Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
हास्य, व्यंग्य नहीं, हमारे दर्द के कवि हैं शेरदा अनपढ़

हास्य, व्यंग्य नहीं, हमारे दर्द के कवि हैं शेरदा अनपढ़

साहित्‍य-संस्कृति
ललित फुलारा'कुमाउनी शब्द संपदा' पेज पर प्रसिद्ध कवि-गीतकार शेरदा "अनपढ़" की कविताओं के विभिन्न आयाम पर केंद्रित चर्चा 'हमार पुरुख' में वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी, साहित्यकार because देवेन मेवाड़ी और डॉ दिवा भट्ट ने अपने विचार रखे. चारु तिवारी ने शेरदा अनपढ़ की कविता और जीवन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शेरदा अनपढ़ हास्य, व्यंग्य नहीं, हमारे दर्द के कवि हैं.मूलांक उनका कविता संसार मानवीय संवेदनाओं का संसार है. हर गीत और कविता में जीवन का भोगा हुआ यथार्थ है. जो बोल नहीं सकते, शेरदा की कविताएं उनकी आवाज हैं. जनसंघर्ष, because आध्यात्म, प्रकृति और प्रेम के साथ ही समसामयिक विषयों को संबोधित करने वाले कवि हैं, शेरदा . उनके साहित्यिक अवदान को जितना समेटा जाए, उतना फैलता जाता है. अपनी कविता के बारे में वह कहते थे ... मैं कविता हंसकर भी लिखता हूं, रोकर भी, बीच बाजार में भी लिखता हूं और...
जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने कोविड फ्री उत्तरकाशी ऐप किया लांच

जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने कोविड फ्री उत्तरकाशी ऐप किया लांच

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशी उत्तरकाशी में कोविड-19 संक्रमण के प्रभावी नियंत्रण को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा अच्छी पहल की गई है. जनपद को कोरोना से मुक्त करने हेतु आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एप जारी किया है. रविवार को जिलाधिकारी मयूर दीक्षित व पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने कोविड फ्री उत्तरकाशी ऐप जारी किया. इस मोबाइल ऐप के माध्यम से शहरी व सुदरवर्ती क्षेत्रों में कोविड के लक्षण दिखने पर कोई भी नागरिक अपनी सूचना एप के माध्यम से कोविड कंट्रोल रूम को दे सकता है. तथा त्वरित उपचार, मेडिसिन प्राप्त कर सकता है. गांव में बुखार,जुकाम,खांसी से पीड़ित व्यक्ति अपनी सूचना एप के माध्यम से त्वरित दे सकता है जिसका संज्ञान तत्काल लिया जाएगा. जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि वैश्विक महामारी से निपटने के लिए यह एप बेहद उपयोगी साबित होगा. इस एप के माध्यम से सूचना मिलते ही कम समय में हम मरीज के पास पहुँच ...
गधेरों से उठता सिर्फ धुआँ…

गधेरों से उठता सिर्फ धुआँ…

समसामयिक
प्रकाश उप्रेतीपहाड़ के गाँव महामारी के कई रूपों से लड़ रहे हैं. स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का आलम सरकार दर सरकार दर जर्ज़र होता गया. तहसील और जिले के अस्पतालों में डॉ. के नाम रेफर बाबू हैं और दवा के नाम पर कैल्शियम की गोलियां. अखबारों में अस्पताल के अभाव में दम तोड़ते लोग, प्रसव पीड़ा में रास्ते में ही बच्चे को जन्म देती because माताओं की तस्वीरें छपती रही हैं लेकिन हमारे हुक्मरानों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा. विधायक से लेकर सांसद तक दून और दिल्ली में मौज करते रहे . हमारे इलाके के सांसद महोदय को लोग पहचानते भी नहीं  है. वह भी इलाके को नहीं पहचानते हैं .सूर्य देवपिछले साल मेरी ईजा पर सुअर ने हमला कर दिया था. उनके इलाज के लिए मैं भिकियासैंण, चखुटिया और रानीखेत के सरकारी अस्पतालों में गया और वहाँ जो स्थिति देखी वह भयावह थी. उसके बाद कई तहसीलों में जाकर अस्पतालों पर लिखा भी लेकिन उससे किसको क्...
साप्ताहिक राशिफल: कैसे जानें अपना मुख्य अंक (मूलांक)

साप्ताहिक राशिफल: कैसे जानें अपना मुख्य अंक (मूलांक)

