
लोक कहानी: कर भला तो, हो भला
फकीरा सिंह चौहान ‘स्नेही’
बहुत पुरानी बात है पहाड़ के उस पार एक छोटे से गांव में एक जग्गू नाम का जवान लड़का अपने मां के साथ रहता था. वह अपनी मां का अंधेरे घर का उजाला था. वह बड़ी ईमानदारी लगन और मेहनत से जिजीविषा के लिए अपने खेतों में काम करता था, तथा खेतों के पास ही उसका एक सुंदर बगीचा भी था जिसमें वह हर प्रकार के पेड़ पौधे तथा फल फूल उगाया करता था. "उसके नींबू के बगीचे में बिजोरा के फूल खूब उगा करते थे, जिसे वह हर रोज अपनी धम्मा से पीड़ित बूढ़ी मां को अर्पित करता था. "एक बार उसकी बूढ़ी मां जग्गू को खाना परोसते हुए बोली, "बेटा मुझे अब इन सुरभित फूलों की आवश्यकता नहीं है, अपितु सहायता के लिए घर में बहू के अवलंब की जरूरत है.
"तुम अब जवान हो गए हो"
अपने लिए कोई खूबसूरत सी नेक लड़की देख लो, "मैं तुम्हारा विवाह करा देती हूं.
"मां की बात सुनकर के बेटा मुस्कुराते हुआ बोला, "मां मुझे आप से ...









