Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
उत्तरकाशी : अचानक बेहोश होने लगी एक के बाद एक छात्रा, कुछ चीखने—चिल्लाने लगी

उत्तरकाशी : अचानक बेहोश होने लगी एक के बाद एक छात्रा, कुछ चीखने—चिल्लाने लगी

उत्तरकाशी
स्कूल की नई बिल्डिंग में बैठते ही बेहोश हुईं 10 बालिकाएं बच्चे जब एक सप्ताह बाद स्कूल पहुंचे तो उनके विद्यालय के नए भवन में बैठते ही एक के बाद एक लगातार 10 बालिकाएं बेहोश होने लगीं. बुधवार को पहले भी एक दो बच्चे ही बेहोश हो रहे हुए थे. लेकिन आज स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की चिंता उस समय एकाएक बढ़ गई. ज़ब एक साथ 10 बालिकाएं कक्षा में बेहोश हो गई. शिक्षकों, अभिभावकों ने छात्राओं को बाहर निकाला और जैसे ही मैदान में लाया तो वह चीखने चिल्लाने लगी. प्रत्यक्षदर्शीयों के अनुसार सभी बीमार छात्राओं को उनके अभिभावक देव पश्वा के पास ले गए हैं. अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मांग की वह जल्द से जल्द मामले में संज्ञान लेकर समाधान निकालें. इससे पहले उत्तराखंड के चंपावत जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया था. यहां जिला मुख्यालय से 93 किमी दूर स्थित जीआईसी रमक में कुछ छात्राएं एक साथ रोने, चीखने...
पंतनगर जनवाणी : ‘दादी मां का बटुआ’ कार्यक्रम  को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

पंतनगर जनवाणी : ‘दादी मां का बटुआ’ कार्यक्रम को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

दिल्ली-एनसीआर
राष्ट्रीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली में आयोजित सामुदायिक रेडियो (community radio) सम्मेलन में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल को यह पुरस्कार प्रदान किया गया. विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो पंतनगर जनवाणी के कार्यक्रम दादी मां का बटुआ को प्रोमोटिंग लोकल कल्चर अवार्ड के तहत 9वें राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो पुरस्कार (तृतीय) से सम्मानित किया गया. यह सम्मान राष्ट्रीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली में आयोजित सामुदायिक रेडियो सम्मेलन में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल को प्रदान किया गया. दादी मां का बटुआ कार्यक्रम अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डा. शिवेन्द्र कश्यप के नेतृत्व में पंतनगर जनवाणी की टीम द्वारा तैयार किया गया था. इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के स्थानीय लोगों के बीच जड़ी बुटियों की महत्ता और शनैः श...
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) कार्यान्वयन के तीन वर्षों की प्रगति का तहत आईआईटी रूड़की मना रहा है जश्न

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) कार्यान्वयन के तीन वर्षों की प्रगति का तहत आईआईटी रूड़की मना रहा है जश्न

देहरादून
29 जुलाई को दूसरे अखिल भारतीय शिक्षा समागम एसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे शामिल, 28 जुलाई को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रूड़की दीक्षांत समारोह में कुल 1916 छात्रों को उपाधि प्रदान करेगारूड़की : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रूड़की  (Indian Institute Of Technology–Roorkee (IIT–Roorkee)) में आज दूसरे अखिल भारतीय शिक्षा समागम से पूर्व राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तीन वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. प्रेस वार्ता को आईआईटी रूड़की के निदेशक श्री केके पंत, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर के निदेशक श्री ललित कुमार अवस्थी और उत्तराखंड कौशल विकास और उद्यमिता के क्षेत्रीय निदेशक श्री रवि चिलुकोटी ने संबोधित किया.एनईपी का बहु-विषयक दृष्टिकोण छात्रों को विभिन्न विषयों का पता लगाने और अच्छी तरह से कौशल सिक्षा को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है : ...
युवा बाल साहित्यकार ललित शौर्य का भव्य नागरिक अभिनंदन

युवा बाल साहित्यकार ललित शौर्य का भव्य नागरिक अभिनंदन

पिथौरागढ़
पिथौरागढ़: अपनी लेखनी से पूरे देश में चमक बिखेर रहे सीमान्त के ललित शौर्य को विभिन्न संगठनों ने सामूहिक रूप से सम्मानित किया. समाजसेवी जुगल किशोर पांडेय की पहल पर एक निजी होटल में आयोजित कार्यक्रम में ललित शौर्य को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने ललित के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की. राम सिंह ने कहा कि ललित वैश्विक पटल पर पिथौरागढ़ का नाम आगे बढ़ा रहे हैं. डां. कच्चाहारी ने ललित शौर्य को बाल साहित्य में उभरता हुआ सूर्य बताया. शिक्षाविद उमा पाठक ने कहा कि ललित की रचनाएं पाठ्यक्रम में लगनी चाहिए. ये रचनाएं भावी भविष्य को गढ़ने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. राकेश देवलाल ने शौर्य को युवाओं के लिए प्रेरणा बताया. डां पीताम्बर अवस्थी ने ललित शौर्य के रचनाकर्म को मार्गदर्शक बताया.कार्यक्रम के संयोजक जुगल किशोर पांडेय ने कहा ललित शौर्य की कहानियां मलायलम, कन्नड़, तेलगु, अ...
एक झोला हाथ में, चार चेले साथ में

