Tag: आत्मनिर्भरता

 भेड़-बकरी पालन से आत्मनिर्भर बन रहे पहाड़ के गांव, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

 भेड़-बकरी पालन से आत्मनिर्भर बन रहे पहाड़ के गांव, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

उत्तरकाशी
पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका की रीढ़ बना भेड़-बकरी पालन, हजारों परिवारों को मिल रहा सहारानीरज उत्तराखंडी, पुरोलापर्वतीय क्षेत्रों में खेती की सीमित जमीन, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और रोजगार के सीमित अवसरों के बीच भेड़-बकरी पालन पहाड़ की आर्थिकी और आजीविका की मजबूत रीढ़ बनकर उभरा है. सर बड़ियार क्षेत्र के दुर्गम गांवों में हजारों परिवार इस पारंपरिक व्यवसाय से सीधे जुड़े हुए हैं.आय और आत्मनिर्भरता का आधार विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ में छोटे और सीमांत किसानों के लिए भेड़-बकरी पालन कम लागत और शीघ्र आमदनी देने वाला व्यवसाय है.बकरी का दूध, मांस और खाद स्थानीय बाजार में आसानी से बिक जाते हैं. भेड़ों से ऊन का उत्पादन होता है, जो हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग में उपयोगी है. प्राकृतिक चरागाहों की उपलब्धता से चारे की लागत अपेक्षाकृत कम रहती है.महिलाओं की बढ़ती भागीदारी...
आजीविका से आत्मनिर्भरता तक: हिमोत्थान की पहाड़ी पहल को मिला “डूइंग गुड फॉर भारत अवार्ड्स 2025”

आजीविका से आत्मनिर्भरता तक: हिमोत्थान की पहाड़ी पहल को मिला “डूइंग गुड फॉर भारत अवार्ड्स 2025”

दिल्ली-एनसीआर
टाटा ट्रस्ट की सहयोगी संस्था हिमोत्थान को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के 20 गांवों में अपने समग्र ग्रामीण विकास प्रयासों से 1,000 से अधिक परिवारों की आय बढ़ाने के लिए पुरस्कार मिला परिवर्तनकर्ताओं के लिए एशिया के सबसे बड़े मंच ने टाटा ट्रस्ट की सहयोगी, देहरादून स्थित हिमोत्थान सोसाइटी को ग्रामीण विकास में उत्कृष्टता के लिए "डूइंग गुड फॉर भारत अवार्ड्स - 2025" से सम्मानित किया. यह पुरस्कार 12वें भारत सीएसआर और ईएसजी शिखर सम्मेलन - 2025 के दौरान प्रदान किया गया. हिमोत्थान सोसाइटी को यह सम्मान उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के 20 गाँवों में अपने समग्र ग्रामीण विकास प्रयासों के लिए मिला है, जिससे 1,000 से अधिक परिवारों को सीधे लाभ हुआ है. विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से, हिमोत्थान 1000 परिवारों की औसत वार्षिक आय 60,000 से 80,000 रुपये तक बढ़ा रहा है; साथ ही, प्रशिक्षण क्षमता भी बढ़ाई गई...
केदारनाथ यात्रा: आस्था के साथ आत्मनिर्भरता का सफर

केदारनाथ यात्रा: आस्था के साथ आत्मनिर्भरता का सफर

रुद्रप्रयाग
हिमांतर ब्यूरो,रुद्रप्रयाग  उच्च हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ धाम श्रद्धालुओं के लिए अपने कपाट खोलता है, तो केवल उनकी आस्था ही नहीं उमड़ती, साथ ही एक नई आर्थिक ऊर्जा भी पर्वतों में जाग उठती है। इस वर्ष भी केदारनाथ यात्रा ने न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले की सैकड़ों महिलाओं को नया संबल दिया है।जहां एक ओर श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन हेतु कठिन चढ़ाई चढ़ते हैं, वहीं यात्रा मार्ग पर फैले महिला स्वयं सहायता समूहों की दुकानें, होमस्टे और जलपान गृह न केवल राहत देते हैं, बल्कि एक स्थानीय जीवनशैली की झलक भी प्रस्तुत करते हैं, जो "वोकल फॉर लोकल" की मिसाल बन चुकी है। एक यात्रा, कई अवसर: महिला समूहों का उद्यम इस वर्ष करीब 150 महिला समूह केदारनाथ यात्रा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय हैं। प्रसाद पैकेजिंग, धूपबत्ती निर्माण, तिल-जौ ...