी because राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में नौकरी करते हुए रंगमंच के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं. उन्होंने कई बड़े नाट्य निर्देशकों के साथ काम किया है और कई नाटकों का निर्देशन भी किया है. हिमालयमूलत: पौड़ी गढ़वाल के because लैंसडाउन के गिवोली गांव के रहने वाले पंकज 1998-1999 से एनएसडी में नौकरी कर रहे हैं. अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने वर्कर यूनियन के लिए काफी काम किये so और जिन लोगों का प्रम...
उत्तराखण्ड में जल-प्रबन्धन तथा जलवैज्ञानिकों की रिपोर्ट

उत्तराखण्ड में जल-प्रबन्धन तथा जलवैज्ञानिकों की रिपोर्ट

जल-विज्ञान
भारत की जल संस्कृति-32डॉ. मोहन चंद तिवारीउत्तराखण्ड में जल-प्रबन्धन-3 भारत के लगभग 5 लाख वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल में स्थित उत्तर पश्चिम से उत्तर पूर्व तक फैली हिमालय की पर्वत शृंखलाएं न केवल प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल, वनस्पति‚ वन्यजीव, खनिज पदार्थ जड़ी-बूटियों का विशाल भंडार हैं, बल्कि देश में होने वाली मानसूनी वर्षा तथा तथा because विभिन्न ऋतुओं के मौसम को नियंत्रित करने में भी इनकी अहम भूमिका है. हिमालय पर्वत से प्रवाहित होने वाली नदियों एवं वहां के ग्लेशियरों से पिघलने वाले जलस्रोतों के द्वारा ही उत्तराखण्ड हिमालय के निवासियों की जलापूर्ति होती आई है. जनसंख्या की वृद्धि तथा समूचे क्षेत्र में अन्धाधुंध विकास की योजनाओं के कारण भी स्वतः स्फूर्त होने वाले हिमालय के ये प्राकृतिक जलस्रोत सूखते जा रहे हैं तथा भूगर्भीय जलस्तर में भी गिरावट आ रही है. पर्यावरण सम्बन्धी इसी पारिस्थितिकी ...
उत्तराखण्ड में कोविड 19 एकेडमी का शुभारंभ

उत्तराखण्ड में कोविड 19 एकेडमी का शुभारंभ

देहरादून
वर्चुअल क्लास के माध्यम से ऑनलाइन दिया जाएगा प्रशिक्षण सामाजिक संगठनों के इंटर एजेन्सी ग्रुप उत्तराखण्ड, स्फेयर एकेडमी और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण संयुक्त रूप से संचालित करेंगे कोरोना कोविड से बचाव के पाठ्यक्रमहिमांतर ब्‍यूरो, देहरादूनउत्तराखण्ड उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, स्फेयर एकेडमी एवं आई.ए.जी. के संयुक्त तत्वाधान में आज उत्तराखण्ड सचिवालय में कोविड 19 but एकेडमी का शुभारंभ किया गया. राज्य के सचिव आपदा प्रबंधन श्री एस.ए. मुरूगेशन ने वर्चुअल माध्यम से ऑनलाइन कोविड एकेडमी का लोकार्पण किया. so श्री मुरूगेशन ने सभी प्रतिभागियों का आह्वान करते हुए कहा कि आज के कोविड-19 के इस दौर में कोरोना के प्रति व्यापक जन जागरूकता और कोविड एपरोप्रिएट बिहेवियर को जरूर अपनायें.समाज समाज के अति because आवश्यकता वाले निर्धन, सबसे संवेदनशील और जोखिम वाले जनस...
पृथ्वी पर अगर कहीं स्वर्ग है तो…

