Tag: तांदी नृत्य

बौल्याधार में गूंजा लोक संस्कृति का रंग, देव डोलियों के सानिध्य में थिरके कदम

बौल्याधार में गूंजा लोक संस्कृति का रंग, देव डोलियों के सानिध्य में थिरके कदम

उत्तरकाशी, लोक पर्व-त्योहार
  हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मेले में उमड़ा आस्था और परंपरा का सैलाबनीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीगाजणा क्षेत्र के ठांडी गांव स्थित बौल्याधार में आयोजित तीन दिवसीय ऐतिहासिक एवं पौराणिक मेला रविवार को पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और लोक संस्कृति के रंगों के बीच संपन्न हुआ। 4 से 6 सितंबर तक चले इस मेले में क्षेत्र की लोक आस्था, देव परंपरा, पशुपालन और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाला यह मेला गाजणा क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी माना जाता है। मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचे तथा देवडोलियों के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।देवडोलियों के सानिध्य में हुए धार्मिक अनुष्ठान मेले में...
ऊन कटाई पर्व: देवक्यारा बुग्याल से लौटीं भेड़-बकरियां, ढोल-दमाऊं और तांदी नृत्य से जीवंत हुई लोक संस्कृति

ऊन कटाई पर्व: देवक्यारा बुग्याल से लौटीं भेड़-बकरियां, ढोल-दमाऊं और तांदी नृत्य से जीवंत हुई लोक संस्कृति

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोला/मोरीउत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के दूरस्थ पर्वतीय गांव इन दिनों सदियों पुरानी लोक परंपरा ऊन कटाई पर्व के उल्लास में डूबे हुए हैं। देवक्यारा बुग्याल सहित ऊंचाई वाले चरागाहों में करीब तीन माह तक भेड़-बकरियों और मवेशियों को चराने के बाद अगस्त-सितंबर में भेड़पालकों यानी स्थानीय बोली में ‘भेड़ाल’ की गांवों में वापसी शुरू हो गई है। पशुधन के साथ गांव लौटते भेड़ालों के स्वागत को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।तीन माह बाद घर लौटता है पशुधन, शुरू होती है पर्व की रौनकगर्मियों की शुरुआत के साथ मोरी क्षेत्र के कई गांवों से भेड़पालक अपने पशुधन को लेकर ऊंचे बुग्यालों और पारंपरिक चरागाहों की ओर निकल जाते हैं। देवक्यारा कुयाल और आसपास के बुग्यालों में करीब तीन माह तक भेड़-बकरियों एवं अन्य मवेशियों को चराने के बाद अब उनकी वापसी शुरू ह...
पर्वत क्षेत्र के 22 गांवों में ईष्ट देव सोमेश्वर महाराज के देवगोती मेले की धूम

पर्वत क्षेत्र के 22 गांवों में ईष्ट देव सोमेश्वर महाराज के देवगोती मेले की धूम

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी,  पुरोलामोरी ब्लॉक के पर्वत क्षेत्र के 22 गांवों में इन दिनों ईष्ट देव सोमेश्वर महाराज के पावन देवगोती मेले की धूमधाम देखने को मिल रही है. यह पारंपरिक मेला 15 गते माघ से पंचगाई अडोर एवं बड़ासु पट्टी के गांवों में विधिवत रूप से प्रारंभ हो गया है. 15 माघ को सोमेश्वर महाराज की डोली को उनकी मूल थाती जखोल गांव स्थित मंदिर से बाहर निकाला गया. इसके साथ ही देवगोती मेला जखोल से आरंभ होकर तीनों पट्टियों के गांव-गांव में भ्रमण करता है. यह मेला कुल 22 दिनों तक 22 गांवों में बड़े ही उल्लास, श्रद्धा और आनंद के साथ मनाया जाता है. पर्वत क्षेत्र में देवगोती मेला बसंत ऋतु के आगमन और हरियाली उत्सव के प्रतीक के रूप में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है. मेले की तिथियां जखोल के राज पुरोहितों एवं सोमेश्वर महाराज की आज्ञा से निर्धारित की जाती हैं.22 दिवसीय इस मेले के दौरान सोमेश...