Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
जानिए कौन हैं कर्नल अजय कोठियाल जो ‘आप’ में हो रहे शामिल, हजारों युवाओं को सेना के लिए करते हैं तैयार

जानिए कौन हैं कर्नल अजय कोठियाल जो ‘आप’ में हो रहे शामिल, हजारों युवाओं को सेना के लिए करते हैं तैयार

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनकर्नल अजय कोठियाल ( Colonel Ajay Kothiyal) आज किसी भी वक्त आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. यूथ फाउंडेशन और केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य के जरिए पहचान बनाने वाले रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल ( Colonel Ajay Kothiyal) पहले ही सियासी मैदान में उतरने की घोषणा कर चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक वह आम आदमी पार्टी की तरफ से उत्तराखंड में सीएम का चेहरा हो सकते हैं. वह म्यांमार में अपने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा कर हाल ही में लौटे हैं. वह किसी भी वक्त आप में शामिल होने की घोषणा कर सकते हैं. उनका आप में शामिल होना उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता काफी ज्यादा है. सेना की पृष्ठभूमि से आने की वहज से उनकी छवि भी साफ हैं। सूत्रों के मुताबिक 21 अप्रैल राम नवमी के दिन देहरादून में होने वाले कार्यक्रम में उनको...
सेना का जवान, अब संभालेगा उत्तराखंड की कमान!

सेना का जवान, अब संभालेगा उत्तराखंड की कमान!

देहरादून
आगामी चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा हो सकते हैं कर्नल अजय कोठियाल!हिमांतर ब्यूरो, उत्तराखंडबीस साल के उत्तराखंड ने अब तक हमको कई मुख्यमंत्री दिए हैं, जिनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां शामिल हैं. उत्तराखंड की गलियों में यह चर्चा गरम है कि कर्नल because अजय कोठियाल (रिटा.) अब 'आम' होने जा रहे हैं. जानकारों सूत्रों के अनुसार कर्नल अजय कोठियाल 11 अप्रैल को खास से 'आम' हो जाएंगे. यानी की वह किसी भी समय आम आदमी पार्टी की दामन थाम सकते हैं. सूत्रों की माने तो because आम आदमी पार्टी उनको उत्तराखंड में बतौर मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रमोट कर सकती है. लेफ्टिनेंट सैन्य जीवन कर्नल कोठियाल का जन्म 26 फरवरी 1969 को हुआ. 7 दिसंबर 1992 को सेना में गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन में बतौर सेकेंड लेफ्टिनेंट सैन्य जीवन की शुरूआत की. because ‘ऑपरेशन कोंगवतन’ के दौरान सात आतंकियों के ...
रोगों को जड़ से मिटाने में कारगर हैं होम्योपैथी दवाएं

रोगों को जड़ से मिटाने में कारगर हैं होम्योपैथी दवाएं

सेहत
विश्व होम्योपैथी दिवस पर विशेषडॉ. दीपा चौहान राणा होम्योपैथी (Homeopathy) एक विज्ञान का कला चिकित्सा पद्धति है. होम्योपैथिक दवाइयां किसी भी स्थिति या बीमारी के इलाज के लिए प्रभावी हैं; बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययनों में होमियोपैथी को प्लेसीबो से अधिक प्रभावी पाया गया है. चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीमेन (Dr. Christian Friedrich Samuel Hahnemann)  हैं, इनका जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी में हुआ था, इन्होंने सन 1796 में होम्योपैथी की उत्पत्ति की. यह चिकित्सा के 'समरूपता के सिंद्धात' पर आधारित है जिसके अनुसार औषधियां उन रोगों से मिलते जुलते रोग दूर कर सकती हैं, जिन्हें वे उत्पन्न कर सकती हैं. औषधि की रोगहर शक्ति जिससे उत्पन्न हो सकने वाले लक्षणों पर निर्भर है. जिन्हें रोग के लक्षणों के समान किंतु उनसे प्रबल होना चाहिए. अत: रोग अत्यंत निश्चयपूर्वक, जड़ से, अविलंब और सदा के लिए...
देहरादून में नाइट कर्फ्यू, 30 अप्रैल तक सभी स्कूल रहेंगे बंद