पृथ्वी पर अगर कहीं स्वर्ग है तो…

ट्रैवलॉग
मेरी कश्मीर यात्रा, भाग—1डॉ. हेम चन्द्र सकलानीलगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर की यात्रा वह भी विश्व के सबसे सुन्दरतम स्थानों में से एक, जहां पृथ्वी की सुन्दरता के साथ प्रकृति ने अपना सम्पूर्ण सौंदर्य लुटाया हो, विश्व के प्रसिद्व हिमच्छादित दर्रों, ग्लेशियरों, सूर्य की रोशनी में दमकते हिम मण्डित शिखरों की, विश्व के सबसे अधिक ऊंचाई से गुजरने वाले मोटर मार्गों से गुजरना, बर्फ से जमी झीलों, नदियों को देखना, एक ऐसी झील को स्पर्श करना जिसका 90 किलोमीटर क्षेत्र चीन में और 45 किलोमीटर क्षेत्र भारत में हो, जो अपने तीन रंगों, पारदर्शी, हरे रंग,नीले रंग से सबको मोहित कर दे, एक ऐसा क्षेत्र जो मटमैले रंग के पहाड़ों से घिरा हो, जिसमें वनस्पति का हरापन कहीं भी न हो, बर्फिले रेगिस्तान जहां आक्सिजन की कमी, दिल का धड़कना बंद कर दे, ऐसी जगह की यात्रा करने का मन तो हमेशा करता रहा पर ऐसा स्वप्न में भी पूरा...
पगडंडी

पगडंडी

संस्मरण
वो बचपन की सारी यादें…दीपशिखा गुसाईं ‘दीप’आज फिर उसी पगडण्डी से होते हुए चलती हुई उन यादों में खो जाती हूँ, अपने गांव और गांव के नीचे बहती अलकनंदा की कलरव करती मधुर आवाज, सामने वही मेरा दृढ पहाड़, वही मेरे गांव के सरसों के खेत मानों मेरे आने पर पीली ओढ़नी ओढ़े बसंत संग मेरे आने के स्वागत में दोनों हाथों को फैलाये हो… इस बार फिर वही अहसास साथ "दी" का सारी यादें ताजा कर गई… वो बचपन की सारी यादें.बचपनउन दिनों सुबहें कितनी जल्दी हुआ करतीं थीं, शामें भी कुछ जल्दी घिर आया करती थीं तब... फूलों की महक भीनी हुआ करती थी और तितलियाँ रंगीन, और इन्द्रधनुष के रंग थोड़े चमकीले, थोड़े गीले हुआ करते थे, आँखों में तैरते ख़्वाब, सुबह होते ही चीं-चीं करती गौरैया छत पर आ जाया करतीं थीं दाना चुगने, उस प्यारी सी आवाज़ से जब नींदें टूटा करती थीं तो बरबस ही एक मुस्कुराहट तैर जाया करती थी होंठों पर.....
उत्तराखंड का स्वाद: सिलबट्टा नमक…

उत्तराखंड का स्वाद: सिलबट्टा नमक…

सेहत
नितीश डोभाल"नमक स्वाद अनुसार" because आपने ये बात कहीं न कहीं जरूर सुनी होगी और इसी से हमको नमक की जरूरत का भी पता चलता है. सदियों से नमक हमारे भोजन का बड़ा ही महत्वपूर्ण अंग रहा है. खाने की ज्यादातर चीजों में नमक का प्रयोग ही इसकी उपयोगिता को सिद्ध करने के लिए काफी है. नमक न केवल खाने में स्वाद बढ़ाता है बल्कि because यह खाने की कुछ चीजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के काम भी आता है. हमारे रोज के भोजन में इस्तेमाल होने के अलावा नमक दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों और घरेलू नुस्खों में भी प्रयोग किया जाता है. नमकवैसे तो नमक के कई प्रकार हैं, साधारण समुद्री नमक, हिमालयन नमक, कोशर नमक, सेंधा नमक आदि. इन सब में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है because साधारण नमक. साधारण नमक से जुड़ी कई कहावतें, किस्से-कहानियाँ हमको सुनने को मिल जाती हैं जिससे पता चलता है कि नमक का मानव जीवन के साथ गहरा संबंध ...
क्यों रिश्तों को छीन रहे हो?

क्यों रिश्तों को छीन रहे हो?

