Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
चक्रपाणि मिश्र के अनुसार भारत के पांच भौगोलिक जलागम क्षेत्रों का पारिस्थिकी तंत्र 

चक्रपाणि मिश्र के अनुसार भारत के पांच भौगोलिक जलागम क्षेत्रों का पारिस्थिकी तंत्र 

जल-विज्ञान
भारत की जल संस्कृति-28डॉ. मोहन चंद तिवारीचक्रपाणि मिश्र ने ‘विश्ववल्लभ-वृक्षायुर्वेद’ में भारतवर्ष के विविध प्रदेशों को जलवैज्ञानिक धरातल पर विभिन्न वर्गों में विभक्त करके वहां की वानस्पतिक तथा भूगर्भीय विशेषताओं को पृथक् पृथक् रूप because से चिह्नित किया है जो वर्त्तमान सन्दर्भ में आधुनिक जलवैज्ञानिकों के लिए भी अत्यन्त प्रासंगिक है. चक्रपाणि के अनुसार जलवैज्ञानिक एवं भूवैज्ञानिक दृष्टि से भारत के पांच जलागम क्षेत्र इस प्रकार हैं-जलविज्ञान 1. ‘मरु देश’- जहां रेतीली मिट्टी है because और हाथी की सूंड के समान भूमि में जल की शिराएं हैं उसे ‘मरु प्रदेश’ कहते हैं. इस क्षेत्र में जलागम को प्रेरित करने वाली वृक्ष वनस्पतियों में पीलू (अखरोट) शमी, पलाश, बेल, करील, रोहिड़, अर्जुन, अमलतास और बेर के पेड़ मुख्य हैं. जलविज्ञान 2. ‘जांगल देश’ -मरुदेश की because अपेक्षा जांगल देश में जल की ...
पढ़ने-पढ़ाने की संस्कृति: सामुदायिक पुस्तकालय

पढ़ने-पढ़ाने की संस्कृति: सामुदायिक पुस्तकालय

शिक्षा
कमलेश चंद्र जोशीकोरोना महामारी के इस कठिन दौर में कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है जो प्रभावित न हुआ हो लेकिन उन तमाम क्षेत्रों में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला एक क्षेत्र है शिक्षा. पिछले 8-9 महीनों से because शिक्षण संस्थान बंद हैं और ऑनलाइन माध्यम से बच्चों को पढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं जो नाकाफी प्रतीत हो रही हैं. बच्चे, अध्यापक और अभिभावक इस सच्चाई को महसूस कर चुके हैं कि ऑनलाइन शिक्षा कभी भी क्लास रूम का विकल्प so नहीं हो सकती. उत्तराखंड राज्य के दूर दराज के गांवों की स्थिति बेहद चिंताजनक है जहां  बच्चों के पास न तो स्मार्ट फोन हैं, न इंटरनेट की उपलब्धता और न ही इंटरनेट की स्पीड. अभिभावक इतने पढ़े-लिखे भी नहीं हैं कि वो स्वयं स्कूल का विकल्प बन सकें.आदत कोरोना से उत्पन्न इन विपरीत परिस्थितियों के बीच उम्मीद की एक किरण जगाई है उत्तराखंड के पिथौरागढ़, रामनगर व नानकमत्ता के उन तम...
“मैं तुम्हें इतना प्यार करती हूं और तुम लोगों ने मुझे वोट नहीं दिया”

“मैं तुम्हें इतना प्यार करती हूं और तुम लोगों ने मुझे वोट नहीं दिया”

