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गाल के आर-पार सुआ… न खून की बूंद, न घाव का निशान!

गाल के आर-पार सुआ… न खून की बूंद, न घाव का निशान!

उत्तरकाशी
  देवता अवतरित होते ही पश्वा ने गाल में आर-पार किया लोहे-चांदी का सुआ, अद्भुत परंपरा देखने उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाबनीरज उत्तराखंडी, पुरोला (उत्तरकाशी)उत्तरकाशी के रामा गांव में भाद्रपद मास की 22 गते को आयोजित पारंपरिक स्यूड़िया जातर में आस्था और लोक परंपरा का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। स्यूडिया देवता के पश्वा पर देवता अवतरित होने के बाद उन्होंने अपने गाल में लोहे-चांदी का सुआ स्वयं चुभाकर आर-पार कर लिया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुआ गाल के आर-पार होने के बावजूद खून बहता दिखाई नहीं दिया। सुआ निकाले जाने के बाद भी गाल पर कोई स्पष्ट घाव नजर नहीं आया। इस दृश्य ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया। स्थानीय लोग इसे स्यूडिया देवता से जुड़ी सदियों पुरानी देव परंपरा और अपनी गहरी आस्था का प्रतीक मानते हैं। देवता अवतरित होते ही बदल गया माहौल जैसे ही पश्वा पर...
विस्सू मेले में झलकी जौनसार-बावर की समृद्ध परंपरा, शेडकुड़िया महाराज के दरबार में उमड़ा जनसैलाब

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देहरादून
 नीरज उत्तराखंडी, त्यूणी (देहरादून)जौनसार-बावर क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक विस्सू पर्व इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. त्यूणी क्षेत्र के राइगी स्थित चार महासू देवताओं के वजीर माने जाने वाले शूलाखंडी शेडकुड़िया महाराज के मंदिर में आयोजित विस्सू मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक ठोठा (ठोडा) नृत्य और निशानाबाजी रहा, जिसमें दोनों पक्षों के युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में वीरता और कौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया. ढोल-दमाऊं की थाप पर हुए इस आयोजन ने मेले में उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. वहीं, क्षेत्र की महिलाओं—ध्यानटुड़ी और रंईणटुड़ियों—ने पारंपरिक परिधान में तांदी नृत्य प्रस्तुत कर सांस्कृतिक रंग को और भी प्रखर बना दिया. लोकगीतों और नृत्यों के माध्यम से महिलाओं न...