कविताएं
भुवन चन्द्र पन्तछीन लिया है अमन चैन सब, जब से तुमने पांव पसारे। हर घर में मेहमान बने हो, सिरहाने पर सांझ-सकारे।।भुला दिये हैं तुमने अब तो, रिश्तों के संवाद सुरीले। सारे रिश्ते धता बताकर, बन बैठे हो मित्र छबीले।।सब के घर में रहने पर भी, ऐसी खामोशी है छाई। बतियाते हैं सब तुमसे ही, मम्मी-पापा, बहना भाई।।घर के रिश्ते मूक बने हैं, तुमसे रिश्ता जोड़ रहे हैं। खुद-रोते हंसते तेरे संग, हमसे नाता छोड़ रहे हैं।।नन्हें से बच्चे तक को भी, तुमने ऐसे मोह में जकड़ा। रोता बच्चा चुप हो जाये, ज्यों ही उसने तुमको पकड़ा।।गुस्से में मैं बोला इक दिन, क्यों रिश्तों को छीन रहे हो? हमसे इतना प्यार जताने, को तुम क्यों शौकीन रहे हो?चुपके से आकर वो बोला, खता न मेरी खुद को रोको। यकीं नही मेरी बातों पर, मुझको इस पत्थर पर ठोको।।कसम तुम्हारी ऊफ न करूंगा, चाहे कितना भी धोओगे। पर ये सच है...
नव वर्ष 2021 हरिद्वार कुम्भ का भी लोकमंगलकारी वर्ष है

नव वर्ष 2021 हरिद्वार कुम्भ का भी लोकमंगलकारी वर्ष है

साहित्‍य-संस्कृति
डॉ. मोहन चंद तिवारीप्रति वर्ष 31 दिसंबर को काल की एक वर्त्तमान पर्याय रात्रि 12 बजे अपने अंत की ओर अग्रसर होती है तो दूसरी पर्याय नए वर्ष के रूप में पदार्पण भी करती है.काल के इसी संक्रमण की वेला को अंग्रेजी केलेंडर के अनुसार नववर्ष का आगमन माना जाता है. इस बार नव वर्ष की संक्रान्ति में आगामी जनवरी के महीने से अप्रैल के महीने तक हरिद्वार कुंभ का भी शुभ संयोग उपस्थित हो रहा है. हालांकि कोरोना संकट के कारण कुम्भ के शाही स्नानों की शुरुआत 11 मार्च से होगी किन्तु कुम्भ स्नान का प्रारम्भ जनवरी महीने के मकर संक्रांति से ही हो जाता है. इसलिए इस नववर्ष 2021 का 'कुम्भ वर्ष' के रूप में भी विशेष महत्त्व है.कुम्भ स्नानदेश में नववर्ष  मनाने की विविधता के बावजूद एक समानता यह है कि भारत के लोग सूर्य की संक्रांति और चन्द्रमा के नक्षत्र विज्ञान की शुभ पर्याय को ध्यान में रखते हुए सौरवर्ष और चान्...
उत्तराखण्ड की वीरांगना मुन्नी पाण्डे की प्रेरणास्पद संघर्षगाथा

उत्तराखण्ड की वीरांगना मुन्नी पाण्डे की प्रेरणास्पद संघर्षगाथा

इंटरव्‍यू
भुवन चन्द्र पन्त1971 के because भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए कुमाऊं रेजीमेन्ट के नायक लीलाम्बर पाण्डे की वीरांगना को आज भारत-पाक युद्ध की स्वर्णजयन्ती (50 वर्ष पूर्ण होने पर) के मौके पर उनके कानियां, रामनगर स्थित आवास पर सम्मानित किया गया. दर्जनों सैन्य वाहनांे के साथ, जब सैन्य अधिकारियों की टोलियां आज कानियां (रामनगर) की गंगोत्री विहार कालोनी में पहुंची तो एक बार कालोनी वासी इस सकते में आ गये कि आज फिर कालोनी का कोई सैनिक शहीद हो गया. because पुष्पमालाओं से सुसज्जित सेना के वाहन और उनके आगे-पीछे सेना के उच्चधिकारियों की गाड़ियों का हुजुम, कालोनी के लोगों को किसी अनहोनी की आशंका जताने को काफी था. लेकिन जल्दी ही इस शंका से पर्दा तब उठा, जब सैनिकों का काफिला गंगोत्री विहार निवासी श्रीमती मुन्नी पाण्डे के आवास पर जाकर ठहरा.मुन्नी पाण्डेये उसी वीरांगना मुन्नी पाण्डे becauseका निवास थ...