संस्मरण
स्व. कला बिष्ट की एथेंस (यूनान) यात्रा का रोचक वृत्तांत, अंतिम भागस्व. कला बिष्ट 11 अक्टूबर,1992 आज क्रूज का दिन है. because क्रूज अर्थात समुद्र यात्रा. हमारे दल में श्रीमती कमला चन्द नासिक से आई हैं. कुछ वर्ष पूर्व में समाजसेवा भ्रमण में सीढ़ियां से गिर पड़ी थी. रीढ़ की हड्डी में चोट आई, जिसके कारण वह पैरों से लंगड़ाती चलती हैं. पैंरों में केवल मोजे पहनती हैं. श्रीमती डॉ. आशा वालेलकर के भरोसे आई हैं. आशा बहुत अच्छी हैं. पूरी-पूरी मदद कमला जी की कर रही हैं.8 बजे जहाज भूमध्य सागर की यात्रा पर रवाना होता है. but तीन द्वीपों की यात्रा हमने करनी है. समुद्री यात्रा बहुत रोमांचक लगी. जहाज श्वेत-रजत मार्ग बनाता जा रहा है. समुद्र में मन्द-मन्द लहरें चल रही हैं पानी नीला, फिर काई फिर गहरा स्लेटी सा लगता है. जहाज के अन्दर बहुत आरामदायक सोफे लगे हैं. भोजन-नाश्ते की बहुत सुन्दर व्यवस्था है. जह...
उत्तराखंड में पर्यटन से रोजगार की अपार संभावनाएं!

उत्तराखंड में पर्यटन से रोजगार की अपार संभावनाएं!

ट्रैवलॉग
आशिता डोभालयूं तो हमारे पहाड़ों में because ऊपर वाले ने हर एक चीज को इतनी खूसूरती से बनाया है जिसकी सुंदरता को दर्शाने के लिए शब्दकोश के शब्द भी कम पड़ जाते हैं या यूं कहें की ऊपर वाले ने कुछ चीजों को मानो सोच विचार कर बनाया हो बस कमी है तो मानव सभ्यता की जो उन चीज़ों को ज्यों का त्यों नहीं रख सकती है. पर्यटन राज्य का दर्जा भर मिलने से हम खुश हो जाते हैं और अपने को गौरवान्वित महसूस करने लगते हैं और हम लोगों की लगातार कोशिशें भी रहती हैं कि हम बाहर से आने वाले पर्यटकों को लुभाने का प्रयास समय—समय पर अलग—अलग तरीकों से करते आए हैं, पर so अफसोस की बात है कि बहुत सारी चीजें अभी भी हमारे पर्यटन के लिहाज से अछूती हैं. कहने का तात्पर्य यह है कि संस्कृति सम्पन्न प्रदेश आज भी संस्कृति को बचाने की कवायद करने को मजबूर है. पयर्टन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद भी आज कई जगहों को पर्यटक मानचित्र पर...
घड़ी परीक्षा की  है पर हिम्मत न हारें  

घड़ी परीक्षा की  है पर हिम्मत न हारें  

समसामयिक
प्रो. गिरीश्वर मिश्रआज कोरोना की महामारी ने ठण्ड because और प्रदूषण के साथ मिल कर आम आदमी की जिन्दगी की मुश्किलों को बहुत बढ़ा दिया है. बहुत कुछ अचानक हो रहा है और उसके साथ जुड़ी चिंता, परेशानी, कुंठा, व्यथा  दुःख की विभीषिका की तरह चल रही है. प्रिय जन को खोना, नौकरी छूट जाना, गंभीर रोग, दुर्घटना, त्रासदी जैसे भयानक अनुभव से गुजर कर उठना और आगे बढ़ना एक कठिन चुनौती होती है पर वह असंभव नहीं है. इस दौरान ऎसी कई कहानियां भी सुनने, पढने या देखने को मिल रही हैं जिनमें लोग कठिन परिस्थिति से उबर कर आगे बढ़ते हैं. so ऐसी स्थिति में जब खुद को पाते हैं तो क्या करें? अपनी व्यथा से कैसे पेश आएं?  ऐसे सवालों का कोई सीधे-सीधे उत्तर नहीं है. इस हाल में प्रतिरोध या जूझने की क्षमता (रेसीलिएंस) का विचार मदद करता है. जूझने का दम हो तो आदमी जीवन की कठिन परिस्थिति मे या कहें तनाव या त्रासद घड़ी से उबर कर  वापस ...
काकड़ीघाट: स्वामी विवेकानंद, ग्वेल ज्यू और चंदन सिंह जंतवाल