देहरादून में नाइट कर्फ्यू, 30 अप्रैल तक सभी स्कूल रहेंगे बंद

देहरादून
पिछले कुछ दिनों से देहरादून जिले में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी आई है. राज्य में सबसे अधिक कोरोना के मामले देहरादून में ही हैं. इसके अलावा हरिद्वार, हल्द्वानी, नैनीताल में भी कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी आई है.हिमांतर ब्‍यूरो, देहादूनउत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए तीरथ सिंह रावत कैबिनेट ने राजधानी देहरादून में रात का कर्फ्यू (Night curfew) लगाने का फैसला किया है. कैबिनेट ने चकराता, कालसी क्षेत्र को छोड़कर संपूर्ण देहरादून जिले, हरिद्वार जिले, नैनीताल नगर पालिका एवं हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में कक्षा एक से 11वीं तक के सभी स्कूल 30 अप्रैल तक बंद रखने पर मुहर लगाई है. इन जगहों पर 10वीं एवं 12वीं की कक्षाओं की आफलाइन पढ़ाई पहले की तरह चलती रहेगी. एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में कैबिनेट ने पिछली त्रिवेंद्र सरकार के गैरसैंण को कमिश्नरी बना...
लोक-परंपरा और माटी की खूशबू…

लोक-परंपरा और माटी की खूशबू…

पुस्तक-समीक्षा
सुनीता भट्ट पैन्यूलीरंग हैं, मौसम हैं, तालाब हैं पोखर हैं, मछली है, खेत हैं, खलिहान हैं, पुआल है, मवेशी, कुत्ता, गिलहरी हैं, ढिबरी है, बखरी है, बरगद है, पीपल हैं, पहाड़ हैं, पगडंडियां हैं, because आकाश है, ललछौंहा सूरज है, धूप है, बादल हैं, बुजुर्ग मा-बाबूजी हैं, बच्चे हैं, बीमारी है, षोडशी है, मेहनतकश जुलाहे की दिनचर्या है, भूख है, चुल्हा है, राख है तवा है, गोल रोटी है, मजबूरी है, संताप है, भूख है, परंपरायें हैं, रस्म हैं रिवाज हैं, लोक-परंपराओं और माटी की खूशबू है.किताबी तिलिस्म ऐसा एक किताबी तिलिस्म soजिसमें सिमट आया है सबकुछ इंसानी जज़्बात, रिश्तों की जद्दोजहद, रोज़मर्रा की खींचतान जिंदगी से, साक्षात्कार दैनिक जीवन-मुल्यों का और विशेषकर आदमी की  दैनंदिन उपभोग की मूलभूत आवश्यकताओं का. उपरोक्त जो भी मैंने लिखा but है मित्रों परिचय करा रही हूं मैं आदरणीय श्लेष अलंकार द्वारा लिखी गय...
जब नाराज होगी प्रकृति …

जब नाराज होगी प्रकृति …

पुस्तक-समीक्षा
राजीव सक्सेनाजैसे समुद्र छुपा लेता है सारे शोर... नदियों, जीव जंतुओं के.. कविताएं भी मेरे लिए समुद्र से कम न थी! मैं भी कविता होना चाहती हूं... कविता को लेकर ये आसक्ति... ये प्रेम... ये जूनून अभिव्यक्त हुआ है कवयित्री निमिषा सिंघल की अपनी ही एक रचना में. 'जब नाराज होगी प्रकृति' शीर्षक से, सर्वप्रिय प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित उनके काव्य संग्रह में निमिषा सिंघल ने न सिर्फ प्रकृति के प्रति लगाव बल्कि ईश्वर से संवाद और सामाजिक अवधारणाओं को भी अपनी कलम के जरिए गंभीरता से रेखांकित किया है. निमिषा, कहीं सुबह को अपने तरीके से परिभाषित करती हैं... सूरज ने प्रेम दर्शाया है, फूलों, कलियों को दुलराने मस्त मगन पवन आया है... तो कहीं मौसम के मिजाज के बहाने ज़िंदगी के फ़लसफ़े को कुछ यूं उज़ागर करती हैं नित नए रंग बदलती है जिंदगी.. ठीक ही समझा आपने मौसम की तरह मिजाज बदलती है जिंदगी....
कुंभ मेले में आने वाली प्रदेश की महिलाओं को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में मिलेगी निशुल्क यात्रा की सुविधा

कुंभ मेले में आने वाली प्रदेश की महिलाओं को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में मिलेगी निशुल्क यात्रा की सुविधा

अध्यात्म, हरिद्वार
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सूबे की मातृशक्ति को एक शानदार सौगात दी है। कुंभ के मुख्य पर्व दिवसों पर यहां महिलाओं को उत्तराखंड परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। मातृशक्ति के सम्मान की दिशा में मुख्यमंत्री का यह कदम बेहद अहम है।इन दिनों देवभूमि की धर्मनगरी में महाकुंभ की धूम है। बड़ी तादाद में देश विदेश के श्रद्धालु यहां पुण्य लाभ के लिए पहुंच रहे हैं। संतों के अखाड़ों का वैभव यहां की रौनक बढ़ा रहे हैं। सरकार के बेहतर प्रबंधन में संचालित हो रहे इस भव्य आयोजन में गंगा मैया के जयकारों व मंत्रोच्चार से धर्मनगरी गुंजायमान हो रही है। इस कुंभ का विशेष महत्व होता है, इस दौरान यहां बड़ी तादाद में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचेंगे।मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरिद्वार आने वाली महिलाओं के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में आवाजाही की निशुल्क सुविधा दी जा रही है। मुख्यमंत्री के नि...
हिंदुस्तान की कर्नाटकी…