साप्ताहिक राशिफल
अंक ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 16-22 मई, 2021 अंक ज्योतिष साप्ताहिक भविष्यफल जानने के लिए अंक ज्योतिष मूलांक का बड़ा महत्व है. मूलांक ही जातक के जीवन का महत्वपूर्ण अंक माना गया है.आपका जन्म महीने की किसी भी तारीख को होता है, जिसको इकाई के अंक में बदलने के बाद जो अंक मिलता है, वह आपका मूलांक कहलाता है. मूलांक 1 से 9 अंक के because बीच कोई भी हो सकता है, उदाहरणस्वरूप – आपका जन्म किसी महीने की 10 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक 1 + 0 यानी 1 होगा. इसी प्रकार किसी भी महीने की 1 तारीख से लेकर 31 तारीख तक जन्मे लोगों के लिए 1 से 9 तक के मूलांकों की गणना की जाती है. इस प्रकार सभी जातक अपना मूलांक जानकर उसके आधार साप्ताहिक राशीफल जान सकते हैं. मूलांक अपनी जन्मतिथि से जानें साप्ताहिक राशिफल (16 से 22 मई 2021) अंक ज्योतिष का हमारे जीवन because पर सीधा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि सभी अंकों का हमारे जन्...
वैदिक मंत्रोच्चार व विशेष पूजा अर्चना के साथ खुले विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट

वैदिक मंत्रोच्चार व विशेष पूजा अर्चना के साथ खुले विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंड, उत्तरकाशीवैदिक मंत्रोच्चार व विशेष पूजा अर्चना के साथ अक्षय तृतीया के मिथुन लग्न की शुभ बेला पर आज प्रातः 7 बजकर 31 मिनट पर विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट 6 माह के लिए खोल दिए है. कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार इस बार बिना श्रद्धालुओं के कपाट खोले गए. कपाट खुलते ही पहली पूजा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, व प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत द्वारा भेजी गई भेंट स्वरूप धनराशि 1101-1101 रुपये के साथ हुई. कोविड नियमों का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया गया. कपाटोद्घाटन में सीएमओ डॉ डीपी जोशी,उप जिलाधिकारी देवेंद्र नेगी,ब्लॉक प्रमुख भटवाड़ी विनीता रावत,अध्यक्ष मंदिर समिति सुरेश सेमवाल,सचिव दीपक सेमवाल, रविंद्र सेमवाल,सहित तीर्थ पुरोहित उपस्थित थे.आप भी मां गंगा के दर्शन करिए...
उत्तराखंड के लोक और देव परंपरा को समझने के लिए एक ज़रूरी क़िताब

उत्तराखंड के लोक और देव परंपरा को समझने के लिए एक ज़रूरी क़िताब

पुस्तक-समीक्षा
पुस्तक समीक्षाचरण सिंह केदारखंडीकोटी बनाल (बड़कोट उत्तरकाशी) में 7 जून 1981 को जन्मे दिनेश रावत पेशे से शिक्षक और प्रवृति से यायावर और प्रकृति की पाठशाला के अध्येता हैं जिन्हें because अपनी सांस्कृतिक विरासत से बेहद लगाव है. अंक शास्त्र “रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं” नवम्बर 2020 में प्रकाशित लोक संस्कृति पर उनकी दूसरी किताब है इससे पहले रावत जी “रवांई क्षेत्र के लोकदेवता और लोकोत्सव” पुस्तक लिख चुके हैं जो because उनकी दूसरी किताब की प्रेरणा बनी है. समय साक्ष्य प्रकाशन देहरादून और संस्कृति विभाग उत्तराखंड के आर्थिक अनुदान से प्रकाशित 294 पृष्ठ की इस किताब में 5 अध्याय हैं और कवर पेज (महासू देवता) सोबन दास जी का बनाया हुआ है... अंक शास्त्र उत्तराखंड समूचे भारत के साथ साथ हिमालयी राज्यों में भी अपनी एक विशिष्ट सांस्कृतिक अस्मिता के लिए जाना जाता है. भावना के उदात्त स्फुरणों में...
कोविड बचाव एवं राहत अभियान में स्वयंसेवी संस्थाओं से बढ़ाए हाथ

कोविड बचाव एवं राहत अभियान में स्वयंसेवी संस्थाओं से बढ़ाए हाथ

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, ​देहरादूनपूरे देश की तरह उत्तराखंड में भी कोरोना कि दूसरी लहर का कहर बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार गुरुवार 13 मई, 2021 को कोरोना संक्रमण के 7127 नए मामले राज्य में दर्ज किए गए तथा 122 मरीजों की महामारी से मौत हो गई. विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा अपने अपने स्तर पर बचाव एवं राहत हेतु प्रयास किए जा रहे हैं. देहरादून स्थित पीपल्स साइंस इंस्टीटयूट (पी.एस.आई.) द्वारा भी पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी कोविड बचाव एवं राहत अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत संस्था के कार्य क्षेत्र ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग, बहादराबाद (हरिद्वार), कपकोट (बागेश्वर) तथा ताकुला (अल्मोड़ा) के लिए आज सुबह ही पल्स ऑक्सीमीटर, डिजिटल थर्मामीटर, पी.पी.ई. किट, आवश्यक दवाईयां (स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार), सैनिटाइजर, हैंडवाश तथा जागरूकता...
हिल-मेल फाउंडेशन: घर-घर बांटे मास्क व मल्टी विटामिन; स्वास्थ्य केंद्रों और ग्राम प्रधानों को दी कोविड मेडिसिन किट