काकड़ीघाट: स्वामी विवेकानंद, ग्वेल ज्यू और चंदन सिंह जंतवाल

ट्रैवलॉग
ललित फुलारायह काकड़ीघाट का वही because पीपल वृक्ष है, जहां स्वामी विवेकानंद जी को 1890 में ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. असल वृक्ष 2014 में ही सूख गया था और उसकी जगह इसी स्थान पर दूसरा वृक्ष लगाया गया है, जिसे देखने के लिए मैं अपने एक साथी के साथ यहां पहुंचा था. काकड़ीघाट पहुंचते ही हमें चंदन सिंह जंतवाल मिले, जिन्होंने अपनी उम्र 74 साल बताई. वह ज्ञानवृक्ष से ठीक पहले पड़ने वाली चाय की दुकान के so सामने खोली में बैठे हुए थे, जब हमने उनसे पूछा था कि विवेकानंद जी को जिस पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, वह कहां है? सामने ही चबूतरा था, जहां लोग ताश और कैरम खेल रहे थे. विशालकाय पाकड़ वृक्ष को देखते ही मेरा साथी झुंझलाया 'यह तो पाकड़ है... पीपल कहां है?' काकड़ीघाट जंतवाल जी मुस्कराये because और आगे-आगे चलते हुए हमें इस वृक्ष तक ले गए. तब तक मैंने ज्ञानवृक्ष का बोर्ड नहीं पढ़ा था और उनसे ...
सुभाष जिनके जीवन से जुड़ी हैं ना जाने कितनी रहस्य की परतें

सुभाष जिनके जीवन से जुड़ी हैं ना जाने कितनी रहस्य की परतें

पुस्तक-समीक्षा
रत्ना श्रीवास्तवआजादी की लड़ाई के becauseदौरान देश के शीर्ष नेताओं में थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस. 18 अगस्त 1945 को विमान हादसे में उनके निधन की खबर आई. लेकिन इसके बाद लगातार ये खबरें भी आती रहीं कि वो जिंदा हैं. ये दावे 80 के दशक तक होते रहे. ऐसा लगता है कि नेताजी का जीवन ना जाने कितनी ही रहस्य की परतों में लिपटा हुआ है. आजादी अलग-अलग देशों की आला soखुफिया एजेंसियों ने अपने तरीकों से इस तारीख से जुड़ी सच्चाई को खंगालने की कोशिश की. कुछ स्वतंत्र जांच भी हुई. कई देशों में हजारों पेजों की गोपनीय फाइलें बनीं. तमाम किताबें लिखीं गईं. रहस्य ऐसा जो सुलझा भी लगता है और अनसुलझा भी. butदरअसल जापान से ये खबर आई कि 18 अगस्त 1945 को दोपहर ढाई बजे ताइवान में एक दुखद हवाई हादसे में नेताजी नहीं रहे. हालांकि हादसे के समय, दिन, हकीकत और दस्तावेजों को लेकर तमाम तर्क-वितर्क, दावे और अविश्वास जारी हैं. ...
…यूरोपियन महिलाएं एशियन को वोट देना नहीं चाहती!

…यूरोपियन महिलाएं एशियन को वोट देना नहीं चाहती!