हिंदुस्तान की कर्नाटकी…

ट्रैवलॉग
मंजू काला मूलतः उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से ताल्लुक रखती हैं. इनका बचपन प्रकृति के आंगन में गुजरा. पिता और पति दोनों महकमा-ए-जंगलात से जुड़े होने के कारण, पेड़—पौधों, पशु—पक्षियों में आपकी गहन रूची है. आप हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन करती हैं. so आप ओडिसी की नृतयांगना होने के साथ रेडियो-टेलीविजन की वार्ताकार भी हैं. लोकगंगा पत्रिका की संयुक्त संपादक होने के साथ—साथ आप फूड ब्लागर, बर्ड लोरर, टी-टेलर, बच्चों की स्टोरी टेलर, ट्रेकर भी हैं.  नेचर फोटोग्राफी में आपकी खासी दिलचस्‍पी और उस दायित्व को बखूबी निभा रही हैं. आपका लेखन मुख्‍यत: भारत की संस्कृति, कला, खान-पान, लोकगाथाओं, रिति-रिवाजों पर केंद्रित है. इनकी लेखक की विभिन्न विधाओं को हम हिमांतर के माध्यम से 'मंजू दिल से...' नामक एक पूरी सीरिज अपने पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. पेश है मंजू दिल से... की 12वीं किस्त... ...
स्वयं सहायता समूह के जरिए पूर्ण हुआ स्वरोगार का स्वप्न

स्वयं सहायता समूह के जरिए पूर्ण हुआ स्वरोगार का स्वप्न

साहित्‍य-संस्कृति
प्रकाश उप्रेती  पहाड़ हमेशा आत्मनिर्भर रहे हैं. पहाड़ों के जीवन में निर्भरता का अर्थ सह-अस्तित्व है. यह सह-अस्तित्व का संबंध उन संसाधनों के साथ है जो पहाड़ी जीवनचर्या के because अपरिहार्य अंग हैं. इनमें जंगल, जमीन, जल, जानवर और जीवन का कठोर परिश्रम शामिल है. इधर अब गांव में कई तरह की योजनाओं के जरिए पहाड़ अपनी मेहनत से नई करवट ले रहा है. इस करवट की एक आहट आपको खोपड़ा गांव में दिखाई देगी.महिला स्वयं सहायता समूह पिछले साल गांव में ‘महिला स्वयं सहायता समूह’ की स्थापना हुई. यह विचार ग्राम पंचायत की तरफ से एक मीटिंग में रखा गया था. ईजा उस मीटिंग में गई हुई थीं. ईजा बताती हैं कि- ‘उस because मीटिंग में हमारी ‘पधानी’ के अलावा दो महिलाएं अल्मोड़ा से आई हुई थीं’. हमारी ग्राम पंचायत में 4 गांव आते हैं. हर गांव से महिलाएं आई हुई थीं. कहीं से चार, कहीं से दस और कहीं से तीन ही. हमारे गांव से दो लोग ...
साहित्यकार एवं रंगकर्मी महावीर रवांल्टा सम्मानित

साहित्यकार एवं रंगकर्मी महावीर रवांल्टा सम्मानित

उत्तरकाशी
हिमांतर ब्यूरो, पुरोलाश्री कमलेश्वर महादेव जीप,सुमो ड्राईवर एवं आनर्स समिति द्वारा सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं रंगकर्मी महावीर रवांल्टा को सम्मानित किया गया. समिति के पुरोला स्थित because कार्यालय में बेहद सादे आयोजन में समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह रजवार, सचिव यशवीर पंवार, उपाध्यक्ष अरविन्द चौहान, संगठन मंत्री दिनेश मेहर, प्रचार मंत्री उमापति भट्ट, कोषाध्यक्ष सुरेश जोशी,संरक्षक दिलीप राणा, स्टेशन प्रभारी मनमोहन नौडियाल so व मनमोहन राणा, मालचंद, त्रिलोक राणा, गुरुदेव रावत सहित अनेक लोगों की उपस्थिति में उन्हें स्मृति चिन्ह व शाल भेंटकर सम्मानित किया गया. उत्तराखंडसाहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखनी चलाने वाले महावीर रवांल्टा की अब तक तीन दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. देशभर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं के प्रकाशन के because साथ ही आकाशवाणी व दूरदर्शन से उनकी रचनाओं क...