September 20, 2020
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संस्मरण

 जहां विश्वास है, वहां प्यार है!

बुदापैश्त डायरी-12 डॉ. विजया सती विदेश में हम अपनी भाषा भी पढ़ाते हैं और अपने देश से भी परिचित कराते हैं – क्योंकि आखिरकार तो देश की पूरी तस्वीर देनी है हमें ! जैसे हमारा अध्यापन अपने देश के परिचय से जुड़ा रहता है, उसी तरह दूसरे देश का पूर्ण परिचय भी हमारा लक्ष्य होता […]
पुस्तक समीक्षा

ट्यूलिप के फूल कहानी संग्रह

कॉलम: किताबें कुछ कहती हैं… डॉ. विजया सती सुपरिचित लेखिका एम.जोशी हिमानी का नवीनतम कहानी संग्रह है– ट्यूलिप के फूल जो भावना प्रकाशन दिल्ली से 2020 में प्रकाशित हुआ. इससे पहले लेखिका एक कविता संग्रहों के अतिरिक्त उपन्यास ‘हंसा आएगी जरूर’ और कहानी संग्रह ‘पिनड्रॉप साइलैंस’ भी दे चुकी हैं. जीवन के आरंभिक पंद्रह वर्ष […]
संस्मरण

राष्ट्र नायक

बुदापैश्त डायरी-11 डॉ. विजया सती बुदापैश्त में रहते हुए हमने जाना कि 15 मार्च हंगरी के इतिहास में एक विशेष दिन है. यह 1948 की क्रान्ति की स्मृति में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय दिवस है. इस क्रान्ति के प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में पेतोफ़ी शांदोर को याद किया जाता है. हंगरी की क्रान्ति और आज़ादी […]
संस्मरण

शहर में मिले गांधी जी और देश में मिले प्रेमचंद!

बुदापैश्त डायरी-10 डॉ. विजया सती बुदापैश्त में गांधी  गांधी जहां कहीं भी हों, उस जगह जाना, उनके साथ पल भर को ही सही, बस होना मुझे प्रिय है. और गांधी विश्व में कहां नहीं? तो बुदापैश्त में भी मिले. .. गैलर्ट हिल पर ! इस नन्हीं खूबसूरत पहाड़ी पर है- गार्डन ऑफ़ फिलॉसफी या फिलॉसफर्स […]
संस्मरण

बुदापैश्त में गुरुदेव स्मृति

बुदापैश्त डायरी-9 डॉ. विजया सती गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर को मई माह के आरम्भ से अगस्त तक कई रूपों में याद किया गया. बुदापैश्त से मेरे मन की भी यह एक मधुर स्मृति ! बुदापैश्त में मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में सामान्यत: ऐसा मौसम नहीं होता था. किन्तु उस दिन अप्रत्याशित रूप से सुखद हल्की […]
संस्मरण

दुना नदी के तट से

बुदापैश्त डायरी-8 डॉ. विजया सती जब हम बुदापैश्त में थे, ऐसे अवसर भी आए जब देश और विदेश एक हो गए! … वह तीस जनवरी की सुबह थी,  दुना नदी के किनारे की ठंडक ने देह में सिहरन पैदा की. तट से ज़रा ही दूर, वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क का एक कोना धीरे-धीरे […]
संस्मरण

फिर शुरू हुआ जीवन

बुदापैश्त डायरी : 6 डॉ. विजया सती नए देश में हम अपने देश को भी नई दृष्टि से देखते हैं. ऐसा ही होता रहा हमारे साथ बुदापैश्त में  ..अपने जाने-पहचाने जीवन की नई-नई छवियाँ खुलती रही हमारे सामने. विभाग में हिन्दी पढ़ने वाले युवा विद्यार्थियों की पहली पसंद होती – भारत जाने पर बनारस की […]
संस्मरण

हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा

डॉ विजया सती दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से हाल में ही सेवानिवृत्त हुई हैं। इससे पहले आप विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हिन्दी–ऐलते विश्वविद्यालय, बुदापैश्त, हंगरी में तथा प्रोफ़ेसर हिन्दी–हान्कुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरन स्टडीज़, सिओल, दक्षिण कोरिया में कार्यरत रहीं। साथ ही महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, पुस्तक समीक्षा, संस्मरण, आलेख निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। विजया सती