एक झोला हाथ में, चार चेले साथ में

संस्मरण
प्रकाश उप्रेती  सभागार खचाखच नहीं भरा था. स्टेज पर 4 कुर्सियां और नाम की पट्टी थी. एक आयोजकनुमा जवान अंदर-बाहर और स्टेज के ऊपर नीचे चक्कर काट रहा था. गिनती तो नहीं की लेकिन सभागार में अभी सात-आठ लोग ही थे. उनमें से भी 2 लोग बैठ हुए थे बाकी सभागार की भव्यता और स्टेज की सजावट को हसरत भरी निग़ाहों से निहार रहे थे. तभी 24-25 साल का एक नौजवान गेट को पूरी ताकत से धक्का देते हुए सभागार के भीतर घुसा. उस नौजवान के ललाट पर पसीने की कुछ बूंदे थी, बाल अजय देवगन की भांति माथे से चिपके थे, पीले रंग की कमीज जिसे नाभि तक पहनी हुई पेंट के भीतर अतिरिक्त परिश्रम से खोंचा गया था, पेट तीन चौथाई निकला हुआ, कंधे पर हिमाचल में हुए सेमिनार का झोला, पाँव में चोंच वाले जूते, चेहरे पर अति गंभीरता थी. इस मुद्रा को मैंने ही नहीं बल्कि वहाँ उपस्थित उन 7-8 लोगों ने भी नोटिस किया. भीतर घुसते ही वह दिव्य नौजवान स्टेज की त...
डॉ. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल : याद करना हिन्दी शोध के गहन अध्येता को

डॉ. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल : याद करना हिन्दी शोध के गहन अध्येता को

स्मृति-शेष
पुण्यतिथि (24 जुलाई, 1944) पर विशेषचारु तिवारी जब भी पौड़ी जाना होता है एक जगह हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती रही है. बताती रही है अपनी थाती. कोटद्वार से ऊपर जाने के बाद एक पट्टी शुरू हो जाती है कोडिया. यहीं एक गांव है पाली. बहुत चर्चित. जाना पहचाना. यहां ग्राम सभा द्वारा निर्मित प्रवेश द्वार बताता है कि आप डॉ. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल के गांव में हैं. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल का मतलब हिन्दी के पहले डी. लिट. हिन्दी की शोध परंपरा का ऐसा नाम जिसने बहुत कम उम्र में गहन अध्ययन, प्रतिबद्धता, निष्ठा और सहजता के साथ हिन्दी की सेवा की. आज उनकी पुण्यतिथि है. हम सब हिन्दी साहित्य के इन महामनीषी को अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. डॉ. पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल का जन्म पौड़ी जनपद के लैंसडाउन से तीन किलोमीटर दूर कोडिया पट्टी के पाली गांव में 13 दिसंबर, 1901 में हुआ था. उनके पिता का नाम पं. गौरीदत्त ब...
जौनसार बावर से थी पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह की दो रानियां!

जौनसार बावर से थी पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह की दो रानियां!

इतिहास
रोचक इतिहासभारत चौहान यह घटना यह घटना संभवत 1930 के आसपास की रही होगी पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह की अनेक रानियां थी उन्हें जो भी पसंद आती थी उनसे शादी कर लेते थे। जौनसार बावर के खत कोरु के चिचराड से खीमाण परिवार की बुर्की देवी (बूर्गी रानी) का विवाह भी पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह के साथ हुआ था, वह तीसरी कक्षा तक पढ़ी लिखी थी देखने में अत्यंत सुंदर बुर्गीं देवी अपनी बड़ी बहन बर्मी देवी जिसका विवाह विकासनगर के राजावाला में एक संभ्रांत परिवार में हुआ था जिनका पंजाब में भी फ्रूट और बागवानी का व्यवसाय था बुर्गी देवी भी अपने दीदी के साथ पंजाब गई थी वहीं एक समारोह में महाराजा पटियाला ने उन्हें देखा और उससे विवाह कर लिया। दूसरा विवाह जौनसार बावर बड़गांव खत के कोटवा गांव देवी सिंह ढोगराण परिवार की सबसे बड़ी सुपुत्री जो अत्यंत खूबसूरत थी मालती देवी का महाराजा पटियाला के साथ हुआ था। ...
 भारत की कृषि कहावतें: कहे घाघ के सुन भडूरी!