संस्मरण
स्व. कला बिष्ट की एथेंस (यूनान) यात्रा का रोचक वृत्तांत, भाग—2स्व. कला बिष्ट 07 अक्टूबर, 1992 महिलाओं की समस्या परbecause वर्कशॉप चल रही है, जिसमें ग्रुप डिस्कसन हो रहा है. मुख्य विषय निम्न हैं:-गर्ल चाइल्ड व because महिलाओं के सामाजिक, राजनैतिक अधिकार. महिलाओं को because पुरूषों के समान शिक्षा. बढ़ती because जनसंख्या पर रोक.उत्तराखंड इस दिन 1.30 बजे म्यूनिसिपल हॉल में पहुंचते हैं, जहां मेयर की ओर से दोपहर के भोजन में हमें आमंत्रित किया गया है. यह हॉल भी कलात्मक ढंग से सजाया गया है. because अब तक जितने मेयर हो चुके हैं, उनकी मूर्तियां काले-सफेद रंग की मिट्टी से बनी हैं. इतनी साकार लगती हैं कि जैसे अभी बोल पड़ेंगी. यहां भी छत की सीलिंग को कलात्मक ढंग से सजाया गया है. बताते हैं कि मेयर के कार्यालय में 41 सदस्य हैं, जिनमें से 19 महिलाऐं हैं. सदस्यों का चुनाव 4 व...
सर्दियों के इस मौसम में पर्यटकों के स्वागत को तैयार है औली

सर्दियों के इस मौसम में पर्यटकों के स्वागत को तैयार है औली

समसामयिक
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनउत्तराखंड में because बहुत से पर्यटन स्थल हैं जो अपनी प्राकृतिक सुदंरता से सैलानियों को चकित कर देते हैं. उत्तराखंड पर्यटन का ऐसा ही एक नगीना है औली. परिलोक सा खूबसूरत औली शांत प्रकृति की गोद में स्थित है. यहां से हिमालय के शिखरों का भव्य नजारा भी दिखाई देता है और स्कीइंग के लिए अनुकूल ढलानें भी रोमांचित करती हैं. औली में पर्यटकों को जो मंत्रमुग्ध करने वाला अनुभव प्राप्त होता है वही इस because बात का साक्ष्य है कि औली भारत के सर्वश्रेष्ठ चुनिंदा विंटर डेस्टिनेशंस में से एक है. उत्तराखंड देश में सर्दियों के मौसम की because आमद हो चुकी है, ऐसे में उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय के चमोली जिले में स्थित औली स्की रिजॉर्ट और हिल स्टेशन सर्दियों के पर्यटन हेतु पर्यटकों का स्वागत करने को बिल्कुल तैयार है. औली‘‘उत्तराखण्ड because राज्य में औली विशेष रूप से सर्दियों में...
उत्तराखंड की वादियों से गुमानी पंत ने उठाई थी,आज़ादी की पहली आवाज

उत्तराखंड की वादियों से गुमानी पंत ने उठाई थी,आज़ादी की पहली आवाज

समसामयिक
संविधान दिवस (26 नवम्बर) पर विशेषडॉ.  मोहन चंद तिवारीमैं पिछले अनेक वर्षों से अपने लेखों द्वारा लोकमान्य गुमानी पन्त के साहित्यिक योगदान की राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में निरंतर रूप से चर्चा करता आया हूं. उसका एक कारण यह भी है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में उत्तराखंड की भाषाओं को मान्यता दिलाने के लिए सर्वाधिक साहित्यिक प्रमाण लोककवि गुमानी पंत द्वारा आज से दो सौ वर्ष पूर्व रचित कुमाउंनी साहित्य है,जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय धरातल पर देश की भाषाई एकता को स्थापित करने के लिए गढ़वाली, कुमाउंनी आदि उत्तराखंड की भाषाओं के अलावा नेपाली और संस्कृत भाषाओं में साहित्य रचना की.पर विडंबना यह है कि आज उत्तराखंड की वादियों में बोली जाने वाली खसकुरा नेपाली भाषा को तो आठवीं अनुसूची में स्थान प्राप्त है किंतु  उसी भाषापरिवार से सम्बद्ध कुमाउंनी, गढ़वाली और जौनसारी को संवैधिनिक मान्यता नहीं मिल पाई ...