September 22, 2020
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पुस्तक समीक्षा

आत्मकथा में बस ‘अ’ और ‘ह’ बाकी कथा

कॉलम: किताबें कुछ कहती हैं… प्रकाश उप्रेती किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला, कटा ज़िंदगी का सफर धीरे-धीरे. जहाँ आप पहुँचे छ्लांगे लगाकर, वहाँ मैं भी आया मगर धीरे-धीरे.. रामदरश मिश्र जी की इन पंक्तियों से विपरीत यह आत्मकथा है. स्वयं उनका जिक्र भी आत्मकथा में है. आत्मकथा ‘स्व’ से
स्मृति शेष

शिक्षा प्रसार का ऐसा जुनून प्रताप भैया में ही देखा जा सकता था

प्रताप भैया की 10वीं पुण्यतिथि पर विशेष भुवन चन्द्र पन्त लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति का ककहरा शुरू कर महज 25 वर्ष में उत्‍तर प्रदेश विधानसभा का सदस्य और 35 वर्ष की उम्र में उत्‍तर प्रदेश में पहली बार बनी गैरकांग्रेसी सरकार में कैबिनेट मंत्री का ओहदा पा लेने वाले प्रताप भैया यदि राजनीति के लिए
किस्से/कहानियां

बेमौसम बुराँश

कहानी प्रतिभा अधिकारी ट्रेन दिल्ली से काठगोदाम को रवाना हो गयी, मनिका ने तकिया लगा चादर ओढ़ ली,  नींद कहाँ आने वाली है उसे अभी; अपने ननिहाल जा रही है वह ‘मुक्तेश्वर’. उसे मुक्तेश्वर की संकरी सड़कें और हरे-धानी लहराते खेत और बांज के वृक्ष दिखने लगे हैं अभी से, इस बार खूब मस्ती करेगी वह…
स्मृति शेष

जैंता एक दिन तो आलो, ऊ दिन यो दुनी में…

‘गिर्दा’ की पुण्यतिथि (22अगस्त) पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी 22 अगस्त को उत्तराखंड आंदोलन के जनकवि, गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की 10वीं पुण्यतिथि है. गिर्दा उत्तराखंड राज्य के एक आंदोलनकारी जनकवि थे, उनकी जीवंत कविताएं अन्याय के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा देतीं हैं. वह लोक संस्कृति के इतिहास से
संस्मरण

शहर में मिले गांधी जी और देश में मिले प्रेमचंद!

बुदापैश्त डायरी-10 डॉ. विजया सती बुदापैश्त में गांधी  गांधी जहां कहीं भी हों, उस जगह जाना, उनके साथ पल भर को ही सही, बस होना मुझे प्रिय है. और गांधी विश्व में कहां नहीं? तो बुदापैश्त में भी मिले. .. गैलर्ट हिल पर ! इस नन्हीं खूबसूरत पहाड़ी पर है- गार्डन ऑफ़ फिलॉसफी या फिलॉसफर्स […]
संस्मरण

गुड़ की भेलि में लिपटे अखबार का एक दिन

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—44 प्रकाश उप्रेती आज किस्सा- “ईजा और अखबार” का.  ईजा अपने जमाने की पाँच क्लास पढ़ी हुई हैं. वह भी बिना एक वर्ष नागा किए. जब भी पढ़ाई-लिखाई की बात आती है तो ईजा ‘अपने जमाने’ वाली बात को दोहरा ही देती हैं. हम भी कई बार गुणा-भाग और […]
उत्तराखंड

दृढ़ इच्छा शक्ति से मिला मुकाम : महेशा नन्द

डॉ. अरुण कुकसाल ‘गांव में डड्वार (अनाज मांगने की कटु प्रथा) मांगने गई मेरी मां जब घर वापस आई तो उसकी आखें आसूओं से ड़बडबाई हुई और हाथ खाली थे. मैं समझ गया कि आज भी निपट ‘मरसा का झोल’ ही सपोड़ना पड़ेगा…. गांव में शिल्पकार-सर्वण सभी गरीब थे इसलिए गरीबी नहीं सामाजिक भेदभाव मेरे […]
उत्तराखंड

उत्‍तराखंड में कीवी की बागवानी…

डॉ. राजेन्द्र कुकसाल कीवी फल (चायनीज गूजबेरी) का उत्पति स्थान चीन है, पिछले कुछ दशकों से ये फल विश्वभर में अत्यन्त लोकप्रिय हो गया है. न्यूजीलैण्ड इस फल के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि इस देश ने कीवी फल को व्यवसायिक रूप दिया इसका उत्पादन व निर्यात न्यूजीलैंड में बहुत अधिक है. कीवी फल भारत में […]
किस्से/कहानियां

राबर्ट तुम कहां हो

कहानी एम. जोशी हिमानी मैकलॉडगंज के साधना केन्द्र में बाहर घना अंधेरा छाया है. सौर ऊर्जा से जलने वाला बल्ब धीमी रोशनी से अंधेरे को दूर करने की असफल कोशिश कर रहा है. लीला नेगी साधना केन्द्र के बाहरी हिस्से में स्थित प्राकृतिक सिला पर इस हाड़ कंपाती सर्दी में बैठी है. वह दूर धौलागिरि […]
लोक पर्व/त्योहार

‘हस्त’ नक्षत्र में ही क्यों होता है कूर्माचल के सामवेदी ब्राह्मणों का ‘उपाकर्म’?

डॉ. मोहन चंद तिवारी जन्माष्टमी की भांति इस बार हरतालिका का पर्व भी दो दिन मनाया जा रहा है, 21 अगस्त को और 22 अगस्त को. वैसे कलेंडर और पंचांगों में हरतालिका तीज (हरताई) इस बार 21अगस्त की बताई गई है और 22 अगस्त को सामवेदी ब्राह्मणों का ‘उपाकर्म’ पर्व बताया गया है.वर्त्तमान समय में