 भारत की कृषि कहावतें: कहे घाघ के सुन भडूरी!

ट्रैवलॉग
मंजू दिल से… भाग-32मंजू कालाकुछ पखवाड़े पहले की बात है, सुबह की चाय सुड़कते हुए एक समाचार ने मेरा ध्यान आकर्षित किया था कि  कृषि विभाग किसानों को मौसम अनुमान करने के लिए  कहावतें पढा रहा है, पढकर मुझ जैसी आधुनिका का आश्चर्य चकित होना लाजमी था,   उत्सुकता वश मैंने पड़ताल की तो  पाया कि सदियों पहले हमारे देश में  कृषि के संबंध में कुछ मुहावरे  कहे गये हैं!   मैंने जब गहराई से इन कहावतों की बाबत जानकारी इकट्ठा की तो समझ गयी की  ये  मुहावरे,  कहावतें, लोकोक्तियाँ  हमारे देश की कृषक संस्कृति  को बयां करती है,  इनमें ज्ञान भरा होता है। वैसे अरबी भाषा में एक कहावत है-, "अल-मिस्लफ़िल कलाम कल-मिल्ह फ़िततआम"  यानी बातों में-कहावतों या मुहावरों और उक्तियों की उतनी ही ज़रूरत है जितनी की खाने में नमक की।"    ग्रामीण लोक अपनी बात में वजन पैदा करने के लिए अक्सर  इन  मुहावरों का इस्तेमाल करते है...
आगाज संस्था द्वारा हरेला पर्व पर 2000 कचनार – क्विराल के पौधों का रोपण

आगाज संस्था द्वारा हरेला पर्व पर 2000 कचनार – क्विराल के पौधों का रोपण

चमोली
आगाज संस्था द्वारा दशोली ब्लाक के  किरूली गाँव में हरेला के सुअवसर 2000 कचनार - क्विराल के पौधों के रोपण का कार्य प्रारंभ किया गया. इस कार्य में किरुली गाँव के 20 रिंगाल हश्त शिल्पी परिवारों जिनके पास निजी जमीन है, या जो भी परिवार इच्छुक है  उनको शामिल किया गया है. साथ ही इन सभी किसानों का जड़ी बूटी शोध संस्थान के साथ पंजीकरण भी किया जाएगा. आगाज के अध्यक्ष जे पी मैठाणी ने बताया की, तीन वर्ष तक चलने वाली इस परियोजना अभी तक अकेले जनपद चमोली और देहरादून के 783 किसान जुड़े हुए हैं.हिमालय की महत्वपूर्ण जड़ी बूटी जैसे - सुगंधबाला, तगर, टिमरू, लोध, रागा ( ब्लू पाइन ), कचनार के अलावा मैदानी जिले देहरादून में वरुणा और कुटज का रोपण किया जा रहा है. उन्होंने जानकारी दी कि किसानों  को यह पौधे नि:शुल्क दीए जा रहे हैं. इस परियोजना के लिए जीवन्ति वेलफेयर एंड चेरिटेबल ट्रस्ट / डाबर इंडिया लिमिटेड, नई दिल्...
विद्या के परिसर में सीखने-सिखाने की संस्कृति बहाल की जाए!

विद्या के परिसर में सीखने-सिखाने की संस्कृति बहाल की जाए!

साहित्‍य-संस्कृति
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  कहा जाता है धरती पर ज्ञान जैसी कोई दूसरी पवित्र वस्तु नहीं है. भारत में प्राचीन काल से ही न केवल ज्ञान की महिमा गाई जाती रही है बल्कि उसकी साधना भी होती आ रही है. इस बात का असंदिग्ध प्रमाण देती है काल के क्रूर थपेड़ों के बावजूद अभी भी शेष बची विशाल ज्ञानराशि. अनेकानेक ग्रंथों तथा पांडुलिपियों में उपस्थित यह विपुल सामग्री भारत की वाचिक परम्परा की अनूठी उपलब्धि के रूप में वैश्विक स्तर पर अतुलनीय और आश्चर्यकारी है. यह हमारे लिए सचमुच गौरव का विषय है कि आज जैसी उन्नत संचार तकनीकी के अभाव में भी मानव स्मृति में भाषा के कोड में संरक्षित हो कर यह सब जीवित रह सका. इस परम्परा में मनुष्य के जीवन में होने वाले आरम्भ में विकास और उत्तर काल में ह्रास की अकाट्य सच्चाई को स्वीकार करते हुए मनुष्य को जीने के लिए तैयार करने की व्यवस्था की गई थी. ज्ञान केंद्रित भारतीय संस्कृति के अंतर...