
- हिमांतर ब्यूरो | उत्तरकाशी
उत्तरकाशी में चारधाम यात्रा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। ऐसे में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जनपद के सभी होटल व्यवसायियों, होमस्टे संचालकों, स्थानीय व्यापारियों एवं नागरिकों से हिमालयी पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।
जिलाधिकारी ने कहा कि गंगोत्री धाम एवं यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल चुके हैं और यात्रा मार्गों पर बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की आवाजाही जारी है। ऐसे में हिमालयी क्षेत्र तथा गंगा–यमुना के उद्गम स्थलों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि बढ़ते प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने नेताला से गंगोत्री धाम तथा दुबाटा (बड़कोट) से यमुनोत्री धाम मार्ग पर QR कोड आधारित डिपॉजिट रिफंड सिस्टम (DRS) लागू किया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक प्लास्टिक बोतल पर विशेष QR कोड अंकित रहेगा, जिससे बोतलों की ट्रैकिंग और शत-प्रतिशत पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) सुनिश्चित किया जा सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि हिमालय और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यदि हिमालय सुरक्षित रहेगा, तो पर्यटन, स्थानीय रोजगार और लोगों की आजीविका भी दीर्घकाल तक सुरक्षित रह सकेगी।
उन्होंने होटल संचालकों, होमस्टे संचालकों एवं दुकानदारों से केवल QR कोड युक्त प्लास्टिक बोतलों के उपयोग एवं बिक्री सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही प्रशासन द्वारा अधिकृत एजेंसी Recykal की टीम को पूर्ण सहयोग देने का आग्रह किया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभियान के प्रभावी संचालन के लिए सुपर नोडल अधिकारी एवं सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने अथवा बिना QR कोड वाली प्लास्टिक बोतलों का उपयोग करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अंत में जिलाधिकारी ने संदेश दिया— “हिमालय सुरक्षित, तो हमारा अस्तित्व सुरक्षित” और सभी नागरिकों से इस पर्यावरण संरक्षण अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील की।
