
- नीरज उत्तराखंडी, मनेवटी (शिमला)
शिमला जनपद की किरण पंचायत अंतर्गत ग्राम मनेवटी स्थित पवित्र देव स्थल कोफरी में बुधवार को धार्मिक आस्था, भक्ति और लोक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। चूड़धार शाही स्नान कर वापस पहुंचे शिरगुल और पीर देवता के देव चिह्नों का श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य स्वागत किया।
देव स्थल कोफरी में आयोजित धार्मिक सम्मेलन के दौरान देव चिह्नों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। देवताओं के आगमन पर पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों, रणसिंघों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ देवताओं का अभिनंदन किया तथा उनकी जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

इस पावन अवसर पर ध्याटुडियों ने शिरगुल और पीर देवता को श्रद्धा स्वरूप चांदी के छत्र, शंख और छड़ी भेंट की। इन भेंटों को देव परंपरा में विशेष सम्मान और आस्था का प्रतीक माना जाता है। देव चिह्नों को सजाकर मंदिर परिसर में स्थापित किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन कर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
पूजा-अर्चना के उपरांत रात्रि जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों और भक्तों ने भजन-कीर्तन, देव गीतों और पारंपरिक लोकधुनों के माध्यम से पूरी रात श्रद्धा का माहौल बनाए रखा। जागरण में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और दूर-दराज क्षेत्रों से आए भक्तों ने भाग लिया।

धार्मिक सम्मेलन के दौरान विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति और ग्रामवासियों ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन, बैठने और अन्य व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि शिरगुल और पीर देवता की यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चूड़धार शाही स्नान के बाद देवताओं का कोफरी आगमन ग्रामीणों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है और इस अवसर पर हर वर्ष श्रद्धा और उल्लास के साथ धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

धार्मिक सम्मेलन में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, पंचायत प्रतिनिधियों, देव समिति के सदस्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अनुपम दृश्य देखने को मिला।