हिल-मेल फाउंडेशन: घर-घर बांटे मास्क व मल्टी विटामिन; स्वास्थ्य केंद्रों और ग्राम प्रधानों को दी कोविड मेडिसिन किट

पौड़ी गढ़वाल
हिमांतर ब्यूरो, यमकेश्वर, पौड़ी गढ़वालकोरोना काल में उत्तराखंड के सुदूर गांवों के लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए हिल-मेल फाउंडेशन ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है. हिल-मेल फाउंडेशन की टीम घर-घर जाकर लोगों को मल्टीविटामिन की गोलियां और मास्क बांट रही है. इसके अलावा प्राथमिक because स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, ग्राम प्रधानों और आशा कार्यकर्ताओं को कोविड दवाइयों की किट उपलब्ध कराई जा रही है. ये सभी दवाएं उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा मान्य हैं. हिल-मेल फाउंडेशन ने अपने अभियान की शुरुआत पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक से की है. उत्तराखंड सरकार हिल-मेल की टीम लोगों को कोविड प्रोटोकॉल, सावधानी और बचाव के बारे में भी जागरुक कर रही है. हिल-मेल फाउंडेशन ने यमकेश्वर ब्लॉक में अपने अभियान की शुरुआत because तल्ला बनास, मल्ला बनास, किमसार, जोगियाना, धारकोट, राम...
अक्षय तृतीया : कृषि सभ्यता और मानसूनों के पूर्वानुमान का पर्व

अक्षय तृतीया : कृषि सभ्यता और मानसूनों के पूर्वानुमान का पर्व

पर्यावरण
अक्षय तृतीया पर विशेषडॉ . मोहन चंद तिवारीआज शुक्रवार,14 मई,2021 के दिन वैशाख शुक्ल तृतीया की तिथि को मनाया जाने वाला ‘अक्षय तृतीया’ का शुभ पर्व है. ‘अक्षय तृतीया’ जिसे स्थानीय भाषा में 'अखा तीज' भी कहा जाता है,भारत की कृषि सभ्यता because और मानसूनों के पूर्वानुमान का भी महत्त्वपूर्ण पर्व है. ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है जिसका कभी नाश नहीं होता.हेमाद्रि के कथनानुसार अक्षय तृतीया के दिन किए गए स्नान, दान,जप, होम,स्वाध्याय और पितृतर्पण का फल अक्षय हो जाता है. हेमाद्रि अक्षय तृतीया के साथ भारतीय सभ्यता और संस्कृति के अनेक माहात्म्य जुड़े हैं. सतयुग और त्रेतायुग की काल गणना इसी तिथि से होने के कारण इसे युगादि तिथि के रूप में भी जाना जाता है.विष्णु के अंशावतार माने जाने वाले परशुराम की जन्म जयंती इसी तिथि को मनाई जाती है तो बद्री नारायण धाम के कपाट खुलने because और वृन्दावन में बांके बिहार...
फैशन की बातें- बीते दौर की

फैशन की बातें- बीते दौर की

साहित्‍य-संस्कृति
भुवन चंद्र पंतजिन्दगी भले कितनी तंगहाली में गुजरे लेकिन फैशन को अपने अन्दाज में अपनाना हमारे शौक से ज्यादा मजबूरी बन जाती है. मजबूरी इसलिए कि यदि हम जमाने के अनुसार नहीं चलते तो गंवार व बुर्जुआ कहलायेंगें. बाजार भी इस नस को बखूबी जानता है और हरेक की सामर्थ्य के अनुकूल विकल्प तैयार कर लेता है. बात कर रहे हैं because पिछले 50-60 के बीच बदलते फैशन की, जिसके हम प्रत्यक्षदर्शी रहे. मुमकिन है कि आज की नई पीढ़ी को उस पर यकीन भी नहीं होगा कि कभी ऐसा भी वक्त रहा होगा, जब पैर का जूता भी आम इन्सान को नसीब नहीं था. आज तो पैदा हुए बच्चे को जूते पहना दिये जाते हैं, भले वो चलना न सीखा हो. एक दौर वो भी था, जब पांचवी दर्जे तक तो जूते पहनना अमीर शोहदों की चीज हुआ करती थी. अंक शास्त्र दर्जा 6 में जाने के बाद लाल अथवा सफेद रंग के कपडे़ के जूते मिला करते, जिनके तलवे यदि घिस कर सीधे पैर जमीन को छुए, इससे फ...